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Gonda News: हर दिन 14 लोग हो रहे साइबर ठगी के शिकार
Tue, 14 Jul 2026 12:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 14 Jul 2026 12:04 AM IST
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गोंडा। जिले में साइबर अपराध अब रोजमर्रा की बड़ी चुनौती बन गया है। इस साल अब तक लगभग साढ़े छह महीने में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर 3,100 शिकायतें दर्ज हुई हैं। यानी औसतन प्रतिदिन 14 से अधिक लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। पुलिस की सक्रियता से इस अवधि में करीब 6.82 करोड़ रुपये होल्ड या रिफंड कराए गए हैं।
साइबर सेल के अधिकारियों के अनुसार पहले ठग बैंक केवाईसी, बिजली बिल, ओटीपी या एपीके फाइल भेजकर लोगों को निशाना बनाते थे, लेकिन अब उनका पूरा फोकस निवेश (इन्वेस्टमेंट) और ऑनलाइन ट्रेडिंग पर आ गया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिये लोगों को कम समय में कई गुना मुनाफे का सपना दिखाकर लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही है। 2024 में 3,147 शिकायतें आईं। इनमें 2.10 करोड़ रुपये होल्ड या राशि को वापस कराया गया।
बदल गया साइबर ठगी का पूरा नेटवर्क
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक अब ठग सीधे बैंक खाते या ओटीपी नहीं मांगते। पहले सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन दिखाकर लोगों को टेलीग्राम या व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा जाता है। वहां फर्जी स्क्रीनशॉट और अन्य लोगों के मुनाफे की तस्वीरें साझा कर माहौल बनाया जाता है। इसके बाद पीड़ित को एक एप या वेबसाइट पर खाता खुलवाया जाता है, जहां निवेश बढ़ता हुआ दिखाई देता है। कई मामलों में शुरुआती छोटी रकम निकालने भी दी जाती है ताकि भरोसा मजबूत हो जाए। इसके बाद बड़ी रकम निवेश कराते ही निकासी बंद कर दी जाती है।
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महिलाएं, व्यापारी और सरकारी कर्मचारी निशाने पर
साइबर सेल के अनुसार ठग अलग-अलग वर्गों को अलग-अलग तरीके से निशाना बनाते हैं। महिलाओं को घर बैठे कमाई और पार्ट टाइम जॉब का लालच दिया जाता है। व्यापारियों को कम समय में अधिक मुनाफा और सरकारी कर्मचारियों को अतिरिक्त आय का सपना दिखाकर निवेश कराया जाता है। रिटायर कर्मचारी और पेशेवर लोग भी तेजी से इनके जाल में फंस रहे हैं।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
साइबर विशेषज्ञ हरिओम टंडन का कहना है कि साइबर ठग लोगों के लालच और जल्द मुनाफा कमाने की मानसिकता का फायदा उठाते हैं। कोई भी कंपनी यदि बहुत कम समय में कई गुना लाभ का दावा कर रही है तो उसकी पूरी जांच जरूर करें। सोशल मीडिया पर दिखने वाले विज्ञापनों पर आंख बंद कर विश्वास न करें।
प्ले स्टोर के बाहर से कोई एप डाउनलोड न करें और किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। यदि किसी तरह की साइबर ठगी हो जाए तो बिना देर किए 1930 साइबर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही संबंधित बैंक को तत्काल सूचना दें, ताकि खाते को फ्रीज कर बची हुई रकम सुरक्षित की जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती कुछ घंटे साइबर धोखाधड़ी के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
2025
3,911 शिकायतें आईं
2.60 करोड़ रुपये वापस हुए
2026
3,100 शिकायतें आईं
2.12 करोड़ रुपये वापस हुए
कम समय में मुनाफे का लालच बना जंजाल
आठ जुलाई की रात करनैलगंज कोतवाली के नचनी गांव निवासी अजय मौर्य ने रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें कम समय में कई गुना लाभ की लालच में 1.08 करोड़ रुपये निवेश कर दिए। बाद में मामला साइबर ठगी का निकला। पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की है।
जनवरी 2026 में एक चिकित्सक को एक व्यक्ति ने हेल्थ उपकरण बनाने वाली कंपनी का प्रतिनिधि बताकर संपर्क किया। उसने फोन और ई मेल के जरिये कंपनी के उत्पादों की जानकारी, कैटलॉग और दस्तावेज भेजकर भरोसा दिलाया कि एजेंसी लेने पर अच्छा मुनाफा होगा। चिकित्सक ने बिना पर्याप्त सत्यापन किए अलग-अलग किस्तों में 11.64 लाख रुपये जमा कर दिए।
भुगतान के बाद न तो एजेंसी मिली और न ही उपकरण। मालवीय नगर निवासी एक व्यक्ति ने चार मई को रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें सोशल मीडिया के जरिये शेयर ट्रेडिंग में निवेश का लालच देकर 39.25 लाख रुपये की ठगी की गई।
सतर्कता जरूरी
निवेश से पहले कंपनी और प्लेटफॉर्म का सत्यापन करें।
केवल अधिकृत एप स्टोर से ही एप डाउनलोड करें।
साइबर ठगी होते ही 1930 पर कॉल करें।
