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Hapur News: अब माध्यमिक विद्यालयों में बुक बैंक की होगी स्थापना
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हापुड़। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यार्थियों को समय पर और सुगमता से पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की पहल शुरू की है। इस योजना के तहत जिले के माध्यमिक विद्यालयों में बुक बैंक की स्थापना की जाएगी। बुक बैंक के माध्यम से विद्यार्थियों को नए सत्र की शुरुआत में ही आवश्यक किताबें मिल सकेंगी। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा और पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी।
जिले के माध्यमिक स्कूलों में बुक बैंक में पाठ्यक्रम के अनुसार सभी विषयों की किताबें संग्रहित की जाएंगी। सत्र समाप्त होने पर विद्यार्थियों से किताबें जमा करवाई जाएंगी, जिन्हें अगली कक्षा के विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किताबों का पुन: उपयोग संभव होगा और हर साल नई किताबें खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को इससे लाभ होगा।
योजना के तहत विद्यालय स्तर पर एक समिति गठित की जाएगी, जो बुक बैंक के संचालन, पुस्तकों के रखरखाव और वितरण की जिम्मेदारी निभाएगी। किताबों की स्थिति की नियमित जांच होगी, ताकि वे उपयोग योग्य बनी रहें। खराब या अनुपयोगी पुस्तकों को अलग कर उनकी जगह नई किताबें जोड़ी जाएंगी। इसके लिए विद्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
डीआईओएस डॉ श्वेता पूठिया ने बताया कि बुक बैंक बनने से बच्चों में पुस्तकों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी। साथ ही, सत्र की शुरुआत में किताबें न मिलने की समस्या भी समाप्त होगी। कई बार किताबों की उपलब्धता में देरी के कारण पढ़ाई प्रभावित होती थी, जिसे यह व्यवस्था काफी हद तक दूर करेगी।
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जिले के माध्यमिक स्कूलों में बुक बैंक में पाठ्यक्रम के अनुसार सभी विषयों की किताबें संग्रहित की जाएंगी। सत्र समाप्त होने पर विद्यार्थियों से किताबें जमा करवाई जाएंगी, जिन्हें अगली कक्षा के विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किताबों का पुन: उपयोग संभव होगा और हर साल नई किताबें खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को इससे लाभ होगा।
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योजना के तहत विद्यालय स्तर पर एक समिति गठित की जाएगी, जो बुक बैंक के संचालन, पुस्तकों के रखरखाव और वितरण की जिम्मेदारी निभाएगी। किताबों की स्थिति की नियमित जांच होगी, ताकि वे उपयोग योग्य बनी रहें। खराब या अनुपयोगी पुस्तकों को अलग कर उनकी जगह नई किताबें जोड़ी जाएंगी। इसके लिए विद्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
डीआईओएस डॉ श्वेता पूठिया ने बताया कि बुक बैंक बनने से बच्चों में पुस्तकों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी। साथ ही, सत्र की शुरुआत में किताबें न मिलने की समस्या भी समाप्त होगी। कई बार किताबों की उपलब्धता में देरी के कारण पढ़ाई प्रभावित होती थी, जिसे यह व्यवस्था काफी हद तक दूर करेगी।
