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Hamirpur News: बाईपास निर्माण अधर में, 16 साल में 8 बार टूटा यमुना पुल
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Wed, 28 Jan 2026 12:13 AM IST
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फोटो 27 एचएएमपी 04- रोहाइन नाला बाईपास पर शुरू पहुंच मार्ग का कार्य। संवाद
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हमीरपुर। कानपुर-सागर टूलेन हाईवे (एनएच-34) पर बीते एक साल में 50 लोगों ने सड़क हादसों में जान गवाई हैं। बीते पांच सालों के आंकड़े देखें तो चौंकाने वाले हैं, 225 लोग असमय ही जांच गवां बैठे। वहीं, यमुना पुल 16 साल में करीब आठ बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। महीनों इस पुल से आवागमन भी ठप रहा है। पुल की अवधि अगस्त 2024 में पूरी हो चुकी है। इसके बाद भी पुल से लगातार 40 टन से अधिक क्षमता के वाहन निकाले जा रहे हैं। पुल क्षतिग्रस्त होने से जिले वासियों का सीमावर्ती जनपदों से संपर्क टूट जाता है।
इस हाईवे के विकल्प के रूप में बीते आठ सालों से शहर के बाहर हमीरपुर कालपी हाईवे किनारे स्थिति रोहाइन नाला बाईपास का निर्माण व समानांतर यमुना व बेतवा दोनों नदियों में सेतु निगम फोरलेन पुलों का निर्माण करा है। साथ ही इन पुलों के तैयार होने पर इसी से कानपुर कबरई ग्रीन फील्ड हाईवे को निकाले जाने की योजना है। इसे कानपुर नगर के सजेती थानाक्षेत्र के रामपुर गांव से जोड़ा गया है। कानपुर नगर का कार्य पहुंच मार्ग का कार्य पूरा कर लिया गया है। ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर कार्यदायी संस्था एनएचएआई ने भूमि अधिग्रहण का कार्य भी शुरू कर दिया है। इधर कार्यदायी संस्था संसाधनों के अभाव में धीमी गति से पुलों का निर्माण करा रही है। एक लांचर मशीन से बीते डेढ़ साल में बेतवा पुल की एक लेन की छत ढलाई का कार्य पूरा पाई है, जबकि यमुना पुल पर मात्र पिलर खड़े हो पाए हैं।
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50 साल पूर्व बना था यमुना नदी का पुल
यमुना नदी के पुल का उद्घाटन 30 जून 1976 को तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत नारायणदत्त तिवारी ने किया था। इसे इंदिरा सेतु भी कहा जाता है। यमुना पुल के साथ ही बेतवा नदी में भी एक पुल का निर्माण हुआ था। शुरू में इस पुल से 20 से 35 टन की क्षमता के ही वाहनों की आवाजाही होती थी। पुल के दोनों किनारे सोडियम की लाइटें भी लगाई गई थी। सोडियम लाइटों से पूरे पुल में उजाला रहता था। हालांकि तत्कालीन डीएम पीके झा के कार्यकाल में दोनों पुलों से लाइटें और बिजली के पोल नगर पालिका ने हटवा दिए थे।
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आठ से अधिक बार क्षतिग्रस्त हो चुका यमुना पुल
50 साल की अवधि में पुल 12 से अधिक बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। पिछली बार 19 जून 2016 को यमुना पुल की दूसरी कोठी के ऊपरी हिस्से की स्लैब में दरार आई थी। फिलहाल यमुना पुल आठ बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। इसके पहले यमुना पुल सबसे पहली बार 11 जून 2009 में टूटा था। दूसरी बार 10 जून 2011, तीसरी बार 21 जून 2013, चौथी बार 29 अक्टूबर 2014, पांचवीं बार 19 जून 2015 में दो बार पुल टूटा था। ज्यादातर यह पुल जून माह में ही क्षतिग्रस्त हुआ है। लेकिन, अब जो रिपोर्ट आई है वो चौंकाने वाली है। सीआरआरआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह पुल चलने योग्य नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2024 में ही इसे बंद कर देना चाहिए, लेकिन ऐसा होने से जनपद का आर्थिक ढांचा चरमरा जाएगा। इधर रोहाइन नाला बाईपास का काम पूरा न हो पाने के कारण लोगों को समस्या उठानी पड़ेंगी। जिले के आर्थिक ढांचा भी प्रभावित होगा।
