{"_id":"69f7865b06fcb40e3702dbd7","slug":"blood-bank-faces-blood-shortage-with-all-units-except-those-for-o-and-b-positive-blood-groups-exhausted-hardoi-news-c-213-1-hra1004-149127-2026-05-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: ब्लड बैंक में खून की कमी, ओ व बी पाजीटिव को छोड़ बाकी की खत्म हुई यूनिट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: ब्लड बैंक में खून की कमी, ओ व बी पाजीटिव को छोड़ बाकी की खत्म हुई यूनिट
विज्ञापन
फोटो-19- मेडिकल कॉलेज में ब्लड बैंक। संवाद
विज्ञापन
हरदोई। पांच सौ यूनिट रक्त की भंडारण क्षमता वाले मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में 50 यूनिट रक्त भी नहीं है। हर रोज 13 से 15 यूनिट रक्त की जरूरत मरीजों के लिए होती है। सिर्फ तीन समूहों का ही रक्त उपलब्ध है। गनीमत यह है कि एक्सचेंज के कारण ब्लड बैंक में रक्त की उपलब्धता शून्य नहीं है।
मेडिकल कॉलेज का ब्लड बैंक इन दिनों खुद खून की कमी से जूझ रहा है। मौजूदा समय में ब्लड में 38 यूनिट की रक्त शेष बचा है। अभी तक तो महिला अस्पताल में भर्ती होने वाली प्रसूताओं को बिना डोनर के ही रक्त मिल जाता था लेकिन अब खून की कमी के चलते उनके परिजनों को भी डोनर ढूंढने के लिए भटकना पड़ रहा है। सबसे खराब स्थिति दुर्लभ ब्लड ग्रुप वाले मरीजों की है, ऐसे मरीजों को तो न तो डोनर मिल पा रहे हैं और न ही रक्त मिल पा रहा है। परिजनों को पास पड़ोसी जनपदों की ब्लड बैंकों से महंगे दामों पर रक्त खरीदना पड़ रहा है। जनपद के पांच सौ यूनिट के भंडारण क्षमता वाले ब्लड बैंक में 35 यूनिट रक्त ओ पॉजीटिव, दो यूनिट बी पाॅजीटिव और एक यूनिट एबी पॉजीटिव है। इसके अतिरिक्त किसी भी ग्रुप का रक्त मौजूद न होने से मरीजों के परिजन डोनर ढूढ़ने को मजबूर हैं।
केस-1- टड़ियावां निवासी राधा को एबी निगेटिव ब्लड ग्रुप की आवश्यकता थी। चूंकि यह बहुत दुर्लभ रक्त समूह है तो वह मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक में मिला नहीं। वहीं, परिजनों को डोनर मिलना मुश्किल हो गया। ब्लड बैंक की सहायता से एक डोनर भी मिला लेकिन दूसरी यूनिट के लिए लखनऊ में सात हजार रुपये खर्च करने पड़े।
केस-2- शहर के अर्जुन यादव के भाई को ए निगेटिव रक्त की आवश्यकता हुई। उन्होंने भी बड़ा प्रयास किया, मेडिकल कॉलेज में उपलब्धता नहीं रही। निजी ब्लड बैंकों में भी मायूसी हाथ लगी। बड़ी मुश्किल से लखनऊ में ब्लड बैंक से साढ़े आठ हजार रुपये में एक यूनिट मिल सकी।
स्वैच्छिक रक्तदान की कमी बनी वजह
ब्लड बैंक में बीते कई महिनों से कोई बड़ा रक्त दान शिविर भी नहीं लगा है और रक्तदान करने वाले भी काफी कम हो गए हैं। इसी वजह से ब्लड बैंक में रक्त समूहों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। लोग केवल रिप्लेसमेंट के आधार पर ही रक्तदान कर रहे हैं, इससे इमरजेंसी के लिए रिजर्व स्टॉक खत्म होता जा रहा है। ब्लक बैंक के टेक्निशियन अकील खान ने कहा कि रक्तदान 18 से 65 वर्ष की आयु का कोई भी व्यक्ति कर सकता है। उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं से अपील की है कि वे आगे आएं और रक्तदान करें।
