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Gonda News: श्रावस्ती का लैब टेक्नीशियन निकला खून के काले कारोबार का सरगना
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गोंडा। जिले में खून के काले कारोबार में शामिल आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि गिरोह का सरगना श्रावस्ती जिले के भिनगा जिला अस्पताल में तैनात लैब टेक्नीशियन सौरभ श्रीवास्तव है। वह इससे पहले इटियाथोक सीएचसी में तैनात था। सौरभ के साथ पकड़ा गया दूसरा आरोपी अभिषेक सिंह बलरामपुर में केके चैरीटेबल ब्लड बैंक चलाता है।
अभिषेक के पिता मौजूदा समय पंडरीकृपाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात हैं। पुलिस अब पड़ताल कर रही कि गिरोह के लोगों को कहीं सरकारी तंत्र का संरक्षण तो नहीं था। जांच की आंच गोंडा के अलावा आसपास के चार जिलों तक पहुंच गई है। कोतवाली नगर पुलिस ने रविवार को खून की अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार किया था।
पकड़े गए लोगों के पास से 253 कूटरचित ब्लड बैंक कार्ड व नौ मोबाइल बरामद हुए थे। जांच में फर्जी दस्तावेज से रक्त उपलब्ध कराने का संगठित खेल सामने आया। ये लोग गिरोह बनाकर काम करते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गिरोह के लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप ग्रुप और मोबाइल के जरिये ऐसे लोगों तक पहुंच बनाते थे, जिनके परिजन अस्पतालों में भर्ती थे और उन्हें तत्काल रक्त की जरूरत थी।
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अस्पतालों के बाहर सक्रिय बदमाश मरीजों के तीमारदारों से संपर्क करते थे। गिरोह के लोग व्हाट्सएप से एक-दूसरे से जुड़े रहते थे। जरूरतमंद के मिलने पर ऑनलाइन भुगतान लेकर उसे रक्त उपलब्ध करा दिया जाता था। बरामद मोबाइल की डिजिटल फॉरेंसिक जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि लोग इस काम में कब से लगे हैं। साथ ही अब तक कितने लोगों को इन्होंने पैसे लेकर खून उपलब्ध कराया है।
होगी सख्त कार्रवाई
गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच से सूचनाएं एकत्र की जा रही हैं। आरोपियों के बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, मोबाइल कॉल डिटेल, सोशल मीडिया चैट और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े संपर्कों की गहन जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विनीत जायसवाल, एसपी
ब्लड बैंक से जुटाई जानकारी
नगर कोतवाली पुलिस की टीम ने मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक पहुंचकर वहां के रिकॉर्ड, ब्लड बैग और वितरण प्रक्रिया की जानकारी जुटाई है। कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई है। हालांकि अभी तक मेडिकल कॉलेज की प्रत्यक्ष संलिप्तता सामने नहीं आई है, लेकिन पुलिस हर उस बिंदु की जांच कर रही है, जहां से नेटवर्क को किसी प्रकार की मदद मिल सकती थी।
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अभिषेक के पिता मौजूदा समय पंडरीकृपाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात हैं। पुलिस अब पड़ताल कर रही कि गिरोह के लोगों को कहीं सरकारी तंत्र का संरक्षण तो नहीं था। जांच की आंच गोंडा के अलावा आसपास के चार जिलों तक पहुंच गई है। कोतवाली नगर पुलिस ने रविवार को खून की अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार किया था।
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पकड़े गए लोगों के पास से 253 कूटरचित ब्लड बैंक कार्ड व नौ मोबाइल बरामद हुए थे। जांच में फर्जी दस्तावेज से रक्त उपलब्ध कराने का संगठित खेल सामने आया। ये लोग गिरोह बनाकर काम करते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गिरोह के लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप ग्रुप और मोबाइल के जरिये ऐसे लोगों तक पहुंच बनाते थे, जिनके परिजन अस्पतालों में भर्ती थे और उन्हें तत्काल रक्त की जरूरत थी।
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अस्पतालों के बाहर सक्रिय बदमाश मरीजों के तीमारदारों से संपर्क करते थे। गिरोह के लोग व्हाट्सएप से एक-दूसरे से जुड़े रहते थे। जरूरतमंद के मिलने पर ऑनलाइन भुगतान लेकर उसे रक्त उपलब्ध करा दिया जाता था। बरामद मोबाइल की डिजिटल फॉरेंसिक जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि लोग इस काम में कब से लगे हैं। साथ ही अब तक कितने लोगों को इन्होंने पैसे लेकर खून उपलब्ध कराया है।
होगी सख्त कार्रवाई
गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच से सूचनाएं एकत्र की जा रही हैं। आरोपियों के बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, मोबाइल कॉल डिटेल, सोशल मीडिया चैट और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े संपर्कों की गहन जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विनीत जायसवाल, एसपी
ब्लड बैंक से जुटाई जानकारी
नगर कोतवाली पुलिस की टीम ने मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक पहुंचकर वहां के रिकॉर्ड, ब्लड बैग और वितरण प्रक्रिया की जानकारी जुटाई है। कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई है। हालांकि अभी तक मेडिकल कॉलेज की प्रत्यक्ष संलिप्तता सामने नहीं आई है, लेकिन पुलिस हर उस बिंदु की जांच कर रही है, जहां से नेटवर्क को किसी प्रकार की मदद मिल सकती थी।