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Hardoi News: पेट में दर्द हो रहा आज, अल्ट्रासाउंड होगा एक दिन बाद
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फोटो-01- मेडिकल कॉलेज के अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़। संवाद
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे अर्जुन को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह चिकित्सक ने दी। अर्जुन अल्ट्रासाउंड कराने के लिए गए तो पता चला कि मरीजों की लंबी कतार पहले से ही है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड मंगलवार को हो नहीं पाया। मतलब यह कि दर्द आज है लेकिन अल्ट्रासाउंड अगले दिन होगा। दअसल, मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड के लिए एक ही मशीन है। इसी मशीन से महिला अस्पताल, ओपीडी और आकस्मिक चिकित्सा के मरीजों की जांच की जाती है। ऐसे में ज्यादातर मरीज दर्द की दवा लेकर जांच के लिए अगले दिन आते हैं।
मेडिकल कॉलेज खुलने के लंबे समय बाद तक अल्ट्रासाउंड हो ही नहीं रहे थे। करीब सात माह पहले 19 अगस्त को एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर (जेआर) की तैनाती कर अल्ट्रासाउंड शुरू कराए गए। तैनात किए गए जेआर ने शुरूआती दौर में बेहिसाब मेहनत की लेकिन काम का बोझ भी बेहद बढ़ गया। वजह यह कि मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आने वाले मरीज हों या महिला अस्पताल के मरीज। अल्ट्रासाउंड के लिए एक ही मशीन है।
इससे इतर आकस्मिक चिकित्सा वार्ड के मरीजों के लिए भी इसी मशीन का इस्तेमाल होता है। अल्ट्रासाउंड दोपहर दो बजे तक ही होते हैं। दिन भर में औसतन 100 मरीजों को ओपीडी से अल्ट्रासाउंड लिखा जाता है। लगातार काम करने पर भी एक दिन में 65 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड हो पाता है। ऐसे में बाकी मरीजों को अगले दिन आने की सलाह दी जाती है।
केस-1- सुरसा विकास खंड के पौथेपुरवा निवासी सतीश ने ओपीडी में चिकित्सक को दिखाया था। सोमवार को उन्हें अल्ट्रासाउंड लिखा गया था। सोमवार को अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया। मंगलवार दोपहर 12 बजे तक भी वह अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
केस-2- शहर के सुभाषनगर निवासी किरन दीक्षित ने भी सोमवार को ओपीडी में चिकित्सक से परामर्श लिया था। चिकित्सक ने उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी थी। सोमवार को भी वह अल्ट्रासाउंड कराने गईं लेकिन उनका नंबर नहीं आया। मंगवार को भी वह अल्ट्रासाउंड कराने के लिए अपनी बारी का इंतजार करती नजर आईं।
जूनियर डॉक्टर भी साढ़े नौ बजे के बाद करते जांच
एक ही अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए तैनात रेडियोलॉजिस्ट अन्य व्यस्तताओं के कारण कम ही आ पाते हैं। जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ही मरीजों का अल्ट्रासाउंड करते हैं। अल्ट्रासाउंड का कार्य सुबह लगभग 9:30 बजे से शुरू हो जाता है। मरीजों की लाइन तब तक लग चुकी होती है। एक अल्ट्रासाउंड करने में औसतन 20 मिनट लगते हैं। इस वजह से भी सभी मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता।
आईपीडी में रखी दूसरी मशीन, विद्युत कनेक्शन का इंतजार
मेडिकल कॉलेज में संसाधन बढ़ाने के क्रम में अल्ट्रासाउंड के लिए एक अत्याधुनिक मशीन मंगाई गई है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि यह मशीन आईपीडी भवन में रखी है। वहीं इसका उपयोग होना है। आईपीडी भवन में विद्युत सबस्टेशन न होने की वजह से अभी तक पूरी क्षमता से काम नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इस मशीन का भी उपयोग फिलहाल नहीं हो रहा है। इस मशीन का संचालन करने के लिए अभी स्टाफ भी नहीं है।
मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उपलब्ध संसाधनों के साथ सभी को बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। शासन से अतिरिक्त मशीन और स्टाफ की मांग भेजी गई है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज खुलने के लंबे समय बाद तक अल्ट्रासाउंड हो ही नहीं रहे थे। करीब सात माह पहले 19 अगस्त को एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर (जेआर) की तैनाती कर अल्ट्रासाउंड शुरू कराए गए। तैनात किए गए जेआर ने शुरूआती दौर में बेहिसाब मेहनत की लेकिन काम का बोझ भी बेहद बढ़ गया। वजह यह कि मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आने वाले मरीज हों या महिला अस्पताल के मरीज। अल्ट्रासाउंड के लिए एक ही मशीन है।
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इससे इतर आकस्मिक चिकित्सा वार्ड के मरीजों के लिए भी इसी मशीन का इस्तेमाल होता है। अल्ट्रासाउंड दोपहर दो बजे तक ही होते हैं। दिन भर में औसतन 100 मरीजों को ओपीडी से अल्ट्रासाउंड लिखा जाता है। लगातार काम करने पर भी एक दिन में 65 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड हो पाता है। ऐसे में बाकी मरीजों को अगले दिन आने की सलाह दी जाती है।
केस-1- सुरसा विकास खंड के पौथेपुरवा निवासी सतीश ने ओपीडी में चिकित्सक को दिखाया था। सोमवार को उन्हें अल्ट्रासाउंड लिखा गया था। सोमवार को अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया। मंगलवार दोपहर 12 बजे तक भी वह अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
केस-2- शहर के सुभाषनगर निवासी किरन दीक्षित ने भी सोमवार को ओपीडी में चिकित्सक से परामर्श लिया था। चिकित्सक ने उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी थी। सोमवार को भी वह अल्ट्रासाउंड कराने गईं लेकिन उनका नंबर नहीं आया। मंगवार को भी वह अल्ट्रासाउंड कराने के लिए अपनी बारी का इंतजार करती नजर आईं।
जूनियर डॉक्टर भी साढ़े नौ बजे के बाद करते जांच
एक ही अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए तैनात रेडियोलॉजिस्ट अन्य व्यस्तताओं के कारण कम ही आ पाते हैं। जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ही मरीजों का अल्ट्रासाउंड करते हैं। अल्ट्रासाउंड का कार्य सुबह लगभग 9:30 बजे से शुरू हो जाता है। मरीजों की लाइन तब तक लग चुकी होती है। एक अल्ट्रासाउंड करने में औसतन 20 मिनट लगते हैं। इस वजह से भी सभी मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता।
आईपीडी में रखी दूसरी मशीन, विद्युत कनेक्शन का इंतजार
मेडिकल कॉलेज में संसाधन बढ़ाने के क्रम में अल्ट्रासाउंड के लिए एक अत्याधुनिक मशीन मंगाई गई है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि यह मशीन आईपीडी भवन में रखी है। वहीं इसका उपयोग होना है। आईपीडी भवन में विद्युत सबस्टेशन न होने की वजह से अभी तक पूरी क्षमता से काम नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इस मशीन का भी उपयोग फिलहाल नहीं हो रहा है। इस मशीन का संचालन करने के लिए अभी स्टाफ भी नहीं है।
मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उपलब्ध संसाधनों के साथ सभी को बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। शासन से अतिरिक्त मशीन और स्टाफ की मांग भेजी गई है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज