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Gonda News: सरयू के उफनाने से ऐली परसौली के 23 मजरों में भरा पानी
Thu, 20 Aug 2026 12:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 20 Aug 2026 12:35 AM IST
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सरयू के उफनाने से ऐली परसौली के 23 मजरों में भरा पानी
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विश्नोहरपुर/उमरी बेगमगंज। सरयू के उफनाने से ऐली परसौली के 23 मजरों में पानी भर गया है। घरों में चूल्हे तक डूब गए हैं। गृहस्थी का सामान पानी में समा गया है। खेतों में लहलहाती धान की फसल भी बाढ़ की भेंट चढ़ रही है। परिवार का पेट लंच पैकेट से भर रहा है लेकिन मवेशियों के लिए हरा चारा जुटाना मुश्किल हो रहा है।
गोड़ियाना निवासी मंगली पानी से होकर घर लौटते हुए अपना दर्द नहीं रोक पाए। कहते हैं कि खाने के लिए तो लंच पैकेट मिल जा रहा है लेकिन गृहस्थी का सामान डूब गया है। चूल्हे पानी में हैं। खेती चौपट हो रही है, फसलें डूब गई हैं। क्या करें, कुछ समझ में नहीं आ रहा। सुनीता भी बाढ़ से परेशान हैं।
नवाबगंज क्षेत्र के माझा इलाके के करीब आधा दर्जन गांवों के एक दर्जन से अधिक मजरे बाढ़ के पानी से घिरे हैं। ब्योंदा माझा गांव के प्रशासक केशवराम यादव ने बताया कि ग्रामीणों के आवागमन के लिए सरकारी नाव उपलब्ध कराई गई है। बुधवार को एक स्टीमर भी उपलब्ध कराया गया। इसके बावजूद कई स्थानों पर नावों की कमी के कारण ग्रामीणों को इंतजार करना पड़ रहा है।
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दत्तनगर के बाड़ी, टाड़ी और वैसिया में भी लोग पानी से घिरे हैं। बाड़ी माझा के ग्रामीण मवेशियों के साथ पलायन कर सड़क किनारे ठहरे हुए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक यहां अभी पर्याप्त नाव उपलब्ध नहीं हो सकी है। बाड़ी माझा से अधिकांश लोग पलायन कर चुके हैं। साकीपुर का चहलावा मजरा पहले से पानी से घिरा था, अब यहां संकट और गहरा गया है। शुक्लपुरवा और अट्ठाईसा भी पानी की जद में हैं। तुलसीपुर, गोकुला, जैतपुर, माझाराठ और दुर्गागंज में भी बाढ़ का पानी फैल चुका है।
किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
मंगलवार रात पानी तेजी से फैला, जबकि बुधवार दिन में स्थिति स्थिर रही। लंबे समय से पानी में डूबी धान की फसलें अब बर्बादी की ओर हैं। जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक किसानों को अपनी मेहनत और फसल से उम्मीद थी, वहां अब दूर तक पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। किसानों को फसल के साथ आने वाले दिनों में परिवार का खर्च चलाने की चिंता भी सताने लगी है। पानी अधिक होने के कारण कटान फिलहाल रुका हुआ है लेकिन बाढ़ का पानी ग्रामीणों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर रहा है।
मवेशियों के चारे के लिए गहराया संकट
बाढ़ के बीच सबसे बड़ा संकट अब मवेशियों के हरे चारे का है। खेत डूबने के कारण चारा उपलब्ध नहीं है। मवेशियों को साथ लेकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे परिवारों के सामने उन्हें खिलाने की चिंता खड़ी हो गई है। ग्रामीण गहरे पानी में उतरकर खेतों से किसी तरह हरा चारा काटकर ला रहे हैं। इस दौरान जहरीले जीवों के साथ डूबने का खतरा भी बना रहता है। ढेमवा घाट पर नावों की संख्या बढ़ाने की मांग ग्रामीण कर रहे हैं। फिलहाल तीन नावों से आवागमन हो रहा है, जिससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। उनका कहना है कि बीमार, बुजुर्गों, बच्चों और मवेशियों के साथ पानी पार करना बेहद मुश्किल हो रहा है।
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गोड़ियाना निवासी मंगली पानी से होकर घर लौटते हुए अपना दर्द नहीं रोक पाए। कहते हैं कि खाने के लिए तो लंच पैकेट मिल जा रहा है लेकिन गृहस्थी का सामान डूब गया है। चूल्हे पानी में हैं। खेती चौपट हो रही है, फसलें डूब गई हैं। क्या करें, कुछ समझ में नहीं आ रहा। सुनीता भी बाढ़ से परेशान हैं।
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नवाबगंज क्षेत्र के माझा इलाके के करीब आधा दर्जन गांवों के एक दर्जन से अधिक मजरे बाढ़ के पानी से घिरे हैं। ब्योंदा माझा गांव के प्रशासक केशवराम यादव ने बताया कि ग्रामीणों के आवागमन के लिए सरकारी नाव उपलब्ध कराई गई है। बुधवार को एक स्टीमर भी उपलब्ध कराया गया। इसके बावजूद कई स्थानों पर नावों की कमी के कारण ग्रामीणों को इंतजार करना पड़ रहा है।
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दत्तनगर के बाड़ी, टाड़ी और वैसिया में भी लोग पानी से घिरे हैं। बाड़ी माझा के ग्रामीण मवेशियों के साथ पलायन कर सड़क किनारे ठहरे हुए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक यहां अभी पर्याप्त नाव उपलब्ध नहीं हो सकी है। बाड़ी माझा से अधिकांश लोग पलायन कर चुके हैं। साकीपुर का चहलावा मजरा पहले से पानी से घिरा था, अब यहां संकट और गहरा गया है। शुक्लपुरवा और अट्ठाईसा भी पानी की जद में हैं। तुलसीपुर, गोकुला, जैतपुर, माझाराठ और दुर्गागंज में भी बाढ़ का पानी फैल चुका है।
किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
मंगलवार रात पानी तेजी से फैला, जबकि बुधवार दिन में स्थिति स्थिर रही। लंबे समय से पानी में डूबी धान की फसलें अब बर्बादी की ओर हैं। जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक किसानों को अपनी मेहनत और फसल से उम्मीद थी, वहां अब दूर तक पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। किसानों को फसल के साथ आने वाले दिनों में परिवार का खर्च चलाने की चिंता भी सताने लगी है। पानी अधिक होने के कारण कटान फिलहाल रुका हुआ है लेकिन बाढ़ का पानी ग्रामीणों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर रहा है।
मवेशियों के चारे के लिए गहराया संकट
बाढ़ के बीच सबसे बड़ा संकट अब मवेशियों के हरे चारे का है। खेत डूबने के कारण चारा उपलब्ध नहीं है। मवेशियों को साथ लेकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे परिवारों के सामने उन्हें खिलाने की चिंता खड़ी हो गई है। ग्रामीण गहरे पानी में उतरकर खेतों से किसी तरह हरा चारा काटकर ला रहे हैं। इस दौरान जहरीले जीवों के साथ डूबने का खतरा भी बना रहता है। ढेमवा घाट पर नावों की संख्या बढ़ाने की मांग ग्रामीण कर रहे हैं। फिलहाल तीन नावों से आवागमन हो रहा है, जिससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। उनका कहना है कि बीमार, बुजुर्गों, बच्चों और मवेशियों के साथ पानी पार करना बेहद मुश्किल हो रहा है।

सरयू के उफनाने से ऐली परसौली के 23 मजरों में भरा पानी

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