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Gonda News: कर्तव्य पथ के लिए पुलिस व पीएसी के 1,074 जवान तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 26 Apr 2026 11:37 PM IST
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पुलिस लाइन मैदान में रविवार को पासिंग आउट परेड करते रिक्रूट और बेटे चंदन शुक्ल ने पुलिस की पगड़
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गोंडा। नौ माह के कठिन प्रशिक्षण के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस के 497 और 30वीं वाहिनी पीएसी के 577 रिक्रूट आरक्षी कर्तव्य पथ के लिए तैयार हो चुके हैं। पुलिस लाइन व 30वीं वाहिनी पीएसी के ग्राउंड में रविवार को आयोजित दीक्षांत परेड में इन आरक्षियों ने अनुशासन, समन्वय और आत्मविश्वास का शानदार प्रदर्शन किया, जिसने उपस्थित अधिकारियों और अतिथियों को प्रभावित किया।
पुलिस लाइन ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आईजी अमित पाठक ने परेड की सलामी ली और सूक्ष्म निरीक्षण कर जवानों की तैयारी को सराहा। इस दौरान टोलीवार मार्चपास्ट, सलामी शस्त्र और विभिन्न ड्रिल गतिविधियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। एसपी विनीत जायसवाल ने सभी रिक्रूट आरक्षियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाते हुए ईमानदारी, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ कर्तव्यों के निर्वहन के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जवानों को सम्मानित भी किया गया।
समर पाल वर्मा और शैलेंद्र यादव को मानसिक व शारीरिक दक्षता के लिए विशेष पुरस्कार मिला। नित्यानंद त्रिपाठी को सर्वांग सर्वोत्तम आरक्षी चुना गया। अन्य श्रेणियों में भी कई रिक्रूट को ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। परेड के सफल संचालन में परेड कमांडर सौभाग्य, अभय यादव और अभय प्रताप सिंह की अहम भूमिका रही।
वहीं, 30वीं वाहिनी पीएसी के ग्राउंड में आयोजित दीक्षांत परेड में मुख्य अतिथि के रूप में एडीजी (मानवाधिकार) राजकुमार मौजूद रहे। अधिकारियों ने प्रशिक्षकों के समर्पण और मार्गदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यही मेहनत जवानों को सक्षम और जिम्मेदार पुलिसकर्मी बनाती है। इस दौरान इंद्रजीत सिंह यादव, राजू निषाद, विशाल कुमार, मनीष जायसवाल आदि मौजूद रहे।
कड़े संघर्षों के बाद मिला मुकाम तो खिले चेहरे
गोंडा। नौ माह की कठिन ट्रेनिंग के बाद जब परेड ग्राउंड में कदमताल गूंज रही थी, तब संघर्षों की कई कहानियां भी मुकाम तक पहुंच रही थीं। अंबेडकरनगर के आशीष गुप्ता के संघर्ष की दास्तां भावुक कर देने वाली रही। पांच साल पहले पिता का साया सिर से उठ गया था। घर की जिम्मेदारी, आर्थिक तंगी आदि चुनौतियों के बीच मां ने हिम्मत नहीं हारी। अपनी सुख-सुविधाएं छोड़ बेटे का भविष्य संवारने में जुटी रहीं। वही बेटा जब आज वर्दी में उनके सामने खड़ा हुआ तो मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। बेटे ने जैसे ही टोपी पहनी, मां खुद को संभाल नहीं सकीं और फफककर रो पड़ीं। किसान बैजनाथ वर्मा के चेहरे पर भी खुशी नजर आ रही थी। सीमित संसाधनों में बेटे सूरज वर्मा को पढ़ाना और उसे इस मुकाम तक पहुंचाना आसान नहीं था, लेकिन आज जब बेटे को वर्दी में देखा, तो चेहरे पर मुस्कान आ गई। लखीमपुर के चंदन शुक्ल ने जब अपनी मां सुलेखा शुक्ला के सिर पर पुलिस की टोपी रखी, तो वह पल सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि मां के वर्षों के त्याग का सम्मान था। पिता विपिन शुक्ल और छोटी बहन दिव्यांशी का चेहरा भी खुशी से खिल उठा। (संवाद)
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पुलिस लाइन ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आईजी अमित पाठक ने परेड की सलामी ली और सूक्ष्म निरीक्षण कर जवानों की तैयारी को सराहा। इस दौरान टोलीवार मार्चपास्ट, सलामी शस्त्र और विभिन्न ड्रिल गतिविधियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। एसपी विनीत जायसवाल ने सभी रिक्रूट आरक्षियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाते हुए ईमानदारी, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ कर्तव्यों के निर्वहन के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जवानों को सम्मानित भी किया गया।
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समर पाल वर्मा और शैलेंद्र यादव को मानसिक व शारीरिक दक्षता के लिए विशेष पुरस्कार मिला। नित्यानंद त्रिपाठी को सर्वांग सर्वोत्तम आरक्षी चुना गया। अन्य श्रेणियों में भी कई रिक्रूट को ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। परेड के सफल संचालन में परेड कमांडर सौभाग्य, अभय यादव और अभय प्रताप सिंह की अहम भूमिका रही।
वहीं, 30वीं वाहिनी पीएसी के ग्राउंड में आयोजित दीक्षांत परेड में मुख्य अतिथि के रूप में एडीजी (मानवाधिकार) राजकुमार मौजूद रहे। अधिकारियों ने प्रशिक्षकों के समर्पण और मार्गदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यही मेहनत जवानों को सक्षम और जिम्मेदार पुलिसकर्मी बनाती है। इस दौरान इंद्रजीत सिंह यादव, राजू निषाद, विशाल कुमार, मनीष जायसवाल आदि मौजूद रहे।
कड़े संघर्षों के बाद मिला मुकाम तो खिले चेहरे
गोंडा। नौ माह की कठिन ट्रेनिंग के बाद जब परेड ग्राउंड में कदमताल गूंज रही थी, तब संघर्षों की कई कहानियां भी मुकाम तक पहुंच रही थीं। अंबेडकरनगर के आशीष गुप्ता के संघर्ष की दास्तां भावुक कर देने वाली रही। पांच साल पहले पिता का साया सिर से उठ गया था। घर की जिम्मेदारी, आर्थिक तंगी आदि चुनौतियों के बीच मां ने हिम्मत नहीं हारी। अपनी सुख-सुविधाएं छोड़ बेटे का भविष्य संवारने में जुटी रहीं। वही बेटा जब आज वर्दी में उनके सामने खड़ा हुआ तो मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। बेटे ने जैसे ही टोपी पहनी, मां खुद को संभाल नहीं सकीं और फफककर रो पड़ीं। किसान बैजनाथ वर्मा के चेहरे पर भी खुशी नजर आ रही थी। सीमित संसाधनों में बेटे सूरज वर्मा को पढ़ाना और उसे इस मुकाम तक पहुंचाना आसान नहीं था, लेकिन आज जब बेटे को वर्दी में देखा, तो चेहरे पर मुस्कान आ गई। लखीमपुर के चंदन शुक्ल ने जब अपनी मां सुलेखा शुक्ला के सिर पर पुलिस की टोपी रखी, तो वह पल सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि मां के वर्षों के त्याग का सम्मान था। पिता विपिन शुक्ल और छोटी बहन दिव्यांशी का चेहरा भी खुशी से खिल उठा। (संवाद)

पुलिस लाइन मैदान में रविवार को पासिंग आउट परेड करते रिक्रूट और बेटे चंदन शुक्ल ने पुलिस की पगड़

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