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Hamirpur News: बेतवा पुल के एक्सपेंशन जॉइंट की ऊपरी परत क्षतिग्रस्त
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फोटो25एचएएमपी 26- बेतवा पुल एक्सपेंशन जॉइंट पर हुआ गड्ढा। संवाद
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हमीरपुर। शहर को जिले से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-34 स्थित बेतवा पुल के एक्सपेंशन जॉइंट के पास ऊपरी कंक्रीट की परत क्षतिग्रस्त होने से पुल की सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है। एक्सपेंशन जॉइंट के पास कंक्रीट उखड़ी हुई है और गड्ढे और सरिया दिखाई दे रहे हैं। हालांकि पुल का रखरखाव देख रही एजेंसी ने इसे सतही क्षति बताते हुए पुल को पूरी तरह सुरक्षित बताया है।
बेतवा पुल वर्ष 1978 में बना था और करीब 48 वर्ष पुराना हो चुका है। पुल से प्रतिदिन करीब बीस हजार छोटे-बड़े वाहन और भारी मालवाहक ट्रक गुजरते हैं। वर्तमान में बेतवा और यमुना नदियों पर समानांतर नए पुलों का निर्माण जारी है। ऐसे में पुराने पुल पर ही यातायात का पूरा दबाव बना हुआ है। शनिवार को पुल पर 10 नंबर पिलर में एक्सपेंशन जॉइंट पर एक गड्ढा देखा गया। गहरे गड्ढे में सरिया से लेकर कंक्रीट अलग थी। गड्ढे का आकार बढ़ता जा रहा है। सरिया और गहरा गड्ढा देखकर राहगीरों में भय व्याप्त है।
पहले पुल के रखरखाव का जिम्मा पीएनसी के पास था। कंपनी का अनुबंध समाप्त होने के बाद अब पुल का रखरखाव भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधीन है। हालांकि रखरखाव का कार्य जे बिल्डर्स के माध्यम से कराया जा रहा है। जे बिल्डर्स के मेंटेनेंस मैनेजर सौरभ यादव ने बताया कि एक्सपेंशन जॉइंट के ऊपर करीब तीन से चार इंच मोटी कंक्रीट की परत में दरार आई है। उन्होंने कहा कि नीचे इस्पात प्लेट लगी हुई है। आवश्यक मरम्मत कर इसे ठीक कर दिया जाएगा। उनके अनुसार इससे पुल की संरचनात्मक मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ा है और भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि करीब चार माह पहले पुल की तकनीकी जांच हुई थी और अगले महीने फिर अभियंताओं की टीम निरीक्षण करेगी।
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वहीं, एनएचएआई के अभियंता नीरज ने बताया कि बेतवा पुल एनएचएआई के अधीन है और उसका नियमित रखरखाव कराया जा रहा है। उन्होंने कहा बेतवा पुल का निरीक्षण किया गया जाएगा। यदि एक्सपेंशन जॉइंट में किसी प्रकार की क्षति पाई जाती है तो आवश्यक मरम्मत कराई जाएगी। यह भी बताया कि यदि किसी स्थान पर क्षति होती है तो उसे समय-समय पर ठीक कराया जाता है। फिलहाल भारी वाहनों पर किसी प्रकार का प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि उन्होंने आधिकारिक प्रतिक्रिया के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से बात करने की बात कही। वहीं स्थानीय निवासी सुरेश शिवम और राममनोहर का कहना है कि पुल लगभग पांच दशक पुराना हो चुका है और प्रतिदिन भारी वाहनों का दबाव झेल रहा है। ऐसे में समय-समय पर तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत कराई जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे।
शहर के मोहल्ला डिकी निवासी वैभव सेन का कहना है कि बेतवा नदी पर बने पुल से बड़ी संख्या में वाहनों का गुजरना होता है। कई बार पुल पर जाम लगने की वजह से भारी वाहन एक साथ खड़े हो जाते हैं। पुल में हुए गड्ढे की मरम्मत शीघ्र न हुई तो हादसे की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
