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UP: अदालत से राहत के बाद 'सियासत' का केंद्र बनेंगे बृजभूषण, तीन साल के राजनीतिक वनवास के बाद बदले समीकरण

Mon, 03 Aug 2026 01:14 PM IST
Akash Dwivedi नंदलाल तिवारी, अमर उजाला नेटवर्क, गोंडा
नंदलाल तिवारी, अमर उजाला नेटवर्क, गोंडा Published by: Akash Dwivedi Updated Mon, 03 Aug 2026 01:14 PM IST
सार

दिल्ली की अदालत से बरी होने के बाद पूर्व सांसद की राजनीतिक वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। समर्थक इसे नई शुरुआत मान रहे हैं, जबकि भविष्य की भूमिका पार्टी नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर मानी जा रही है। 

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UP Brij Bhushan center 'politics' court relief; equations shift following
महिला उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह बरी - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से महिला पहलवानों से जुड़े कथित यौन शोषण मामले में बरी होने के बाद कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। अदालत के फैसले ने केवल उन्हें कानूनी राहत नहीं दी है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी संभावित भूमिका को लेकर नई बहस भी शुरू कर दी है। देवीपाटन मंडल से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा बृजभूषण शरण सिंह को फिर सक्रिय राजनीतिक भूमिका देगी या उनकी राजनीतिक विरासत फिलहाल उनके परिवार के माध्यम से ही आगे बढ़ेगी।

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करीब साढ़े तीन वर्ष पहले महिला पहलवानों के आरोप सामने आने के बाद बृजभूषण शरण सिंह भाजपा के लिए असहज स्थिति का कारण बने थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने कैसरगंज से उनका टिकट काटकर बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया।
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यह फैसला स्पष्ट संकेत था कि पार्टी कानूनी विवाद के बीच कोई राजनीतिक जोखिम नहीं लेना चाहती। हालांकि दूसरी ओर भाजपा ने परिवार का राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी बरकरार रखा। करण भूषण सिंह की जीत ने यह भी साबित किया कि क्षेत्र में बृजभूषण का प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ कमजोर नहीं हुई थी।
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राजनीतिक जानकारों का कहना है कि टिकट कटने के बाद भी बृजभूषण शरण सिंह ने खुद को राजनीति से अलग नहीं किया। वह लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे। देवीपाटन मंडल के चारों जिलों में उनके कार्यक्रम होते रहे, समर्थकों से संवाद जारी रहा और सामाजिक-धार्मिक आयोजनों में उनकी मौजूदगी बनी रही। यही वजह है कि अदालत के फैसले के बाद विश्नोहरपुर स्थित आवास व कार्यालय पर जिस तरह समर्थक जुटे, उसे केवल कानूनी राहत का जश्न नहीं बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।

 

'मैं एक बार फिर संसद जरूर जाऊंगा'

बृजभूषण शरण सिंह स्वयं भी कई बार सार्वजनिक मंचों से यह कह चुके हैं कि "मैं एक बार फिर संसद जरूर जाऊंगा।" उस समय इसे समर्थकों का मनोबल बनाए रखने वाला बयान माना गया था, लेकिन अब अदालत के फैसले के बाद उसी बयान के राजनीतिक मायने बदल गए हैं। समर्थकों का मानना है कि कानूनी बाधा समाप्त होने के बाद उनके सामने राजनीतिक संभावनाएं फिर खुल सकती हैं।

हालांकि भाजपा के सामने स्थिति पहले जैसी सरल भी नहीं है। पार्टी किसी भी बड़े फैसले में केवल कानूनी पहलू नहीं देखती, बल्कि राष्ट्रीय छवि, सामाजिक संदेश, संगठनात्मक जरूरत और चुनावी समीकरणों को भी समान महत्व देती है। इसलिए अदालत से बरी होने के बावजूद बृजभूषण शरण सिंह की वापसी का फैसला पूरी तरह भाजपा नेतृत्व की राजनीतिक रणनीति पर निर्भर करेगा।

फिलहाल राजनीतिक गलियारों में दो संभावनाओं पर सबसे अधिक चर्चा है। पहली, वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह को पूर्वांचल और देवीपाटन मंडल में संगठनात्मक जिम्मेदारी देकर चुनावी अभियान में बड़ी भूमिका दी जा सकती है। दूसरी, यदि राजनीतिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में उनकी सक्रिय चुनावी वापसी की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा रहा। हालांकि इन दोनों संभावनाओं पर अभी भाजपा की ओर से कोई संकेत नहीं मिला है।

 

UP Brij Bhushan center 'politics' court relief; equations shift following
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह। - फोटो : amar ujala

सबसे बड़ी ताकत उनका क्षेत्रीय नेटवर्क 

राजनीतिक दृष्टि से बृजभूषण शरण सिंह की सबसे बड़ी ताकत उनका क्षेत्रीय नेटवर्क माना जाता है। गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती में वर्षों से उन्होंने अपना मजबूत संगठनात्मक और व्यक्तिगत आधार तैयार किया है। उनके समर्थकों की सक्रियता और परिवार की राजनीतिक मौजूदगी आज भी इस प्रभाव को बनाए हुए है। गोंडा से विधायक प्रतीक भूषण सिंह और कैसरगंज से सांसद करण भूषण सिंह के कारण परिवार का राजनीतिक आधार कायम है।

अदालत के फैसले ने एक लंबा कानूनी अध्याय जरूर समाप्त कर दिया है, लेकिन राजनीतिक अध्याय अभी खुलना बाकी है। अब सबकी निगाहें भाजपा नेतृत्व पर हैं। आने वाले महीनों में यदि पार्टी बृजभूषण शरण सिंह को फिर किसी बड़ी भूमिका में सामने लाती है तो यह उनकी राजनीतिक वापसी का संकेत होगा। यदि ऐसा नहीं होता तो उनकी भूमिका क्षेत्रीय नेतृत्व और परिवार तक सीमित भी रह सकती है।

क्या आगे हो सकता है?

2027 विधानसभा चुनाव में संगठनात्मक भूमिका की संभावना
2029 लोकसभा चुनाव में संभावित वापसी पर चर्चाएं
अंतिम निर्णय भाजपा नेतृत्व की राजनीतिक रणनीति पर निर्भर 

 

प्रकरण एक नजर में

जनवरी 2023 में महिला पहलवानों के आरोपों के बाद शुरू हुए बहुचर्चित मामले में आज दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट फैसला सुनाएगी। 1133 दिनों तक चले ट्रायल के दौरान 127 सुनवाई हुईं और 44 में से 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। बृजभूषण शरण सिंह 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर हैं, जबकि 10 मई 2024 को अदालत ने पांच शिकायतों पर आरोप तय कर ट्रायल शुरू किया था। दो जुलाई 2026 को अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।

बृजभूषण शरण सिंह

  • जन्म : 8 जनवरी 1957, गोंडा
  • शिक्षा : साकेत पीजी कॉलेज, अयोध्या से एलएलबी
  • छह बार लोकसभा सांसद
  • 2012 से 2023 तक भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष
  • 1991, 1999 : गोंडा से सांसद
  • 2004 : बलरामपुर से सांसद
  • 2009 : समाजवादी पार्टी से कैसरगंज सांसद
  • 2014 व 2019 : भाजपा से कैसरगंज सांसद
  • 2024 : भाजपा ने टिकट की जगह बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया, जो सांसद निर्वाचित हुए
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