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Hardoi News: गांव में श्वेत क्रांति की सूत्रधार बनीं रश्मि
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फोटो 20: डेयरी में मशीनों पर काम करतीं रश्मि यादव। संवाद
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पिहानी। महंगाई और घरेलू खर्चों के बीच जीवन को आसान बनाने के लिए क्षेत्र के अहेमी गांव की पढ़ी-लिखीं रश्मि यादव ने एक नई पहल की है। परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के लिए उन्होंने स्वामी गंगा दयाल स्वयं सहायता समूह का गठन कर दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में किस्मत आजमाने का फैसला लिया। उनका यह फैसला न केवल सही साबित हुआ बल्कि उनकी तकदीर भी बदलने वाला बना। डेयरी के जरिये एक रश्मि ही नहीं बल्कि गांव की कई महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता का रास्ता खुल गया।
आज इस समूह से जुड़ीं महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होकर दूसरों के लिए मिसाल बन रही हैं। रश्मि यादव ने समूह गठन के साथ ही इससे गांव की 10 महिलाओं को जोड़कर डेयरी संचालन शुरू किया। डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया। इससे डेयरी के लिए मशीनें, दूध की माप के लिए डिजिटल तराजू, फ्रीजर, सैंपलिंग मशीन सहित जरूरी सामग्री की खरीदारी की। पास से कुछ रकम मिलाकर उन्होंने गाय और भैंसें भी खरीदीं। साथ ही समूह की सदस्य महिलाओं को भी एक-एक भैंस और कुछ को गाय खरीदने के लिए आर्थिक सहयोग दिया।
रश्मि के मुताबिक करीब डेढ़ लाख रुपये से शुरू हुआ यह कारोबार अब धीरे-धीरे मजबूत होता जा रहा है और दूध का उत्पादन भी लगातार बढ़ रहा है। अब वह दूध के साथ दही, छाछ, पनीर और खोया आदि भी बना रही हैं। यह उत्पाद अहेमी के अलावा आसपास के गांव और कस्बे तक भी जाते हैं। इस डेयरी के जरिये जहां रश्मि स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, वहीं गांव की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। करीब 20,000 से 30,000 रुपये प्रतिमाह आमदनी कर रही हैं। अन्य महिलाएं भी भैंस और गाय का पालन कर दूध बेचकर 10,000 से 12,000 रुपये तक की मासिक आय अर्जित कर रही हैं।
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समूह से जुड़कर बदल गया जीवन का स्तर
आर्थिक जरूरतों के सामने उदास चेहरे लेकर खड़ी रहने वालीं ग्रामीण महिलाओं के चेहरों पर स्वामी गंगा दयाल स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद अब मुस्कान है। समूह की सदस्य महिलाओं प्रीति, सरोजनी, सुखदेई, कैलाशो, रीता, राधिका, रामश्री, अनीता और प्रेमा ने बताया कि पहले घरेलू जरूरतों को लेकर पति की मेहनत मजदूरी के बदले मिलने वाले नाकाफी मेहनताने पर निर्भर थीं लेकिन अब पशुपालन के साथ उन्हें दूध बिक्री से हर महीने अच्छी आय हो रही है। महिलाओं के अनुसार इससे वह आत्मनिर्भर बनने के साथ ही अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी पति का हाथ बंटवा रही हैं।
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आज इस समूह से जुड़ीं महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होकर दूसरों के लिए मिसाल बन रही हैं। रश्मि यादव ने समूह गठन के साथ ही इससे गांव की 10 महिलाओं को जोड़कर डेयरी संचालन शुरू किया। डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया। इससे डेयरी के लिए मशीनें, दूध की माप के लिए डिजिटल तराजू, फ्रीजर, सैंपलिंग मशीन सहित जरूरी सामग्री की खरीदारी की। पास से कुछ रकम मिलाकर उन्होंने गाय और भैंसें भी खरीदीं। साथ ही समूह की सदस्य महिलाओं को भी एक-एक भैंस और कुछ को गाय खरीदने के लिए आर्थिक सहयोग दिया।
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रश्मि के मुताबिक करीब डेढ़ लाख रुपये से शुरू हुआ यह कारोबार अब धीरे-धीरे मजबूत होता जा रहा है और दूध का उत्पादन भी लगातार बढ़ रहा है। अब वह दूध के साथ दही, छाछ, पनीर और खोया आदि भी बना रही हैं। यह उत्पाद अहेमी के अलावा आसपास के गांव और कस्बे तक भी जाते हैं। इस डेयरी के जरिये जहां रश्मि स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, वहीं गांव की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। करीब 20,000 से 30,000 रुपये प्रतिमाह आमदनी कर रही हैं। अन्य महिलाएं भी भैंस और गाय का पालन कर दूध बेचकर 10,000 से 12,000 रुपये तक की मासिक आय अर्जित कर रही हैं।
समूह से जुड़कर बदल गया जीवन का स्तर
आर्थिक जरूरतों के सामने उदास चेहरे लेकर खड़ी रहने वालीं ग्रामीण महिलाओं के चेहरों पर स्वामी गंगा दयाल स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद अब मुस्कान है। समूह की सदस्य महिलाओं प्रीति, सरोजनी, सुखदेई, कैलाशो, रीता, राधिका, रामश्री, अनीता और प्रेमा ने बताया कि पहले घरेलू जरूरतों को लेकर पति की मेहनत मजदूरी के बदले मिलने वाले नाकाफी मेहनताने पर निर्भर थीं लेकिन अब पशुपालन के साथ उन्हें दूध बिक्री से हर महीने अच्छी आय हो रही है। महिलाओं के अनुसार इससे वह आत्मनिर्भर बनने के साथ ही अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी पति का हाथ बंटवा रही हैं।

फोटो 20: डेयरी में मशीनों पर काम करतीं रश्मि यादव। संवाद

फोटो 20: डेयरी में मशीनों पर काम करतीं रश्मि यादव। संवाद