रक्तदान समिति के संस्थापक अशोक निषाद गुरु का कहना है कि बेतवा पुल काफी पुराना है। पुल पर सुबह के वक्त एक गड्ढा देखा गया है। अगर समय रहते रखरखाव नहीं हुआ तो बड़ी घटना सामने आ सकती है। जिम्मेदारों को गंभीरता से पुल का परीक्षण कराना चाहिए।
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बेतवा पुल वर्ष 1978 में बना था और करीब 48 वर्ष पुराना हो चुका है। पुल से प्रतिदिन करीब बीस हजार छोटे-बड़े वाहन और भारी मालवाहक ट्रक गुजरते हैं। वर्तमान में बेतवा और यमुना नदियों पर समानांतर नए पुलों का निर्माण जारी है। ऐसे में पुराने पुल पर ही यातायात का पूरा दबाव बना हुआ है। शनिवार को पुल पर 10 नंबर पिलर में एक्सपेंशन जॉइंट पर एक गड्ढा देखा गया। गहरे गड्ढे में सरिया से लेकर कंक्रीट अलग थी। गड्ढे का आकार बढ़ता जा रहा है। सरिया और गहरा गड्ढा देखकर राहगीरों में भय व्याप्त है।
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पहले पुल के रखरखाव का जिम्मा पीएनसी के पास था। कंपनी का अनुबंध समाप्त होने के बाद अब पुल का रखरखाव भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधीन है। हालांकि रखरखाव का कार्य जे बिल्डर्स के माध्यम से कराया जा रहा है। जे बिल्डर्स के मेंटेनेंस मैनेजर सौरभ यादव ने बताया कि एक्सपेंशन जॉइंट के ऊपर करीब तीन से चार इंच मोटी कंक्रीट की परत में दरार आई है। उन्होंने कहा कि नीचे इस्पात प्लेट लगी हुई है। आवश्यक मरम्मत कर इसे ठीक कर दिया जाएगा। उनके अनुसार इससे पुल की संरचनात्मक मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ा है और भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि करीब चार माह पहले पुल की तकनीकी जांच हुई थी और अगले महीने फिर अभियंताओं की टीम निरीक्षण करेगी।
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वहीं, एनएचएआई के अभियंता नीरज ने बताया कि बेतवा पुल एनएचएआई के अधीन है और उसका नियमित रखरखाव कराया जा रहा है। उन्होंने कहा बेतवा पुल का निरीक्षण किया गया जाएगा। यदि एक्सपेंशन जॉइंट में किसी प्रकार की क्षति पाई जाती है तो आवश्यक मरम्मत कराई जाएगी। यह भी बताया कि यदि किसी स्थान पर क्षति होती है तो उसे समय-समय पर ठीक कराया जाता है। फिलहाल भारी वाहनों पर किसी प्रकार का प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि उन्होंने आधिकारिक प्रतिक्रिया के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से बात करने की बात कही। वहीं स्थानीय निवासी सुरेश शिवम और राममनोहर का कहना है कि पुल लगभग पांच दशक पुराना हो चुका है और प्रतिदिन भारी वाहनों का दबाव झेल रहा है। ऐसे में समय-समय पर तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत कराई जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे।
शहर के मोहल्ला डिकी निवासी वैभव सेन का कहना है कि बेतवा नदी पर बने पुल से बड़ी संख्या में वाहनों का गुजरना होता है। कई बार पुल पर जाम लगने की वजह से भारी वाहन एक साथ खड़े हो जाते हैं। पुल में हुए गड्ढे की मरम्मत शीघ्र न हुई तो हादसे की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
रक्तदान समिति के संस्थापक अशोक निषाद गुरु का कहना है कि बेतवा पुल काफी पुराना है। पुल पर सुबह के वक्त एक गड्ढा देखा गया है। अगर समय रहते रखरखाव नहीं हुआ तो बड़ी घटना सामने आ सकती है। जिम्मेदारों को गंभीरता से पुल का परीक्षण कराना चाहिए।