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Hapur News: गांवों में विकास कार्यों का होगा सोशल ऑडिट

संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़ Updated Tue, 13 Jan 2026 10:50 PM IST
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social audit of villages
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हापुड़। जिले के चारों ब्लॉक की 273 ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये से हुए विकास कार्यों का सोशल ऑडिट कराया जाएगा। चार सदस्यीय टीम गांव-गांव जाकर अपनी रिपोर्ट बनाकर डीएम को सौंपेगी। इससे गांवों में योजनाओं की हकीकत सामने आ जाएगी।
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सभी विकास खंडों में विभिन्न योजनाओं के तहत किए गए विकास कार्यों के सोशल ऑडिट को लेकर शासन ने निर्देश दिए हैं। यह ऑडिट महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की योजनाओं और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के तहत संचालित योजनाओं पर केंद्रित रहेगा।
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बता दें कि डीएम की ओर से जारी पत्र के अनुसार, ग्राम पंचायतों को मनरेगा के तहत किए गए कार्यों का विवरण प्रपत्र (बी) और (सी) पर और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का विवरण प्रपत्र (ए) पर जिला विकास अधिकारी के कार्यालय में उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त मनरेगा के सात रजिस्टरों जॉबकार्ड, ग्राम सभा कार्यवृत्त, काम की मांग, कार्य आवंटन, मजदूरी भुगतान, शिकायत, कार्य और स्थाई परिसंपत्ति रजिस्टर की सत्यापित प्रतियां और संबंधित अभिलेख सोशल ऑडिट टीम को उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और अन्य योजनाओं के लाभार्थी विवरण भी जिला विकास अधिकारी द्वारा ग्राम पंचायतवार ऑडिट टीमों को प्रदान किए जाएंगे। इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑडिट कैलेंडर की प्रतियां सभी विकास खंड कार्यालयों और जिला मुख्यालय पर चस्पा होंगी।
मामले में डीपीआरओ शिव बिहारी शुक्ला का कहना है कि गांवों में सोशल ऑडिट के लिए चार सदस्यीय टीम के लिए आवेदन मांगे गए थे। इस दिशा में कार्य चल रहा है। ब्लॉक अनुसार टीम का गठन करके जांच कराई जाएगी।

इस प्रकार बनाई जा रही टीम --
सोशल ऑडिट के लिए डीएम अभिषेक पांडेय ने ब्लॉक स्तर पर चार सदस्यीय टीमों के पैनल बनाने के आदेश दिए थे। प्रत्येक टीम में सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और जॉब कार्ड धारक श्रमिक और उसके पात्र पुत्र/पुत्री-प्रत्येक श्रेणी से एक-एक सदस्य होंगे। इस टीम में न्यूनतम एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य है। इसमें महिला सदस्य के स्वयं सहायता समूह के सदस्य होने पर उसे वरीयता के आधार पर टीम में रखा जाएगा। बता दें कि सोशल ऑडिट टीम के सदस्यों की सेवाएं पूर्णतया सामाजिक कार्य है। इसे किसी प्रकार की नौकरी की श्रेणी में नहीं रखा गया है।
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