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Hamirpur News: नक्शा दुरुस्ती की फाइल में चार साल से हो रही आदेश व निरस्तीकरण की कार्रवाई
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हमीरपुर। जनपद में खेत खरीदना आसान है लेकिन नक्शा दुरुस्ती कराना बहुत कठिन काम है। कुंडौरा मौजे में खेत नक्शा दुरुस्तीकरण की एक फाइल चार साल से आदेश व निरस्तीकरण की कार्रवाई में उलझी हुई है। अपीलकर्ता कभी इस चौखट पर तो कभी उस चौखट पर पहुंचा लेकिन हर बार निराशा ही हाथ आई। वर्ष 2022 में अपर जिलाधिकारी न्यायिक के यहां वाद दायर किया गया था। पहली बार 2023 में निरस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
भरुआ सुमेरपुर निवासी मनीष गुप्ता व उपरौस निवासी सुरेश गुप्ता ने कुंडौरा मौजे में लल्लू यादव के खेत गाटा संख्या 648 में जमीन खरीदी थी। इसके बाद नक्शा दुरुस्ती के लिए वर्ष 2022 में अपर जिलाधिकारी न्यायिक के यहां वाद दायर किया। एक साल से अधिक समय तक उक्त मामले में सुनवाई हुई। कई तारीखें दी गईं। मनीष का कहना है कि उन्हें पेशकार से लेकर ड्राफ्टमैन तक ने दबाव बनाया और काम कराने के पैसे मांगे गए। जब बात नहीं मानी तो पत्रावलियों में छेड़खानी की गई। अपर जिलाधिकारी न्यायिक के यहां से 28 दिसंबर 2023 को फाइल निरस्त कर दी गई।
आयुक्त बांदा के यहां एक जनवरी 2024 को वाद दायर किया गया। आयुक्त ने उक्त मामले की सुनवाई के बाद आदेश जारी किया। वापस फाइल अपर जिलाधिकारी न्यायिक के यहां भेजी गई। शिकायतकर्ता मनीष का कहना है कि यहां पर फाइल को दबा लिया गया। विपक्षीगणों ने आयुक्त के आदेश को चुनौती देते हुए राजस्व परिषद में वाद दायर कर दिया। यहां पर सुनवाई के बाद सात जुलाई 2025 को मनीष के पक्ष में आदेश जारी कर दिया गया। एक बार फिर फाइल न्यायिक के यहां आई। यहां पर फिर कर्मचारियों की ओर से पैसों की मांग की गई लेकिन बात नहीं बनी तो षड्यंत्र के तहत एक फाइल मुन्नी के नाम से दायर की गई। एक ही रकवा की दो फाइलें चलने लगीं। दोनों फाइलें 30 दिसंबर 2025 को एक साथ मिलाकर खारिज कर दी गईं।
इसके बाद आयुक्त बांदा के यहां फिर मामला पहुंचा। आयुक्त ने सुनवाई के बाद विवादित भूमि के संदर्भ में चकबंदी आख्या तलब करते हुए दोनों पक्षों को आपत्ति, साक्ष्य, सुनवाई का पूर्ण अवसर देते हुए गुणदोष के आधार पर 45 दिन के अंदर आदेश पारित करने का 10 फरवरी 2026 को आदेश जारी किया। इस आदेश के बाद फाइल अपर जिलाधिकारी न्यायिक के यहां पहुंची। मनीष गुप्ता का कहना है कि इस दौरान उन्हें धमकी भी मिली, लेकिन उन्होंने फाइल जिलाधिकारी के यहां स्थानांतरित कराई। आयुक्त ने 9 अप्रैल 2026 को 15 दिवस में मामले के निस्तारण का आदेश दिया। अधिकारी के बदल जाने की वजह से अभी उक्त प्रकरण में कोई फैसला नहीं सुनाया गया।
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आयुक्त बांदा के यहां एक जनवरी 2024 को वाद दायर किया गया। आयुक्त ने उक्त मामले की सुनवाई के बाद आदेश जारी किया। वापस फाइल अपर जिलाधिकारी न्यायिक के यहां भेजी गई। शिकायतकर्ता मनीष का कहना है कि यहां पर फाइल को दबा लिया गया। विपक्षीगणों ने आयुक्त के आदेश को चुनौती देते हुए राजस्व परिषद में वाद दायर कर दिया। यहां पर सुनवाई के बाद सात जुलाई 2025 को मनीष के पक्ष में आदेश जारी कर दिया गया। एक बार फिर फाइल न्यायिक के यहां आई। यहां पर फिर कर्मचारियों की ओर से पैसों की मांग की गई लेकिन बात नहीं बनी तो षड्यंत्र के तहत एक फाइल मुन्नी के नाम से दायर की गई। एक ही रकवा की दो फाइलें चलने लगीं। दोनों फाइलें 30 दिसंबर 2025 को एक साथ मिलाकर खारिज कर दी गईं।
इसके बाद आयुक्त बांदा के यहां फिर मामला पहुंचा। आयुक्त ने सुनवाई के बाद विवादित भूमि के संदर्भ में चकबंदी आख्या तलब करते हुए दोनों पक्षों को आपत्ति, साक्ष्य, सुनवाई का पूर्ण अवसर देते हुए गुणदोष के आधार पर 45 दिन के अंदर आदेश पारित करने का 10 फरवरी 2026 को आदेश जारी किया। इस आदेश के बाद फाइल अपर जिलाधिकारी न्यायिक के यहां पहुंची। मनीष गुप्ता का कहना है कि इस दौरान उन्हें धमकी भी मिली, लेकिन उन्होंने फाइल जिलाधिकारी के यहां स्थानांतरित कराई। आयुक्त ने 9 अप्रैल 2026 को 15 दिवस में मामले के निस्तारण का आदेश दिया। अधिकारी के बदल जाने की वजह से अभी उक्त प्रकरण में कोई फैसला नहीं सुनाया गया।
