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हैवानियत की हद : मासूम से दुष्कर्म कर नाले में डुबोकर हत्या करने वाले को अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा
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हरदोई। साढ़े चार साल की मासूम के साथ दुष्कर्म कर नाले में डुबोकर हत्या करने के आरोपी को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) मनमोहन सिंह ने दोषी करार दिया। दोषी को अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई। उस पर 55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
पचदेवरा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि 29 जून 2025 की सुबह करीब साढ़े 10 बजे मासूम (साढ़े चार वर्ष) मकान के बाहर चारपाई पर खेल रही थी। कुछ देर बाद वह रहस्यमय ढंग से गायब हो गई। चारपाई के नीचे उसकी चप्पलें पड़ी थीं और एक अधपका आम वहां रखा था। तलाश के दौरान पता चला कि यह आम गांव के ही एक बाग का है जहां बिहार का रहने वाला सचिन चौकीदारी करता था।
बच्ची के लापता होने की सूचना पर पुलिस ने संदेह के आधार पर सचिन से पूछताछ की तो वह भागने लगा। ग्रामीणों ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया था। उसकी निशानदेही पर बाग के पास स्थित कच्चे नाले से मासूम का शव बरामद हुआ था। शव अर्द्धनग्न था और कीचड़ में औंधे मुंह पड़ा था। उस पर घास-फूस डालकर शव छिपाने की कोशिश भी की गई थी। पोस्टमार्टम में मासूम के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई। फेफड़ों में पानी और कीचड़ मिलने से डुबोकर हत्या किए जाने की भी पुष्टि रिपोर्ट में हुई थी।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को संदेह के आधार पर फंसाए जाने और मासूम की मौत डूबने के कारण होने का तर्क दिया गया। न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि साढ़े चार साल की अबोध बच्ची को गहरे नाले में फेंकना हत्या की स्पष्ट मंशा को दर्शाता है और परिस्थितियों की पूरी शृंखला आरोपी के अलावा किसी अन्य संभावना को नहीं छोड़ती। यही कहकर अपर जिला जज ने दोषी को सजा सुनाई।
358 दिन में 44 पेशियों के बाद आया फैसला
29 जून 2025 को हुई घटना में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस ने 28 जुलाई 2025 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया था। इसी दिन न्यायालय ने मामले का संज्ञान ले लिया था। 358 दिन में 44 तारीखों पर मामले की सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान नौ गवाह और 15 अभिलेखीय साक्ष्य पेश किए गए। 21 जुलाई 2026 को अपर जिला जज मनमोहन सिंह ने इस मामले में सजा सुना दी।
कब क्या हुआ
. 29 जून 2025 की रात मासूम का शव मिला।
. 29 जून 2025 को प्राथमिकी दर्ज हुई।
. 29 जून 2025 को आरोपी पकड़ा गया।
. 28 जुलाई 2025 को आरोप पत्र दाखिल हुआ।
. 07 अगस्त 2025 को आरोप तय हुए।
. 22 अगस्त 2025 को गवाही शुरू हुई।
. 21 जुलाई 2026 को सजा सुनाई गई।
. कुल 44 तारीखें पड़ीं
. नौ गवाह पेश किए गए।
. 15 अभिलेखीय साक्ष्य पेश हुए।
पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश में लगी थी गोली
विवेचना के दौरान पुलिस 30 जून 2025 को आरोपी को साक्ष्य संकलन के लिए ले जा रही थी तो उसने उपनिरीक्षक की सरकारी पिस्टल छीन ली थी। भागते हुए पुलिस टीम पर फायर कर दिया था। जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी थी जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
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पचदेवरा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि 29 जून 2025 की सुबह करीब साढ़े 10 बजे मासूम (साढ़े चार वर्ष) मकान के बाहर चारपाई पर खेल रही थी। कुछ देर बाद वह रहस्यमय ढंग से गायब हो गई। चारपाई के नीचे उसकी चप्पलें पड़ी थीं और एक अधपका आम वहां रखा था। तलाश के दौरान पता चला कि यह आम गांव के ही एक बाग का है जहां बिहार का रहने वाला सचिन चौकीदारी करता था।
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बच्ची के लापता होने की सूचना पर पुलिस ने संदेह के आधार पर सचिन से पूछताछ की तो वह भागने लगा। ग्रामीणों ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया था। उसकी निशानदेही पर बाग के पास स्थित कच्चे नाले से मासूम का शव बरामद हुआ था। शव अर्द्धनग्न था और कीचड़ में औंधे मुंह पड़ा था। उस पर घास-फूस डालकर शव छिपाने की कोशिश भी की गई थी। पोस्टमार्टम में मासूम के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई। फेफड़ों में पानी और कीचड़ मिलने से डुबोकर हत्या किए जाने की भी पुष्टि रिपोर्ट में हुई थी।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को संदेह के आधार पर फंसाए जाने और मासूम की मौत डूबने के कारण होने का तर्क दिया गया। न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि साढ़े चार साल की अबोध बच्ची को गहरे नाले में फेंकना हत्या की स्पष्ट मंशा को दर्शाता है और परिस्थितियों की पूरी शृंखला आरोपी के अलावा किसी अन्य संभावना को नहीं छोड़ती। यही कहकर अपर जिला जज ने दोषी को सजा सुनाई।
358 दिन में 44 पेशियों के बाद आया फैसला
29 जून 2025 को हुई घटना में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस ने 28 जुलाई 2025 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया था। इसी दिन न्यायालय ने मामले का संज्ञान ले लिया था। 358 दिन में 44 तारीखों पर मामले की सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान नौ गवाह और 15 अभिलेखीय साक्ष्य पेश किए गए। 21 जुलाई 2026 को अपर जिला जज मनमोहन सिंह ने इस मामले में सजा सुना दी।
कब क्या हुआ
. 29 जून 2025 की रात मासूम का शव मिला।
. 29 जून 2025 को प्राथमिकी दर्ज हुई।
. 29 जून 2025 को आरोपी पकड़ा गया।
. 28 जुलाई 2025 को आरोप पत्र दाखिल हुआ।
. 07 अगस्त 2025 को आरोप तय हुए।
. 22 अगस्त 2025 को गवाही शुरू हुई।
. 21 जुलाई 2026 को सजा सुनाई गई।
. कुल 44 तारीखें पड़ीं
. नौ गवाह पेश किए गए।
. 15 अभिलेखीय साक्ष्य पेश हुए।
पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश में लगी थी गोली
विवेचना के दौरान पुलिस 30 जून 2025 को आरोपी को साक्ष्य संकलन के लिए ले जा रही थी तो उसने उपनिरीक्षक की सरकारी पिस्टल छीन ली थी। भागते हुए पुलिस टीम पर फायर कर दिया था। जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी थी जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।