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निकाले जा रहे 90 से 120 टन भारी वाहन
कई हादसों के बाद भी ओवरलोडिंग पर रोक नहीं लग रही है। गाड़ियां बंद होने के बाद फिर छूट जाती हैं। अक्तूबर 2014 की रिपोर्ट में पीएनसी ने पुल के सभी पिलरों की जांच कर रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। कहा था कि पुल पर अधिक भार नहीं डाला जाए। ओवरलोड के कारण पुल हर बार क्षतिग्रस्त होता है। इसमें कुछ दिन तो अमल हुआ इसके बाद फिर से ओवरलोड वाहन पुल से बेधड़क गुजर रहे हैं।
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हाईवे पर क्यों लगता जाम
- टू-लेन सागर हाईवे पर सहालग के चलते वाहनों का अधिक दबाव है।
- हाईवे पर आवागमन अवरुद्ध होने पर डिवाइडर न होने से वाहनों का आड़ा-तिरछा लगना।
- मुख्यालय स्थिति यमुना व बेतवा नदी पर बने सकरे पुल।
- निकटवर्ती जनपद में बने टोल पर वाहनों का दबाव बढ़ने के कारण इसका असर मुख्यालय तक पहुंचता है।
- हाईवे पर ओवरलोड भारी वाहनों का खराब होना प्रमुख कारण है।
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आखिर जिम्मेदार कौन
हाईवे पर जाम लगने के विभिन्न कारणों में कहीं न कहीं प्रशासन की लापरवाही सामने आती है। हाईवे के चौड़ीकरण की मांग कई बार समाजसेवियों, व्यापारियों द्वारा की जा चुकी है। लेकिन, इस पर कोई अमल नहीं किया गया है। हालांकि अलग से हाईवे को स्वीकृति दी गई है, जिसे बनने में अभी कई साल लग सकते हैं।
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लांचर मशीन अटका रहा यमुना पुल का निर्माण
रोहाइन नाला बाईपास निर्माण को लेकर यमुना व बेतवा दोनों नदियों में फोरलेन दो पुलों का निर्माण कार्य सेतु निगम करा रहा है। बेतवा पुल पर कोठियों पर छत ढलाई का कार्य शुरू है। एक लेन तैयार भी कर लिया गया है। वहीं, यमुना पुल पर अभी छत ढलाई का कार्य शुरू नहीं हो सका है। कार्यदायी संस्था के पास मात्र एक लांचर मशीन है, जो बेतवा पुल पर लगी है। दूसरी मशीन की मांग की गई है, लेकिन मशीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। वहीं, 400 मीटर पहुंच मार्ग पर मिट्टी भराई का कार्य भी अटका है। जिसपर वन विभाग व किसानों के बीच कमिश्नरी बांदा में मुकदमा विचाराधीन है। इससे पुल निर्माण में समय लग रहा है।
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फोटो 27 एचएएमपी 08- जलीस खान। संवाद
जनहित के लिए जल्द तैयार हो बाईपास
जनहित के लिए रोहाइन नाला बाईपास का निर्माण शीघ्र होना अति आवश्यक है। सरकार आती हैं और जाती हैं, लेकिन ऐसे कार्यों पर विलंब नहीं होना चाहिए।
- जलीस खान, समाजसेवी।
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कई बार की जा चुकी मांग
इस खूनी हाईवे पर रात में गुजरने से डर लगता है। कई बार इस हाईवे के निर्माण को लेकर शासन-प्रशासन से मांग की जा चुकी हैं। रोजाना जानें जा रही हैं। इसके बाद भी शासन-प्रशासन मूक दर्शक बना बैठा है। जल्द ही इस पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
- विजय द्विवेदी।
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पुल निर्माण में समय लगता है। एक लांचर मशीन है और दूसरी मशीन के लिए कॉट्रक्टर से मांग की गई है। लेकिन, मशीन की व्यवस्था नहीं बन पाई है। फिलहाल अभी पहुंच मार्ग भी तैयार नहीं हो पाया है। साल के अंत तक दोनों पुलों को तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
