{"_id":"6a77684ee6f090dc71059186","slug":"no-fir-despite-court-order-gonda-news-c-100-1-slko1026-163882-2026-08-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gonda News: कोर्ट के आदेश के बाद भी एफआईआर नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gonda News: कोर्ट के आदेश के बाद भी एफआईआर नहीं
Sat, 08 Aug 2026 11:03 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 08 Aug 2026 11:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोंडा। शत्रु संपत्ति के मामले में तरबगंज के तत्कालीन एसडीएम विश्वामित्र सिंह समेत आठ लोगों के खिलाफ न्यायालय के आदेश के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। तरबगंज पुलिस अधिकारियों से मंत्रणा के बाद रिपोर्ट दर्ज करने की बात कह रही है। चार अगस्त को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से आदेश जारी होने के बाद पुलिस के पास आदेश की प्रति भी पहुंच गई है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि न्यायालय के आदेश के बाद भी एफआईआर दर्ज करने में आखिर किसकी अनुमति का इंतजार है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने तरबगंज तहसील के गौहानी गांव निवासी अजय कुमार पांडेय और राजू सिंह के प्रार्थनापत्र पर तत्कालीन एसडीएम तरबगंज विश्वामित्र सिंह समेत आठ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है। प्रार्थनापत्र में आरोप लगाया गया है कि गौहानी गांव में 0.138 हेक्टेयर भूमि पर मुहम्मद युसुफ और उनके भाइयों का नाम दर्ज था। सभी वर्ष 1945 में पाकिस्तान चले गए थे। इसके बाद उनकी संपत्ति शत्रु संपत्ति घोषित कर दी गई थी।
आरोप है कि चकबंदी कर्मियों की लापरवाही से जमीन अभिलेखों में युसुफ के नाम दर्ज रही। बाद में राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से जमीन स्वामीनाथ, ओमप्रकाश और नरसिंह के नाम दर्ज कर दी गई। राजू सिंह ने आठ जुलाई 2024 को तत्कालीन एसडीएम को प्रार्थनापत्र देकर मामले में कार्रवाई की मांग की थी।
विज्ञापन
आरोप है कि लेखपाल की आख्या को राजस्व निरीक्षक और तहसीलदार ने अग्रसारित किया, लेकिन तत्कालीन एसडीएम विश्वामित्र सिंह ने प्रकरण खारिज कर दिया।प्रार्थनापत्र में राम दयाल, राजेश कुमार और गीता देवी समेत अन्य पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। मामले में न्यायालय ने चार अगस्त को तरबगंज थानाध्यक्ष को संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया था।
आदेश मिल गया, अब अफसरों से होगी मंत्रणा
तरबगंज के प्रभारी निरीक्षक श्रीधर पाठक ने बताया कि न्यायालय के आदेश की प्रति मिल गई है। अधिकारियों से मंत्रणा की जाएगी। इसके बाद उनके निर्देश के अनुसार एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं शत्रु संपत्ति के मामले
जिले में शत्रु संपत्ति से जुड़े मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। नगर कोतवाली क्षेत्र के रकाबगंज में शत्रु संपत्ति पर कब्जा कर मकान बनाने के आरोप में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष एवं सपा नेता उज्मा राशिद के खिलाफ जांच के बाद प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। तत्कालीन तहसीलदार अखिलेश कुमार ने बेदखली की कार्रवाई करते हुए शत्रु संपत्ति पर बने मकान को सील कर दिया था।
विभाजन के बाद चिह्नित हुईं शत्रु संपत्तियां
विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए लोगों की भारत में छूटी संपत्तियों को शत्रु संपत्ति के रूप में चिह्नित किया गया था। वर्ष 1968 में इससे संबंधित कानून लागू होने के बाद ऐसी संपत्तियां केंद्र सरकार के संरक्षण में आ गईं। वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने शत्रु संपत्ति कानून में संशोधन किया। इसके बाद ऐसी संपत्तियों के हस्तांतरण और कब्जे को लेकर नियम और सख्त किए गए।
विज्ञापन
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने तरबगंज तहसील के गौहानी गांव निवासी अजय कुमार पांडेय और राजू सिंह के प्रार्थनापत्र पर तत्कालीन एसडीएम तरबगंज विश्वामित्र सिंह समेत आठ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है। प्रार्थनापत्र में आरोप लगाया गया है कि गौहानी गांव में 0.138 हेक्टेयर भूमि पर मुहम्मद युसुफ और उनके भाइयों का नाम दर्ज था। सभी वर्ष 1945 में पाकिस्तान चले गए थे। इसके बाद उनकी संपत्ति शत्रु संपत्ति घोषित कर दी गई थी।
विज्ञापन
आरोप है कि चकबंदी कर्मियों की लापरवाही से जमीन अभिलेखों में युसुफ के नाम दर्ज रही। बाद में राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से जमीन स्वामीनाथ, ओमप्रकाश और नरसिंह के नाम दर्ज कर दी गई। राजू सिंह ने आठ जुलाई 2024 को तत्कालीन एसडीएम को प्रार्थनापत्र देकर मामले में कार्रवाई की मांग की थी।
विज्ञापन
आरोप है कि लेखपाल की आख्या को राजस्व निरीक्षक और तहसीलदार ने अग्रसारित किया, लेकिन तत्कालीन एसडीएम विश्वामित्र सिंह ने प्रकरण खारिज कर दिया।प्रार्थनापत्र में राम दयाल, राजेश कुमार और गीता देवी समेत अन्य पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। मामले में न्यायालय ने चार अगस्त को तरबगंज थानाध्यक्ष को संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया था।
आदेश मिल गया, अब अफसरों से होगी मंत्रणा
तरबगंज के प्रभारी निरीक्षक श्रीधर पाठक ने बताया कि न्यायालय के आदेश की प्रति मिल गई है। अधिकारियों से मंत्रणा की जाएगी। इसके बाद उनके निर्देश के अनुसार एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं शत्रु संपत्ति के मामले
जिले में शत्रु संपत्ति से जुड़े मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। नगर कोतवाली क्षेत्र के रकाबगंज में शत्रु संपत्ति पर कब्जा कर मकान बनाने के आरोप में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष एवं सपा नेता उज्मा राशिद के खिलाफ जांच के बाद प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। तत्कालीन तहसीलदार अखिलेश कुमार ने बेदखली की कार्रवाई करते हुए शत्रु संपत्ति पर बने मकान को सील कर दिया था।
विभाजन के बाद चिह्नित हुईं शत्रु संपत्तियां
विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए लोगों की भारत में छूटी संपत्तियों को शत्रु संपत्ति के रूप में चिह्नित किया गया था। वर्ष 1968 में इससे संबंधित कानून लागू होने के बाद ऐसी संपत्तियां केंद्र सरकार के संरक्षण में आ गईं। वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने शत्रु संपत्ति कानून में संशोधन किया। इसके बाद ऐसी संपत्तियों के हस्तांतरण और कब्जे को लेकर नियम और सख्त किए गए।