बैंक और एनसीआरपी पोर्टल पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
अनजान लिंक या एपीके फाइल डाउनलोड न करें।
ओटीपी, बैंक विवरण या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी साझा न करें।
अधिक मुनाफे के लालच में बिना जांच पैसा निवेश न करें।
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साइबर सेल के अधिकारियों के अनुसार पहले ठग बैंक केवाईसी, बिजली बिल, ओटीपी या एपीके फाइल भेजकर लोगों को निशाना बनाते थे, लेकिन अब उनका पूरा फोकस निवेश (इन्वेस्टमेंट) और ऑनलाइन ट्रेडिंग पर आ गया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिये लोगों को कम समय में कई गुना मुनाफे का सपना दिखाकर लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही है। 2024 में 3,147 शिकायतें आईं। इनमें 2.10 करोड़ रुपये होल्ड या राशि को वापस कराया गया।
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बदल गया साइबर ठगी का पूरा नेटवर्क
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक अब ठग सीधे बैंक खाते या ओटीपी नहीं मांगते। पहले सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन दिखाकर लोगों को टेलीग्राम या व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा जाता है। वहां फर्जी स्क्रीनशॉट और अन्य लोगों के मुनाफे की तस्वीरें साझा कर माहौल बनाया जाता है। इसके बाद पीड़ित को एक एप या वेबसाइट पर खाता खुलवाया जाता है, जहां निवेश बढ़ता हुआ दिखाई देता है। कई मामलों में शुरुआती छोटी रकम निकालने भी दी जाती है ताकि भरोसा मजबूत हो जाए। इसके बाद बड़ी रकम निवेश कराते ही निकासी बंद कर दी जाती है।
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महिलाएं, व्यापारी और सरकारी कर्मचारी निशाने पर
साइबर सेल के अनुसार ठग अलग-अलग वर्गों को अलग-अलग तरीके से निशाना बनाते हैं। महिलाओं को घर बैठे कमाई और पार्ट टाइम जॉब का लालच दिया जाता है। व्यापारियों को कम समय में अधिक मुनाफा और सरकारी कर्मचारियों को अतिरिक्त आय का सपना दिखाकर निवेश कराया जाता है। रिटायर कर्मचारी और पेशेवर लोग भी तेजी से इनके जाल में फंस रहे हैं।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
साइबर विशेषज्ञ हरिओम टंडन का कहना है कि साइबर ठग लोगों के लालच और जल्द मुनाफा कमाने की मानसिकता का फायदा उठाते हैं। कोई भी कंपनी यदि बहुत कम समय में कई गुना लाभ का दावा कर रही है तो उसकी पूरी जांच जरूर करें। सोशल मीडिया पर दिखने वाले विज्ञापनों पर आंख बंद कर विश्वास न करें।
प्ले स्टोर के बाहर से कोई एप डाउनलोड न करें और किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। यदि किसी तरह की साइबर ठगी हो जाए तो बिना देर किए 1930 साइबर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही संबंधित बैंक को तत्काल सूचना दें, ताकि खाते को फ्रीज कर बची हुई रकम सुरक्षित की जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती कुछ घंटे साइबर धोखाधड़ी के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
2025
3,911 शिकायतें आईं
2.60 करोड़ रुपये वापस हुए
2026
3,100 शिकायतें आईं
2.12 करोड़ रुपये वापस हुए
कम समय में मुनाफे का लालच बना जंजाल
आठ जुलाई की रात करनैलगंज कोतवाली के नचनी गांव निवासी अजय मौर्य ने रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें कम समय में कई गुना लाभ की लालच में 1.08 करोड़ रुपये निवेश कर दिए। बाद में मामला साइबर ठगी का निकला। पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की है।
जनवरी 2026 में एक चिकित्सक को एक व्यक्ति ने हेल्थ उपकरण बनाने वाली कंपनी का प्रतिनिधि बताकर संपर्क किया। उसने फोन और ई मेल के जरिये कंपनी के उत्पादों की जानकारी, कैटलॉग और दस्तावेज भेजकर भरोसा दिलाया कि एजेंसी लेने पर अच्छा मुनाफा होगा। चिकित्सक ने बिना पर्याप्त सत्यापन किए अलग-अलग किस्तों में 11.64 लाख रुपये जमा कर दिए।
भुगतान के बाद न तो एजेंसी मिली और न ही उपकरण। मालवीय नगर निवासी एक व्यक्ति ने चार मई को रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें सोशल मीडिया के जरिये शेयर ट्रेडिंग में निवेश का लालच देकर 39.25 लाख रुपये की ठगी की गई।
सतर्कता जरूरी
निवेश से पहले कंपनी और प्लेटफॉर्म का सत्यापन करें।
केवल अधिकृत एप स्टोर से ही एप डाउनलोड करें।
साइबर ठगी होते ही 1930 पर कॉल करें।
बैंक और एनसीआरपी पोर्टल पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
अनजान लिंक या एपीके फाइल डाउनलोड न करें।
ओटीपी, बैंक विवरण या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी साझा न करें।
अधिक मुनाफे के लालच में बिना जांच पैसा निवेश न करें।