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Hamirpur News: किशोरी के अपहरण व सामूहिक दुष्कर्म में चार को आजीवन कारावास
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हमीरपुर। विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार खरवार ने 10 वर्ष पुराने अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के चर्चित मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सभी दोषियों पर अलग-अलग धाराओं में कुल 62 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह मामला सिसोलर थाना क्षेत्र के एक गांव से जुड़ा है। 28 अप्रैल 2016 को एक किसान की 16 वर्षीय पुत्री खेत में खाना देने निकली थी। वह खेत पर नहीं पहुंची और शाम को उसके लापता होने का पता चला। खोजबीन के दौरान पता चला कि वह मोटर साइकिल पर दो लड़कों के साथ दिखी थी। पुलिस ने पहले प्राथमिकी नहीं लिखी, पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर 9 जून 2016 को दर्ज की। लखना और दीवाना के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई। सवा माह बाद पीड़िता किशोरी हमीरपुर में मिली। पीड़िता के बयान के अनुसार, छोटू और रोहित उसे जबरन बाइक से ले गए थे। उसे सुमेरपुर में सत्येंद्र के यहां ले जाकर दोनों ने दुष्कर्म किया। इसके बाद उसे सूरत ले जाया गया, जहां करीब एक माह तक बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पीड़िता और अन्य गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने रोहित सिंह, छोटू उर्फ सूरजमान, लखना और दीवाना को दोषी करार दिया। रोहित, छोटू उर्फ सूरजमान और लखना को धारा 363, 366 और 376डी के तहत दोषी पाया गया। उन्हें क्रमशः सात वर्ष, दस वर्ष और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। आरोपी दीवाना को पॉक्सो एक्ट की धारा-4 के तहत आजीवन कारावास की सजा दी गई।
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मदद मांगने पर भी दुष्कर्म
पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि सूरत में बंधक रहते हुए उसे सामूहिक दुष्कर्म का शिकार होना पड़ा। आरोपी काम पर जाते समय उसे कमरे में बंद कर देते थे। एक दिन उसे अपने गांव का एक युवक मिला, जिससे उसने मदद मांगी। युवक ने उसे अपने कमरे पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। बाद में वही युवक पीड़िता को हमीरपुर लेकर आया था।
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यह मामला सिसोलर थाना क्षेत्र के एक गांव से जुड़ा है। 28 अप्रैल 2016 को एक किसान की 16 वर्षीय पुत्री खेत में खाना देने निकली थी। वह खेत पर नहीं पहुंची और शाम को उसके लापता होने का पता चला। खोजबीन के दौरान पता चला कि वह मोटर साइकिल पर दो लड़कों के साथ दिखी थी। पुलिस ने पहले प्राथमिकी नहीं लिखी, पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर 9 जून 2016 को दर्ज की। लखना और दीवाना के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई। सवा माह बाद पीड़िता किशोरी हमीरपुर में मिली। पीड़िता के बयान के अनुसार, छोटू और रोहित उसे जबरन बाइक से ले गए थे। उसे सुमेरपुर में सत्येंद्र के यहां ले जाकर दोनों ने दुष्कर्म किया। इसके बाद उसे सूरत ले जाया गया, जहां करीब एक माह तक बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पीड़िता और अन्य गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने रोहित सिंह, छोटू उर्फ सूरजमान, लखना और दीवाना को दोषी करार दिया। रोहित, छोटू उर्फ सूरजमान और लखना को धारा 363, 366 और 376डी के तहत दोषी पाया गया। उन्हें क्रमशः सात वर्ष, दस वर्ष और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। आरोपी दीवाना को पॉक्सो एक्ट की धारा-4 के तहत आजीवन कारावास की सजा दी गई।
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मदद मांगने पर भी दुष्कर्म
पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि सूरत में बंधक रहते हुए उसे सामूहिक दुष्कर्म का शिकार होना पड़ा। आरोपी काम पर जाते समय उसे कमरे में बंद कर देते थे। एक दिन उसे अपने गांव का एक युवक मिला, जिससे उसने मदद मांगी। युवक ने उसे अपने कमरे पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। बाद में वही युवक पीड़िता को हमीरपुर लेकर आया था।