वर्जनइन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ी है। रक्तदान शिविरों के आयोजन में कमी और भीषण गर्मी के चलते स्टॉक गिरा है। जल्द ही कैंप लगाकर इस कमी को दूर किया जाएगा। -डॉ. पवन श्रीवास्तव, प्रभारी, ब्लड बैंक
Trending Videos
मेडिकल कॉलेज का ब्लड बैंक इन दिनों खुद खून की कमी से जूझ रहा है। मौजूदा समय में ब्लड में 38 यूनिट की रक्त शेष बचा है। अभी तक तो महिला अस्पताल में भर्ती होने वाली प्रसूताओं को बिना डोनर के ही रक्त मिल जाता था लेकिन अब खून की कमी के चलते उनके परिजनों को भी डोनर ढूंढने के लिए भटकना पड़ रहा है। सबसे खराब स्थिति दुर्लभ ब्लड ग्रुप वाले मरीजों की है, ऐसे मरीजों को तो न तो डोनर मिल पा रहे हैं और न ही रक्त मिल पा रहा है। परिजनों को पास पड़ोसी जनपदों की ब्लड बैंकों से महंगे दामों पर रक्त खरीदना पड़ रहा है। जनपद के पांच सौ यूनिट के भंडारण क्षमता वाले ब्लड बैंक में 35 यूनिट रक्त ओ पॉजीटिव, दो यूनिट बी पाॅजीटिव और एक यूनिट एबी पॉजीटिव है। इसके अतिरिक्त किसी भी ग्रुप का रक्त मौजूद न होने से मरीजों के परिजन डोनर ढूढ़ने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
केस-1- टड़ियावां निवासी राधा को एबी निगेटिव ब्लड ग्रुप की आवश्यकता थी। चूंकि यह बहुत दुर्लभ रक्त समूह है तो वह मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक में मिला नहीं। वहीं, परिजनों को डोनर मिलना मुश्किल हो गया। ब्लड बैंक की सहायता से एक डोनर भी मिला लेकिन दूसरी यूनिट के लिए लखनऊ में सात हजार रुपये खर्च करने पड़े।
केस-2- शहर के अर्जुन यादव के भाई को ए निगेटिव रक्त की आवश्यकता हुई। उन्होंने भी बड़ा प्रयास किया, मेडिकल कॉलेज में उपलब्धता नहीं रही। निजी ब्लड बैंकों में भी मायूसी हाथ लगी। बड़ी मुश्किल से लखनऊ में ब्लड बैंक से साढ़े आठ हजार रुपये में एक यूनिट मिल सकी।
स्वैच्छिक रक्तदान की कमी बनी वजह
ब्लड बैंक में बीते कई महिनों से कोई बड़ा रक्त दान शिविर भी नहीं लगा है और रक्तदान करने वाले भी काफी कम हो गए हैं। इसी वजह से ब्लड बैंक में रक्त समूहों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। लोग केवल रिप्लेसमेंट के आधार पर ही रक्तदान कर रहे हैं, इससे इमरजेंसी के लिए रिजर्व स्टॉक खत्म होता जा रहा है। ब्लक बैंक के टेक्निशियन अकील खान ने कहा कि रक्तदान 18 से 65 वर्ष की आयु का कोई भी व्यक्ति कर सकता है। उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं से अपील की है कि वे आगे आएं और रक्तदान करें।
वर्जनइन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ी है। रक्तदान शिविरों के आयोजन में कमी और भीषण गर्मी के चलते स्टॉक गिरा है। जल्द ही कैंप लगाकर इस कमी को दूर किया जाएगा। -डॉ. पवन श्रीवास्तव, प्रभारी, ब्लड बैंक
