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Hamirpur News: नियमों को ठेंगा दिखा खलिहान की जमीन पर बना दिया एमआरएफ सेंटर
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फोटो 18 एचएएमपी 33- गोहांड में जांच करते अधिकारी। संवाद
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गोहांड (हमीरपुर)। नगर पंचायत गोहांड में सरकारी जमीन पर हुए निर्माण का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने नगर निकायों में विकास कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि नगर पंचायत ने राजस्व विभाग की अनुमति लिए बिना खलिहान की आरक्षित भूमि पर एमआरएफ सेंटर का निर्माण करा दिया। इतना ही नहीं, डंपिंग यार्ड के नाम पर करीब 20 लाख रुपये का भुगतान भी करा लिया। अब मामला उजागर हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी जांच के लिए दौड़ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2021 में नगर पंचायत ने एमआरएफ सेंटर के लिए 0.55 हेक्टेयर खलिहान की आरक्षित भूमि का चयन किया। नियमों के मुताबिक ऐसी भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण से पहले राजस्व विभाग से अनुमति और भूमि उपयोग संबंधी प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होता है। आरोप है कि इन औपचारिकताओं को दरकिनार कर सीधे निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया।
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वर्ष 2022-23 में उसी परिसर में डंपिंग यार्ड के नाम पर चारदीवारी का निर्माण दर्शाकर लगभग 20 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। सवाल यह है कि यदि निर्माण एमआरएफ सेंटर का था तो भुगतान डंपिंग यार्ड के नाम पर क्यों किया गया? और यदि डंपिंग यार्ड था तो आरक्षित खलिहान की भूमि पर इसकी अनुमति किसने दी।
पूरा मामला उस समय उलझ गया, जब नगर पंचायत में अधिशासी अधिकारी बदल गए। बताया जा रहा है कि नए अधिशासी अधिकारी ने फाइलों की जांच के दौरान अनियमितताओं की आशंका जताते हुए शेष 15 लाख रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी। निर्माण का हैंडओवर भी नहीं हो सका। अब मामला सामने आने के बाद नगर पंचायत में हड़कंप मचा है। शनिवार को दो-दो एडीएम जांच के लिए मौके पर पहुंचे।
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आरोप है कि नगर पंचायत ने राजस्व विभाग की अनुमति लिए बिना खलिहान की आरक्षित भूमि पर एमआरएफ सेंटर का निर्माण करा दिया। इतना ही नहीं, डंपिंग यार्ड के नाम पर करीब 20 लाख रुपये का भुगतान भी करा लिया। अब मामला उजागर हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी जांच के लिए दौड़ रहे हैं।
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सूत्रों के अनुसार वर्ष 2021 में नगर पंचायत ने एमआरएफ सेंटर के लिए 0.55 हेक्टेयर खलिहान की आरक्षित भूमि का चयन किया। नियमों के मुताबिक ऐसी भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण से पहले राजस्व विभाग से अनुमति और भूमि उपयोग संबंधी प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होता है। आरोप है कि इन औपचारिकताओं को दरकिनार कर सीधे निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया।
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वर्ष 2022-23 में उसी परिसर में डंपिंग यार्ड के नाम पर चारदीवारी का निर्माण दर्शाकर लगभग 20 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। सवाल यह है कि यदि निर्माण एमआरएफ सेंटर का था तो भुगतान डंपिंग यार्ड के नाम पर क्यों किया गया? और यदि डंपिंग यार्ड था तो आरक्षित खलिहान की भूमि पर इसकी अनुमति किसने दी।
पूरा मामला उस समय उलझ गया, जब नगर पंचायत में अधिशासी अधिकारी बदल गए। बताया जा रहा है कि नए अधिशासी अधिकारी ने फाइलों की जांच के दौरान अनियमितताओं की आशंका जताते हुए शेष 15 लाख रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी। निर्माण का हैंडओवर भी नहीं हो सका। अब मामला सामने आने के बाद नगर पंचायत में हड़कंप मचा है। शनिवार को दो-दो एडीएम जांच के लिए मौके पर पहुंचे।