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Gonda News: पानी के बीच जद्दोजहद
Tue, 18 Aug 2026 11:23 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 18 Aug 2026 11:23 PM IST
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बाढ़ से घरों में पानी भर गया। क्षेत्र के हालात कुछ इस तरह नजर आए। संवाद
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गोंडा। ऐली परसौली के टेपराहन पुरवा में मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे चारों तरफ बाढ़ का पानी ही नजर आ रहा है। घरों के आंगन डूबे हैं। चूल्हे बुझ चुके हैं और रास्तों पर घुटनों तक पानी है। इसी पानी को पार करके लोग एक-दूसरे के घर तक पहुंच रहे हैं। गांव से निकलने के लिए ग्रामीणों ने लोहे का जाल बिछा रखा है। यही जाल इस समय लोगों के लिए रास्ता भी है और सहारा भी। गुड़िया के घर पहुंचे तो वह बच्चों के साथ दूसरे के दरवाजे पर बैठी मिलीं। घर के भीतर पानी भरा है। गृहस्थी का सामान डूब चुका है। उन्होंने बताया कि दो दिन से पानी का दबाव बढ़ रहा है। घर में रहना मुश्किल हो गया तो बच्चों को लेकर दूसरे के दरवाजे पर आ गईं। खाना भी वहीं मिल रहा है। चेहरे पर बेबसी और आंखों में बच्चों की चिंता साफ नजर आ रही थी।
चंद्रशेखर का घर भी पानी से घिरा है। उन्होंने बताया कि घर में पानी भर गया है। अब अंदर जाने में डर लगता है। दो दिन पहले घर में सांप दिखाई दिया था। बोले कि अपना घर छोड़कर कहां जाएं, समझ में नहीं आ रहा।
संगीता की चिंता घर के सामान से ज्यादा बच्चों को लेकर है। दो दिन से पानी के बीच जिंदगी गुजार रही हैं। प्रशासन के लोग आए थे और बंधे पर जाने की सलाह दी थी, लेकिन घर छोड़ना आसान नहीं है। रेखा बताती हैं कि नागपंचमी की शाम खाना मिला था। अब सबसे बड़ी चिंता बच्चों की है। नदी किनारे मगरमच्छ और जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना हुआ है। पानी के बीच बच्चों को सुरक्षित रखना चुनौती से कम नहीं है।
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बंधे पर मिले 55 वर्षीय राम सुमिरन कहते हैं कि इतनी उम्र हो गई, लेकिन बाढ़ से निजात नहीं मिल सकी। हर साल यही संकट आता है। बाढ़ अब कोई आपदा नहीं, बल्कि जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। राम सुमिरन ने कहा कि आखिर कब तक लोग बाढ़ से जूझते रहेंगे। बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए जिम्मेदार प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाते हैं। शत्रोहन बताते हैं कि नदी बढ़ने की खबर मिलते ही चिंता शुरू हो जाती है। सबसे पहले घर छोड़ने की फिक्र होती है और फिर बच्चों को सुरक्षित रखने की। बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी परेशानी होती है। (संवाद)
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चंद्रशेखर का घर भी पानी से घिरा है। उन्होंने बताया कि घर में पानी भर गया है। अब अंदर जाने में डर लगता है। दो दिन पहले घर में सांप दिखाई दिया था। बोले कि अपना घर छोड़कर कहां जाएं, समझ में नहीं आ रहा।
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संगीता की चिंता घर के सामान से ज्यादा बच्चों को लेकर है। दो दिन से पानी के बीच जिंदगी गुजार रही हैं। प्रशासन के लोग आए थे और बंधे पर जाने की सलाह दी थी, लेकिन घर छोड़ना आसान नहीं है। रेखा बताती हैं कि नागपंचमी की शाम खाना मिला था। अब सबसे बड़ी चिंता बच्चों की है। नदी किनारे मगरमच्छ और जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना हुआ है। पानी के बीच बच्चों को सुरक्षित रखना चुनौती से कम नहीं है।
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बंधे पर मिले 55 वर्षीय राम सुमिरन कहते हैं कि इतनी उम्र हो गई, लेकिन बाढ़ से निजात नहीं मिल सकी। हर साल यही संकट आता है। बाढ़ अब कोई आपदा नहीं, बल्कि जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। राम सुमिरन ने कहा कि आखिर कब तक लोग बाढ़ से जूझते रहेंगे। बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए जिम्मेदार प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाते हैं। शत्रोहन बताते हैं कि नदी बढ़ने की खबर मिलते ही चिंता शुरू हो जाती है। सबसे पहले घर छोड़ने की फिक्र होती है और फिर बच्चों को सुरक्षित रखने की। बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी परेशानी होती है। (संवाद)

बाढ़ से घरों में पानी भर गया। क्षेत्र के हालात कुछ इस तरह नजर आए। संवाद

बाढ़ से घरों में पानी भर गया। क्षेत्र के हालात कुछ इस तरह नजर आए। संवाद

बाढ़ से घरों में पानी भर गया। क्षेत्र के हालात कुछ इस तरह नजर आए। संवाद

बाढ़ से घरों में पानी भर गया। क्षेत्र के हालात कुछ इस तरह नजर आए। संवाद

बाढ़ से घरों में पानी भर गया। क्षेत्र के हालात कुछ इस तरह नजर आए। संवाद