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Ghazipur News: चचेरे भाई की हत्या के दोषी को दस वर्ष का कारावास, जुर्माना भी लगाया
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गाजीपुर। अपर सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह ने चचेरे भाई की हत्या के मामले में दोषी सतीश बिंद को दस वर्ष का कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड से शुक्रवार को दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को एक माह का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
शहर कोतवाली बिरहिम बाद बबेड़ी गांव निवासी वादी अशोक बिंद ने 29 जनवरी 2024 को पुलिस को तहरीर देकर बताया कि घर के रास्ते पर बड़े भाई श्रीनाथ बिंद ने अपनी भैंस बांधी थी। जब बेटा सुनील कुमार ने श्रीनाथ बिंद से भैंस को रास्ते से हटाने को कहा तो इससे आक्रोशित होकर श्रीनाथ बिंद और उनका लड़का सतीश गाली-गलौज करते हुए सुनील को लाठी डंडे से मारने पीटने लगे। इसी बीच वादी अशोक बिंद की लड़की सुमित्रा बीच-बचाव करने पहुंची तो आरोपियों ने उसे भी मारपीटा। मारपीट से वादी के बेटे और बेटी को चोट आई। वादी बेटे सुनील को इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल लाया। चिकित्सक ने सुनील को मृत घोषित कर दिया। वादी की सूचना पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्जकर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। सात गवाहों ने न्यायालय में गवाही दी। न्यायालय ने आरोपी श्रीनाथ बिंद को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। जबकि उसके बेटे सतीश बिंद को दोषी पाते हुए उपरोक्त सजा सुनाते हुए जेल भेज दिया।
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शहर कोतवाली बिरहिम बाद बबेड़ी गांव निवासी वादी अशोक बिंद ने 29 जनवरी 2024 को पुलिस को तहरीर देकर बताया कि घर के रास्ते पर बड़े भाई श्रीनाथ बिंद ने अपनी भैंस बांधी थी। जब बेटा सुनील कुमार ने श्रीनाथ बिंद से भैंस को रास्ते से हटाने को कहा तो इससे आक्रोशित होकर श्रीनाथ बिंद और उनका लड़का सतीश गाली-गलौज करते हुए सुनील को लाठी डंडे से मारने पीटने लगे। इसी बीच वादी अशोक बिंद की लड़की सुमित्रा बीच-बचाव करने पहुंची तो आरोपियों ने उसे भी मारपीटा। मारपीट से वादी के बेटे और बेटी को चोट आई। वादी बेटे सुनील को इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल लाया। चिकित्सक ने सुनील को मृत घोषित कर दिया। वादी की सूचना पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्जकर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। सात गवाहों ने न्यायालय में गवाही दी। न्यायालय ने आरोपी श्रीनाथ बिंद को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। जबकि उसके बेटे सतीश बिंद को दोषी पाते हुए उपरोक्त सजा सुनाते हुए जेल भेज दिया।
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