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Hardoi News: एसएनसीयू में नहीं सीपैप मशीन, रेफर कर दिए जाते गंभीर नवजात
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फोटो- 08- एसएनसीयू में भर्ती नवजात बच्चे। संवाद
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला महिला अस्पताल में संचालित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में भले ही पहले से सुविधाएं बढ़ गई हैं लेकिन बेहतर इलाज के लिए अभिभावकों को हायर सेंटर ही भागना पड़ता है।
शिशुओं को जीवनदान देने वाली कंटीन्युअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (सीपैप) मशीन अभी तक नहीं आई है। इस कारण नवजातों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है, ऐसे में उनकी जान जोखिम में रहती है। हर महीने 60 से अधिक को रेफर किया जा रहा है जबकि 30 से अधिक नवजात हर महीने इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल में रोजाना करीब 25-30 प्रसव होते हैं। हर माह की बात करें तो इनमें से औसतन 50 से 60 नवजातों को सांस लेने में मदद के लिए एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया जाता है। एसएनसीयू में नवजातों के उपचार के लिए व्यवस्थाएं बेहतर बनाई गई हैं। 30 वार्मर बेडों के अलावा दो मोबाइल एक्यूबेटर भी हैं।
इसके बावजूद नवजातों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। इसके पीछे वजह यह है कि एसएनसीयू में अभी तक सीपैप मशीन नहीं आई है। आंकड़ों पर गौर करें तो एसएनएसीयू में भर्ती किए गए नवजातों में सितंबर से अक्तूबर तक 85 बच्चों की जान जा चुकी है। गंभीर बीमारी होने पर बच्चों की जान गई है लेकिन बड़ी वजह यह भी है कि सीपैप मशीन न होने से फौरन इलाज नहीं मिल सका। ऐसा नहीं है कि सीपैप मशीन के लगाए जाने के प्रति प्रयास नहीं किया गया। पिछले एक साल में कई बार पत्राचार कर शासन को अवगत कराया गया है।
आवश्यकता के बावजूद नहीं दिया जा रहा ध्यान
हरदोई। महिला अस्पताल के एसएनसीयू में सीपैप मशीन की बहुत आवश्यकता है। अक्तूबर से नवंबर के बीच अस्पताल में जन्मे और ओपीडी के माध्यम से आए 561 नवजात भर्ती किए गए हैं। इनमें से 210 बच्चों को समुचित इलाज न मिल पाने की वजह से हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। इनमें 85 बच्चों की मौत इलाज न मिल पाने की वजह से हुई है। अधिकांश बच्चों की मौत का कारण इंफेक्शन होना बताया गया है। पीडियाट्रिक डॉ. आशीष वर्मा ने बताया कि भर्ती बच्चों के लिए हर संभव उपचार करने का प्रयास किया जाता है लेकिन जिन बच्चों का इलाज नहीं हो पाता है उन्हें रेफर कर दिया जाता है। सीपैप मशीन की आवश्यकता है। इसके लिए लगातार प्रयास भी किया जा रहा है।
उपचार के अभाव में दम तोड़ रहे नवजात
हरदोई। टड़ियावां के जंसरी गांव निवासी बबलेश की पत्नी अर्चना को बच्चा हुआ था। वजन कम होने की वजह से उसको एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था। बच्चे को सीपैप मशीन की जरूरत थी। यहां न होने की वजह से रेफर किया गया लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिजन बच्चे को नहीं ले जा सके और बच्चे की मौत हो गई।
एसएनसीयू में सीपैप मशीन के लिए लगातार प्रयास हो रहा है। मशीन लगने के बाद स्टाफ को ट्रेनिंग भी दिलाई जाएगी। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सीपैप मशीन की कमी दूर हो जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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शिशुओं को जीवनदान देने वाली कंटीन्युअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (सीपैप) मशीन अभी तक नहीं आई है। इस कारण नवजातों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है, ऐसे में उनकी जान जोखिम में रहती है। हर महीने 60 से अधिक को रेफर किया जा रहा है जबकि 30 से अधिक नवजात हर महीने इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं।
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जिला महिला अस्पताल में रोजाना करीब 25-30 प्रसव होते हैं। हर माह की बात करें तो इनमें से औसतन 50 से 60 नवजातों को सांस लेने में मदद के लिए एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया जाता है। एसएनसीयू में नवजातों के उपचार के लिए व्यवस्थाएं बेहतर बनाई गई हैं। 30 वार्मर बेडों के अलावा दो मोबाइल एक्यूबेटर भी हैं।
इसके बावजूद नवजातों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। इसके पीछे वजह यह है कि एसएनसीयू में अभी तक सीपैप मशीन नहीं आई है। आंकड़ों पर गौर करें तो एसएनएसीयू में भर्ती किए गए नवजातों में सितंबर से अक्तूबर तक 85 बच्चों की जान जा चुकी है। गंभीर बीमारी होने पर बच्चों की जान गई है लेकिन बड़ी वजह यह भी है कि सीपैप मशीन न होने से फौरन इलाज नहीं मिल सका। ऐसा नहीं है कि सीपैप मशीन के लगाए जाने के प्रति प्रयास नहीं किया गया। पिछले एक साल में कई बार पत्राचार कर शासन को अवगत कराया गया है।
आवश्यकता के बावजूद नहीं दिया जा रहा ध्यान
हरदोई। महिला अस्पताल के एसएनसीयू में सीपैप मशीन की बहुत आवश्यकता है। अक्तूबर से नवंबर के बीच अस्पताल में जन्मे और ओपीडी के माध्यम से आए 561 नवजात भर्ती किए गए हैं। इनमें से 210 बच्चों को समुचित इलाज न मिल पाने की वजह से हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। इनमें 85 बच्चों की मौत इलाज न मिल पाने की वजह से हुई है। अधिकांश बच्चों की मौत का कारण इंफेक्शन होना बताया गया है। पीडियाट्रिक डॉ. आशीष वर्मा ने बताया कि भर्ती बच्चों के लिए हर संभव उपचार करने का प्रयास किया जाता है लेकिन जिन बच्चों का इलाज नहीं हो पाता है उन्हें रेफर कर दिया जाता है। सीपैप मशीन की आवश्यकता है। इसके लिए लगातार प्रयास भी किया जा रहा है।
उपचार के अभाव में दम तोड़ रहे नवजात
हरदोई। टड़ियावां के जंसरी गांव निवासी बबलेश की पत्नी अर्चना को बच्चा हुआ था। वजन कम होने की वजह से उसको एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था। बच्चे को सीपैप मशीन की जरूरत थी। यहां न होने की वजह से रेफर किया गया लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिजन बच्चे को नहीं ले जा सके और बच्चे की मौत हो गई।
एसएनसीयू में सीपैप मशीन के लिए लगातार प्रयास हो रहा है। मशीन लगने के बाद स्टाफ को ट्रेनिंग भी दिलाई जाएगी। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सीपैप मशीन की कमी दूर हो जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज