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एलपीजी संकट : फिर लौटे लकड़ी-कोयला, भट्ठी के दिन, सामग्री की लागत और कीमत बढ़ी
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फोटो 23 : टड़ियावां में मिट्टी की भट्ठी पर लकड़ी से समोसा व मिर्चा बनाते दुकानदार प्रमोद। संवाद
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हरदोई। खाड़ी देशों में युद्ध के हालातों के बीच घरेलू की वरीयता के बीच व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति न होने से होटल, ढाबा संचालक और दुकानदार खाद्य सामग्री तैयार करने के लिए फिर से लकड़ी-कोयला की भट्ठी पर आ गए हैं। कोयला-लकड़ी की कीमतों से दुकानदारों के साथ ही आम उपभोक्ताओं की जेब पर भार बढ़ गया है।
खाद्य सामग्री की लागत और कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। व्यावसायिक सिलिंडर न मिलने से दुकानदार कोयला-लकड़ी की भट्ठी और बिजली वाले इंडक्शन चूल्हे को उपयोग में ला रहे हैं। दुकानदारों ने लागत बढ़ने से पांच वाला समोसा आठ रुपये, 20 वाला कबाब पराठा 25 और 25 की आलू टिक्की 30 रुपये में कर दी है।
पेश है कस्बा और नगरीय क्षेत्र के हालात पर एक रिपोर्ट :
मल्लावां में व्यावसायिक सिलिंडर करीब एक माह से न तो बुक हो रहा है और न ही मिल रहा है। सिलिंडर न मिलने पर मुख्य चौराहे के बाबा स्वीट हाउस के संचालक नीलेश गुप्ता ने बताया कि करीब एक माह से व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिला है। वह कोयले की भट्टी पर चाट, समोसा, मिठाई आदि बनवा रहे हैं। वैष्णवी मिष्ठान भंडार के संचालक अनूप यज्ञसैनी ने बताया कि उनके यहां प्रतिदिन एक सिलिंडर की खपत है, एक माह से व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिला। इससे 1,800 रुपये में मिलने वाला कोयला 2,200 रुपये, 500 रुपये में मिलने वाले लकड़ी के गुटके 800 रुपये में खरीदने पड़ रहे हैं। यही हाल जगदीश समोसा भंडार का भी है। इंडियन गैस सर्विस के संचालक अवधेश कटियार ने बताया कि व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति नहीं आ रही है इससे डिलीवरी नहीं दी जा पा रही।
कछौना में बालामऊ रेलवे स्टेशन के पास मिठाई की दुकान चलाने वाले सुशील कुमार ने बताया कि काफी दिनों से व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिला है। भट्ठी का सहारा लिया जा रहा है। कोयला 17 रुपये में था अब 22 रुपये प्रति किलोग्राम खरीदना पड़ रहा है।
संडीला नगर के श्याम स्वीट्स हाउस के संचालक श्याम जी जायसवाल ने बताया कि होली से पहले उनके पास छह कमर्शियल सिलिंडर थे। इससे काम चल रहा था, कुछ दिन से गैस की किल्लत हो गई है। अभ कमर्शियल सिलिंडर मिलना बंद हो गए हैं। व्यापार करने के लिए भट्ठी तैयार करवाई है। लागत पर भी असर पड़ा है। कबाब पराठा 20 के स्थान पर 25, टिक्की 25 की जगह 30 रुपये में बेचनी पड़ रही है। शिव मिष्ठान भंडार के अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि कमर्शियल सिलिंडर नहीं है। एक तो वैसे भी पुल बन जाने के कारण दुकानदारी आधी हो गई है और अब एलपीजी की समस्या ने कमर तोड़ दी है। चाय बनाने के लिए इंडक्शन चूल्हा और टिक्की-खस्ता बनाने के लिए भट्ठी इस्तेमाल कर रहे हैं। कीमतों में वृद्धि नहीं की है।
माधौगंज में रामजी स्वीट्स एंड फास्ट फूड के मालिक प्रमोद कुमार ने बताया कि 10 दिनों से सिलिंडर न मिलने से काम मंदा हो गया है। सभी आइटम नहीं बना पा रहे इससे दुकानदारी नहीं चल रही है। दो से तीन दिन में सिलिंडर नहीं मिला तो दुकान बंद करनी पड़ेगी। गोपी मिष्ठान भंडार के मालिक ने बताया कि होली के कारण गैस सिलिंडर भराए थे। अब आवश्यकता है तो मिल नहीं रहे।
बेहंदर के कासिमपुर कस्बा स्थित यादव मिष्ठान भंडार के संचालक राजेश यादव ने बताया कि व्यावसायिक सिलिंडर न मिलने के कारण लकड़ी और कोयले की भट्ठी पर मिठाई आदि तैयार कराते हैं। 700 रुपये क्विंटल लकड़ी मिल रही है। प्रधान ढाबा संचालक टीटू ने बताया कि लकड़ी से ही खाना बनाया जा रहा है। लागत बढ़ने से प्रति थाली पांच रुपये बढ़ा दिए हैं।
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पिहानी में ब्लैक में मिल रहा व्यावसायिक सिलिंडर
