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Hapur News: बारिश में टपक रहीं परिषदीय स्कूलों की छतें
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हापुड़। झमाझम बारिश में बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों की छतें टपक रही हैं। सर्वे और करोड़ों रुपये खर्चने के बाद भी छात्रों की जान सुरक्षित नहीं है।
छतों का पानी फर्नीचर पर टपकने के कारण छात्रों को अन्य कक्षों में बैठाया जा रहा है। गिरधरपुर तुमरेल के स्कूल की छत से मलबा गिरने से छात्र दहशत में आ गए।
पिछले साल बरसात के दौरान कई स्कूलों की छतों से मलबा गिरा था। तत्कालीन डीएम अभिषेक पांडेय ने दर्जनों विभागों के अधिकारियों को लगाकर जर्जर स्कूलों का सर्वे कराया। इनका निर्माण फिर से कराने को लेकर बजट की व्यवस्था कराई गई लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारियों की अनदेखी से उस समय चिह्नित किए बहुत से स्कूलों के भवन निर्माण पूरे नहीं हो सके हैं।
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आलम यह है कि जिन स्कूलों में पढ़ाई चल रही है, उनकी छतें भी टपक रही हैं। सर्वे में ऐसे स्कूलों की क्या रिपोर्ट लगाई गई है, यह अधिकारी ही जानें। बृहस्पतिवार को भीकनपुर के प्राथमिक विद्यालय की छत से पानी टपकता नजर आया।वहीं, गिरधरपुर तुमरैल में स्थित स्कूल का मलबा बारिश के दौरान नीचे गिर गया। गनीमत रही कि इसकी चपेट में बच्चे नहीं आ सके।
इसके अलावा अन्य अधिकांश स्कूलों में मैदान नीचा पड़ जाने के कारण बारिश का पानी भरा रहा। कई स्कूल तालाब में तब्दील हुए नजर आए। स्कूलों से जल निकासी की स्थिति भी खराब मिली, इस कारण परिसर में जलभराव अधिक हुआ।
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छतों का पानी फर्नीचर पर टपकने के कारण छात्रों को अन्य कक्षों में बैठाया जा रहा है। गिरधरपुर तुमरेल के स्कूल की छत से मलबा गिरने से छात्र दहशत में आ गए।
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पिछले साल बरसात के दौरान कई स्कूलों की छतों से मलबा गिरा था। तत्कालीन डीएम अभिषेक पांडेय ने दर्जनों विभागों के अधिकारियों को लगाकर जर्जर स्कूलों का सर्वे कराया। इनका निर्माण फिर से कराने को लेकर बजट की व्यवस्था कराई गई लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारियों की अनदेखी से उस समय चिह्नित किए बहुत से स्कूलों के भवन निर्माण पूरे नहीं हो सके हैं।
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आलम यह है कि जिन स्कूलों में पढ़ाई चल रही है, उनकी छतें भी टपक रही हैं। सर्वे में ऐसे स्कूलों की क्या रिपोर्ट लगाई गई है, यह अधिकारी ही जानें। बृहस्पतिवार को भीकनपुर के प्राथमिक विद्यालय की छत से पानी टपकता नजर आया।वहीं, गिरधरपुर तुमरैल में स्थित स्कूल का मलबा बारिश के दौरान नीचे गिर गया। गनीमत रही कि इसकी चपेट में बच्चे नहीं आ सके।
इसके अलावा अन्य अधिकांश स्कूलों में मैदान नीचा पड़ जाने के कारण बारिश का पानी भरा रहा। कई स्कूल तालाब में तब्दील हुए नजर आए। स्कूलों से जल निकासी की स्थिति भी खराब मिली, इस कारण परिसर में जलभराव अधिक हुआ।