UP: हरदोई में निराश्रित मवेशियों के गोबर से बन रही 24 KW बिजली, 40 लाख में बना है गोवर्धन प्लांट, ये हैं फायदे
Hardoi News: वैसे तो निराश्रित मवेशी किसानों और आमजन के लिए किसी समस्या से कम नहीं है। लेकिन हरदोई जिले में ये मवेशी कार्यालयों और घरों को रोशन करने का काम करेंगे। दरअसल, यहां निराश्रित मवेशियों के गोबर से 24 किलोवॉट बिजली बन रही है।
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हरदोई जिले में पशुआश्रय स्थलों में संरक्षित किए गए मवेशियों के गोबर से सरकारी कार्यालय सहित लोगों के घरों में प्रकाश फैलेगा। इनके गोबर से बिजली उत्पादन के लिए जनपद का पहला गोवर्धन प्लांट बावन के पशु आश्रयस्थल में बनवाया गया है। यहां पर 24 किलोवाट बिजली का उत्पादन ट्रायल के तौर पर शुरू हो गया है। निराश्रित मवेशियों को आए दिन किसानों की ओर से शिकायत करने के अलावा सरकारी भवनों में बंद किए जाने के मामले आते रहते हैं।
इस सबके बीच मवेशियों के संरक्षण के साथ ही इनसे जुड़ी एक अच्छी खबर भी निकलकर आई है। मवेशियों को संरक्षित किए जाने के साथ ही इनके गोबर से जैविक खाद, जीवामृत और घनजीवामृत तैयार कराए जाने के साथ ही बिजली उत्पादन भी शुरू किया गया है। विकास खंड बावन मुख्यालय के अस्थायी पशु आश्रय स्थल पर पंचायतीराज विभाग के सहयोग से गोवर्धन प्लांट की स्थापना कराई गई है।
गोवर्धन प्लांट की स्थापना पर करीब 40 लाख का खर्च आया है। शासन की ओर से नामित आनंद बायोटेक कंपनी को स्थापना के साथ ही प्लांट को एक वर्ष तक संचालित किए जाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कंपनी के कर्मचारी गोबर से गैसीफायर जनरेट सेट से बिजली उत्पादन और वितरण का काम करने के साथ ही यहां के कर्मचारियों को दक्ष भी बनाएंगे।
ट्रायल के लिए विकास खंड तक लाइन डलवाई गई है
बिजली उत्पादन के ट्रायल के साथ ही इसकी आपूर्ति के लिए बीडीओ कार्यालय तक बिजली लाइन भी डलवाई गई है। बावन बीडीओ का कार्यभार देख रहे जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी डॉ. रामप्रकाश ने बताया कि ट्रायल के लिए विकास खंड तक लाइन डलवाई गई है। बिजली आपूर्ति शुरू हो गई है। जल्द ही बरातघर, आश्रयस्थल, प्रधानमंत्री आवास योजना के एक लाभार्थी, आंगनबाड़ी केंद्र और स्वयं सहायता समूह के शेड को बिजली आपूर्ति दी जाएगी।
अतिरिक्त ऊर्जा का होगा उत्पादन, बचेगा खर्च
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बताया कि मवेशियों की समस्या है, जिसका समाधान कराया जा रहा है। संरक्षण के लिए और आश्रयस्थल बनवाए जा रहे हैं। बावन के आश्रयस्थल में गोबर से बिजली उत्पादन का ट्रायल शुरू हो गया है, उद्घाटन होना बाकी है। गोवर्धन प्लांट की स्थापना से अतिरिक्त ऊर्जा का उत्पादन होगा और 24 घंटे बिजली की आपूर्ति मिल सकेगी। कार्यालय सहित संबंधित प्रतिष्ठानों में बिजली बिल का खर्च बचेगा। गोबर का भी खाद के रूप में किसान उपयोग कर सकेंगे।