पिहानी जामा मस्जिद चौराहे पर समोसा और चाय आदि की दुकान चलाने वाले अजीत के मुताबिक, सिलिंडर महंगे मिल रहे हैं। पहले कमर्शियल सिलिंडर दो हजार का था अब यही 2,600 रुपये का मिल रहा। फिलहाल गैस चूल्हा ही इस्तेमाल कर रहे हैं परंतु महंगे सिलिंडर के कारण समोसे का रेट पांच रुपये से बढ़ाकर आठ रुपये और ब्रेड पकौड़े का रेट सात से बढ़ाकर 10 रुपये करना पड़ा है। चाय के भी रेट बढ़ाने पड़ सकते हैं। (संवाद)
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पेश है कस्बा और नगरीय क्षेत्र के हालात पर एक रिपोर्ट :
मल्लावां में व्यावसायिक सिलिंडर करीब एक माह से न तो बुक हो रहा है और न ही मिल रहा है। सिलिंडर न मिलने पर मुख्य चौराहे के बाबा स्वीट हाउस के संचालक नीलेश गुप्ता ने बताया कि करीब एक माह से व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिला है। वह कोयले की भट्टी पर चाट, समोसा, मिठाई आदि बनवा रहे हैं। वैष्णवी मिष्ठान भंडार के संचालक अनूप यज्ञसैनी ने बताया कि उनके यहां प्रतिदिन एक सिलिंडर की खपत है, एक माह से व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिला। इससे 1,800 रुपये में मिलने वाला कोयला 2,200 रुपये, 500 रुपये में मिलने वाले लकड़ी के गुटके 800 रुपये में खरीदने पड़ रहे हैं। यही हाल जगदीश समोसा भंडार का भी है। इंडियन गैस सर्विस के संचालक अवधेश कटियार ने बताया कि व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति नहीं आ रही है इससे डिलीवरी नहीं दी जा पा रही।
कछौना में बालामऊ रेलवे स्टेशन के पास मिठाई की दुकान चलाने वाले सुशील कुमार ने बताया कि काफी दिनों से व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिला है। भट्ठी का सहारा लिया जा रहा है। कोयला 17 रुपये में था अब 22 रुपये प्रति किलोग्राम खरीदना पड़ रहा है।
संडीला नगर के श्याम स्वीट्स हाउस के संचालक श्याम जी जायसवाल ने बताया कि होली से पहले उनके पास छह कमर्शियल सिलिंडर थे। इससे काम चल रहा था, कुछ दिन से गैस की किल्लत हो गई है। अभ कमर्शियल सिलिंडर मिलना बंद हो गए हैं। व्यापार करने के लिए भट्ठी तैयार करवाई है। लागत पर भी असर पड़ा है। कबाब पराठा 20 के स्थान पर 25, टिक्की 25 की जगह 30 रुपये में बेचनी पड़ रही है। शिव मिष्ठान भंडार के अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि कमर्शियल सिलिंडर नहीं है। एक तो वैसे भी पुल बन जाने के कारण दुकानदारी आधी हो गई है और अब एलपीजी की समस्या ने कमर तोड़ दी है। चाय बनाने के लिए इंडक्शन चूल्हा और टिक्की-खस्ता बनाने के लिए भट्ठी इस्तेमाल कर रहे हैं। कीमतों में वृद्धि नहीं की है।
माधौगंज में रामजी स्वीट्स एंड फास्ट फूड के मालिक प्रमोद कुमार ने बताया कि 10 दिनों से सिलिंडर न मिलने से काम मंदा हो गया है। सभी आइटम नहीं बना पा रहे इससे दुकानदारी नहीं चल रही है। दो से तीन दिन में सिलिंडर नहीं मिला तो दुकान बंद करनी पड़ेगी। गोपी मिष्ठान भंडार के मालिक ने बताया कि होली के कारण गैस सिलिंडर भराए थे। अब आवश्यकता है तो मिल नहीं रहे।
बेहंदर के कासिमपुर कस्बा स्थित यादव मिष्ठान भंडार के संचालक राजेश यादव ने बताया कि व्यावसायिक सिलिंडर न मिलने के कारण लकड़ी और कोयले की भट्ठी पर मिठाई आदि तैयार कराते हैं। 700 रुपये क्विंटल लकड़ी मिल रही है। प्रधान ढाबा संचालक टीटू ने बताया कि लकड़ी से ही खाना बनाया जा रहा है। लागत बढ़ने से प्रति थाली पांच रुपये बढ़ा दिए हैं।
पिहानी में ब्लैक में मिल रहा व्यावसायिक सिलिंडर
पिहानी जामा मस्जिद चौराहे पर समोसा और चाय आदि की दुकान चलाने वाले अजीत के मुताबिक, सिलिंडर महंगे मिल रहे हैं। पहले कमर्शियल सिलिंडर दो हजार का था अब यही 2,600 रुपये का मिल रहा। फिलहाल गैस चूल्हा ही इस्तेमाल कर रहे हैं परंतु महंगे सिलिंडर के कारण समोसे का रेट पांच रुपये से बढ़ाकर आठ रुपये और ब्रेड पकौड़े का रेट सात से बढ़ाकर 10 रुपये करना पड़ा है। चाय के भी रेट बढ़ाने पड़ सकते हैं। (संवाद)

फोटो 23 : टड़ियावां में मिट्टी की भट्ठी पर लकड़ी से समोसा व मिर्चा बनाते दुकानदार प्रमोद। संवाद

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