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Hardoi News: महंगी दवाओं के बीच सस्ती उम्मीद, जन औषधि केंद्रों पर बढ़ी भीड़
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फोटो- 27- शालिनी। संवाद
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज की फार्मेसी में दवाओं की कमी होने से मरीजों को आधी-अधूरी दवाएं मिल रही हैं। मरीज बाहर से दवा खरीदने को मजबूर हैं, दवाइयां वहां काफी महंगी होती हैं। हालांकि जनऔषघि केंद्र पर मरीजों को सस्ती दवाओं की उम्मीद रहती है। वहां कीमत कम होने से काफी भीड़ उमड़ रही है। मेडिकल कॉलेज में दवाओं के न मिलने से गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में रोजाना जिले के दूर दराज से मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं। चिकित्सीय परामर्श के लिए मरीज सुबह से ही जुटने लगते हैं। घंटों तक लाइन में लगने के बाद जब मरीज दवा लेने काउंटर पर पहुंचते हैं तो मरीजों को पर्चे पर लिखी आधी-अधूरी दवा देकर टरका दिया जाता है। दवा लेने आए 95 प्रतिशत मरीजों को सभी दवाएं नहीं मिल रहीं।
निजी मेडिकल स्टोर से मरीजाें को महंगी दवाएं लेनी पड़ती थीं लेकिन अब जनऔषधि केंद्र के संचालन से मरीजों को 50 प्रतिशत कम मूल्यों पर दवाएं मिल रही हैं। इससे परिसर में चल रहे जन औषधि केंद्र पर मरीजों के तीमारदारों की लंबी लाइन लग रही है। जन औषधि केंद्र पर मरीज के तीमारदारों को दवा तो मिल रही है लेकिन वहां पर भी जेब ढीली करनी पड़ रही है। इससे मरीज के तीमारदारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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कई मरीजों को फार्मेसी से एक भी नहीं मिली दवा
मेडिकल कॉलेज की फार्मेसी की स्थिति यह है कि कई मरीजों को पर्चे पर लिखी एक भी दवा अस्पताल के काउंटर से नहीं मिल रही। महिला अस्पताल में डाॅक्टर की ओर से लिखी गई आयरन और फोलिक एसिड की दवा तक मरीजों को नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा ओमेप्रोजोल और डॉक्सीलामाइन दवा भी नहीं है। इस प्रकार दांत दर्द से संबंधित पर्चे पर एमॉक्सीक्लाव, एसीलोफेंस, ओमेप्राज और प्रोबायोटिक्स दवा लिखी गई। मेडिकल कॉलेज की फार्मेसी में एक भी दवा नहीं मिली।
केस-1- ककरहा निवासी शालिनी ने बताया कि वह महिला अस्पताल में दवा लेने गई थीं लेकिन डॉक्टर की लिखी एक भी दवा नहीं मिली। जन औषधि केंद्र पर दवा लेने के लिए कहा गया, यहां पर भी सभी दवाएं नहीं हैं।
केस-2- कौढ़ा निवासी नितिन ने बताया कि दांत दर्द से पीड़ित हैं। चिकित्सीय परामर्श के बाद दवा लेने आए तो दवा काउंटर पर गए तो वहां पर्चे पर लिखी एक भी दवा नहीं मिली। जन औषधि केंद्र पर दवा लेने के लिए कहा गया। यहां एक भी दवा नहीं मिली।
मरीजों को दवाएं बाहर से न खरीदना पड़े इसके लिए जन सुविधा केंद्र का संचालन कराया गया है। केंद्र पर अगर कोई दवा नहीं मिल रही है तो संचालक को पूरा कराने के लिए कहा जाएगा। काउंटर पर भी दवाएं पूरी करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज में रोजाना जिले के दूर दराज से मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं। चिकित्सीय परामर्श के लिए मरीज सुबह से ही जुटने लगते हैं। घंटों तक लाइन में लगने के बाद जब मरीज दवा लेने काउंटर पर पहुंचते हैं तो मरीजों को पर्चे पर लिखी आधी-अधूरी दवा देकर टरका दिया जाता है। दवा लेने आए 95 प्रतिशत मरीजों को सभी दवाएं नहीं मिल रहीं।
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निजी मेडिकल स्टोर से मरीजाें को महंगी दवाएं लेनी पड़ती थीं लेकिन अब जनऔषधि केंद्र के संचालन से मरीजों को 50 प्रतिशत कम मूल्यों पर दवाएं मिल रही हैं। इससे परिसर में चल रहे जन औषधि केंद्र पर मरीजों के तीमारदारों की लंबी लाइन लग रही है। जन औषधि केंद्र पर मरीज के तीमारदारों को दवा तो मिल रही है लेकिन वहां पर भी जेब ढीली करनी पड़ रही है। इससे मरीज के तीमारदारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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कई मरीजों को फार्मेसी से एक भी नहीं मिली दवा
मेडिकल कॉलेज की फार्मेसी की स्थिति यह है कि कई मरीजों को पर्चे पर लिखी एक भी दवा अस्पताल के काउंटर से नहीं मिल रही। महिला अस्पताल में डाॅक्टर की ओर से लिखी गई आयरन और फोलिक एसिड की दवा तक मरीजों को नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा ओमेप्रोजोल और डॉक्सीलामाइन दवा भी नहीं है। इस प्रकार दांत दर्द से संबंधित पर्चे पर एमॉक्सीक्लाव, एसीलोफेंस, ओमेप्राज और प्रोबायोटिक्स दवा लिखी गई। मेडिकल कॉलेज की फार्मेसी में एक भी दवा नहीं मिली।
केस-1- ककरहा निवासी शालिनी ने बताया कि वह महिला अस्पताल में दवा लेने गई थीं लेकिन डॉक्टर की लिखी एक भी दवा नहीं मिली। जन औषधि केंद्र पर दवा लेने के लिए कहा गया, यहां पर भी सभी दवाएं नहीं हैं।
केस-2- कौढ़ा निवासी नितिन ने बताया कि दांत दर्द से पीड़ित हैं। चिकित्सीय परामर्श के बाद दवा लेने आए तो दवा काउंटर पर गए तो वहां पर्चे पर लिखी एक भी दवा नहीं मिली। जन औषधि केंद्र पर दवा लेने के लिए कहा गया। यहां एक भी दवा नहीं मिली।
मरीजों को दवाएं बाहर से न खरीदना पड़े इसके लिए जन सुविधा केंद्र का संचालन कराया गया है। केंद्र पर अगर कोई दवा नहीं मिल रही है तो संचालक को पूरा कराने के लिए कहा जाएगा। काउंटर पर भी दवाएं पूरी करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज

फोटो- 27- शालिनी। संवाद

फोटो- 27- शालिनी। संवाद