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Gonda News: फाइनेंस कंपनी के दो मैनेजर व तीन कर्मचारियों पर एफआईआर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 06 Mar 2026 11:33 PM IST
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गोंडा। गिरवी रखे सोने के आभूषण हड़पने के मामले में न्यायालय के आदेश पर नगर कोतवाली पुलिस ने फाइनेंस कंपनी के दो मैनेजर व तीन कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पीड़िता का आरोप है कि कंपनी के कर्मचारियों ने धोखे से लोन खाता बंद करके उनका 258.30 ग्राम सोना हड़प लिया।
शहर के बड़गांव सोनार गली निवासी अर्चना रस्तोगी ने न्यायालय में दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि उन्होंने आईआईएफएल फाइनेंस की बड़गांव शाखा में 22 कैरेट सोने के 258.30 ग्राम आभूषण गिरवी रखकर दो अलग-अलग लोन लिए थे। इस पर उन्हें 6.89 लाख और 5.15 लाख रुपये का लोन स्वीकृत किया गया था। आरोप है कि चार नवंबर 2025 को कंपनी के कर्मचारियों ने उन्हें किसी औपचारिक प्रक्रिया के नाम पर शाखा में बुलाया। वहां उनसे कागजातों पर हस्ताक्षर और बायोमीट्रिक कराए गए। उसी दौरान उनके मोबाइल पर ओटीपी मंगाकर बिना जानकारी के दोनों लोन खाते बंद कर दिए गए। पीड़िता का कहना है कि उन्हें न तो किसी प्रकार की धनराशि दी गई और न ही गिरवी रखे आभूषण वापस किए गए।
अर्चना का आरोप है कि जब उन्होंने अपने सोने के आभूषण वापस मांगे तो कंपनी के कर्मचारियों ने देने से इन्कार कर दिया। उनका कहना है कि यह सोना उनकी शादी में मिला था, जिसकी कीमत काफी अधिक है। सोना वापस न मिलने से उन्हें आर्थिक व मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पीड़िता के अनुसार उन्होंने मामले की शिकायत नगर कोतवाली पुलिस से की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर नगर कोतवाली पुलिस ने आईआईएफएल फाइनेंस की मैनेजर पूनम तिवारी व देवेंद्र और तीन अन्य कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच कर रहे विवेचक सुनील कुमार का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच की जा रही है।
निराधार हैं आरोप
आईआईएफएल फाइनेंस की मैनेजर पूनम तिवारी का कहना है कि जिस वक्त का मामला बताया जा रहा है, उस वक्त वह यहां तैनात ही नहीं थीं। रही बात अन्य आरोपों की तो वह सब निराधार है। पूनम ने शिकायतकर्ता पर ही आरोप लगाए हैं।
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शहर के बड़गांव सोनार गली निवासी अर्चना रस्तोगी ने न्यायालय में दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि उन्होंने आईआईएफएल फाइनेंस की बड़गांव शाखा में 22 कैरेट सोने के 258.30 ग्राम आभूषण गिरवी रखकर दो अलग-अलग लोन लिए थे। इस पर उन्हें 6.89 लाख और 5.15 लाख रुपये का लोन स्वीकृत किया गया था। आरोप है कि चार नवंबर 2025 को कंपनी के कर्मचारियों ने उन्हें किसी औपचारिक प्रक्रिया के नाम पर शाखा में बुलाया। वहां उनसे कागजातों पर हस्ताक्षर और बायोमीट्रिक कराए गए। उसी दौरान उनके मोबाइल पर ओटीपी मंगाकर बिना जानकारी के दोनों लोन खाते बंद कर दिए गए। पीड़िता का कहना है कि उन्हें न तो किसी प्रकार की धनराशि दी गई और न ही गिरवी रखे आभूषण वापस किए गए।
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अर्चना का आरोप है कि जब उन्होंने अपने सोने के आभूषण वापस मांगे तो कंपनी के कर्मचारियों ने देने से इन्कार कर दिया। उनका कहना है कि यह सोना उनकी शादी में मिला था, जिसकी कीमत काफी अधिक है। सोना वापस न मिलने से उन्हें आर्थिक व मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पीड़िता के अनुसार उन्होंने मामले की शिकायत नगर कोतवाली पुलिस से की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर नगर कोतवाली पुलिस ने आईआईएफएल फाइनेंस की मैनेजर पूनम तिवारी व देवेंद्र और तीन अन्य कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच कर रहे विवेचक सुनील कुमार का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच की जा रही है।
निराधार हैं आरोप
आईआईएफएल फाइनेंस की मैनेजर पूनम तिवारी का कहना है कि जिस वक्त का मामला बताया जा रहा है, उस वक्त वह यहां तैनात ही नहीं थीं। रही बात अन्य आरोपों की तो वह सब निराधार है। पूनम ने शिकायतकर्ता पर ही आरोप लगाए हैं।