- दिलीप कुमार, परियोजना निदेशक सेतु निगम।
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नेशनल हाईवे पर जो भी ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं, उनमें सुरक्षात्मक व सुधारात्मक कार्य एनएचएआई के अधीन है। सुमेरपुर कस्बा में टी जंकशन का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। मार्च तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। अन्य ब्लैक स्पॉटों की जानकारी की जाएगी।
- अरुण कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि।
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इस हाईवे के विकल्प के रूप में बीते आठ सालों से शहर के बाहर हमीरपुर कालपी हाईवे किनारे स्थिति रोहाइन नाला बाईपास का निर्माण व समानांतर यमुना व बेतवा दोनों नदियों में सेतु निगम फोरलेन पुलों का निर्माण करा है। साथ ही इन पुलों के तैयार होने पर इसी से कानपुर कबरई ग्रीन फील्ड हाईवे को निकाले जाने की योजना है। इसे कानपुर नगर के सजेती थानाक्षेत्र के रामपुर गांव से जोड़ा गया है। कानपुर नगर का कार्य पहुंच मार्ग का कार्य पूरा कर लिया गया है। ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर कार्यदायी संस्था एनएचएआई ने भूमि अधिग्रहण का कार्य भी शुरू कर दिया है। इधर कार्यदायी संस्था संसाधनों के अभाव में धीमी गति से पुलों का निर्माण करा रही है। एक लांचर मशीन से बीते डेढ़ साल में बेतवा पुल की एक लेन की छत ढलाई का कार्य पूरा पाई है, जबकि यमुना पुल पर मात्र पिलर खड़े हो पाए हैं।
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50 साल पूर्व बना था यमुना नदी का पुल
यमुना नदी के पुल का उद्घाटन 30 जून 1976 को तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत नारायणदत्त तिवारी ने किया था। इसे इंदिरा सेतु भी कहा जाता है। यमुना पुल के साथ ही बेतवा नदी में भी एक पुल का निर्माण हुआ था। शुरू में इस पुल से 20 से 35 टन की क्षमता के ही वाहनों की आवाजाही होती थी। पुल के दोनों किनारे सोडियम की लाइटें भी लगाई गई थी। सोडियम लाइटों से पूरे पुल में उजाला रहता था। हालांकि तत्कालीन डीएम पीके झा के कार्यकाल में दोनों पुलों से लाइटें और बिजली के पोल नगर पालिका ने हटवा दिए थे।
आठ से अधिक बार क्षतिग्रस्त हो चुका यमुना पुल
50 साल की अवधि में पुल 12 से अधिक बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। पिछली बार 19 जून 2016 को यमुना पुल की दूसरी कोठी के ऊपरी हिस्से की स्लैब में दरार आई थी। फिलहाल यमुना पुल आठ बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। इसके पहले यमुना पुल सबसे पहली बार 11 जून 2009 में टूटा था। दूसरी बार 10 जून 2011, तीसरी बार 21 जून 2013, चौथी बार 29 अक्टूबर 2014, पांचवीं बार 19 जून 2015 में दो बार पुल टूटा था। ज्यादातर यह पुल जून माह में ही क्षतिग्रस्त हुआ है। लेकिन, अब जो रिपोर्ट आई है वो चौंकाने वाली है। सीआरआरआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह पुल चलने योग्य नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2024 में ही इसे बंद कर देना चाहिए, लेकिन ऐसा होने से जनपद का आर्थिक ढांचा चरमरा जाएगा। इधर रोहाइन नाला बाईपास का काम पूरा न हो पाने के कारण लोगों को समस्या उठानी पड़ेंगी। जिले के आर्थिक ढांचा भी प्रभावित होगा।
निकाले जा रहे 90 से 120 टन भारी वाहन
कई हादसों के बाद भी ओवरलोडिंग पर रोक नहीं लग रही है। गाड़ियां बंद होने के बाद फिर छूट जाती हैं। अक्तूबर 2014 की रिपोर्ट में पीएनसी ने पुल के सभी पिलरों की जांच कर रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। कहा था कि पुल पर अधिक भार नहीं डाला जाए। ओवरलोड के कारण पुल हर बार क्षतिग्रस्त होता है। इसमें कुछ दिन तो अमल हुआ इसके बाद फिर से ओवरलोड वाहन पुल से बेधड़क गुजर रहे हैं।
हाईवे पर क्यों लगता जाम
- टू-लेन सागर हाईवे पर सहालग के चलते वाहनों का अधिक दबाव है।
- हाईवे पर आवागमन अवरुद्ध होने पर डिवाइडर न होने से वाहनों का आड़ा-तिरछा लगना।
- मुख्यालय स्थिति यमुना व बेतवा नदी पर बने सकरे पुल।
- निकटवर्ती जनपद में बने टोल पर वाहनों का दबाव बढ़ने के कारण इसका असर मुख्यालय तक पहुंचता है।
- हाईवे पर ओवरलोड भारी वाहनों का खराब होना प्रमुख कारण है।
आखिर जिम्मेदार कौन
हाईवे पर जाम लगने के विभिन्न कारणों में कहीं न कहीं प्रशासन की लापरवाही सामने आती है। हाईवे के चौड़ीकरण की मांग कई बार समाजसेवियों, व्यापारियों द्वारा की जा चुकी है। लेकिन, इस पर कोई अमल नहीं किया गया है। हालांकि अलग से हाईवे को स्वीकृति दी गई है, जिसे बनने में अभी कई साल लग सकते हैं।
लांचर मशीन अटका रहा यमुना पुल का निर्माण
रोहाइन नाला बाईपास निर्माण को लेकर यमुना व बेतवा दोनों नदियों में फोरलेन दो पुलों का निर्माण कार्य सेतु निगम करा रहा है। बेतवा पुल पर कोठियों पर छत ढलाई का कार्य शुरू है। एक लेन तैयार भी कर लिया गया है। वहीं, यमुना पुल पर अभी छत ढलाई का कार्य शुरू नहीं हो सका है। कार्यदायी संस्था के पास मात्र एक लांचर मशीन है, जो बेतवा पुल पर लगी है। दूसरी मशीन की मांग की गई है, लेकिन मशीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। वहीं, 400 मीटर पहुंच मार्ग पर मिट्टी भराई का कार्य भी अटका है। जिसपर वन विभाग व किसानों के बीच कमिश्नरी बांदा में मुकदमा विचाराधीन है। इससे पुल निर्माण में समय लग रहा है।
फोटो 27 एचएएमपी 08- जलीस खान। संवाद
जनहित के लिए जल्द तैयार हो बाईपास
जनहित के लिए रोहाइन नाला बाईपास का निर्माण शीघ्र होना अति आवश्यक है। सरकार आती हैं और जाती हैं, लेकिन ऐसे कार्यों पर विलंब नहीं होना चाहिए।
- जलीस खान, समाजसेवी।
कई बार की जा चुकी मांग
इस खूनी हाईवे पर रात में गुजरने से डर लगता है। कई बार इस हाईवे के निर्माण को लेकर शासन-प्रशासन से मांग की जा चुकी हैं। रोजाना जानें जा रही हैं। इसके बाद भी शासन-प्रशासन मूक दर्शक बना बैठा है। जल्द ही इस पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
- विजय द्विवेदी।
पुल निर्माण में समय लगता है। एक लांचर मशीन है और दूसरी मशीन के लिए कॉट्रक्टर से मांग की गई है। लेकिन, मशीन की व्यवस्था नहीं बन पाई है। फिलहाल अभी पहुंच मार्ग भी तैयार नहीं हो पाया है। साल के अंत तक दोनों पुलों को तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
- दिलीप कुमार, परियोजना निदेशक सेतु निगम।
नेशनल हाईवे पर जो भी ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं, उनमें सुरक्षात्मक व सुधारात्मक कार्य एनएचएआई के अधीन है। सुमेरपुर कस्बा में टी जंकशन का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। मार्च तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। अन्य ब्लैक स्पॉटों की जानकारी की जाएगी।
- अरुण कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि।

फोटो 27 एचएएमपी 04- रोहाइन नाला बाईपास पर शुरू पहुंच मार्ग का कार्य। संवाद

फोटो 27 एचएएमपी 04- रोहाइन नाला बाईपास पर शुरू पहुंच मार्ग का कार्य। संवाद
