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Hardoi News: यूनाइटेड अगेंस्ट मलेरिया पर मंथन, विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
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फोटो- 13- सेमिनार में मौजूद प्राचार्य डॉ. जेबी गोगोई साथ में अन्य चिकित्सक। स्रोत: महाविद्यालय
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की तरफ से यूनाइटेड अगेंस्ट मलेरिया विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में चिकित्सा विशेषज्ञों ने मलेरिया उन्मूलन के लिए त्वरित निदान और नई वैक्सीन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। चिकित्सकों ने जनभागीदारी से मलेरिया उन्मूलन पर जोर दिया।
सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम की तरफ से आयोजित गोष्ठी का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. जेबी गोगोई ने किया। प्राचार्य ने कहा कि मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारी पर लगाम लगाने के लिए समय पर पहचान और प्रभावी उपचार अनिवार्य है। जब तक स्वास्थ्यकर्मी और आम जनता एक साथ नहीं आएंगे तब तक रोग का उन्मूलन करना कठिन है। विशिष्ट अतिथि आईएमए अध्यक्ष डॉ. अरुण मौर्य ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन चिकित्सकों के ज्ञानवर्धन और बेहतर रोग प्रबंधन के लिए उपयोगी हैं। केजीएमयू के डॉ. राजकुमार कल्याण ने बताया कि नई डायग्नोस्टिक तकनीकों के जरिये बीमारी की प्रारंभिक पहचान से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
लोहिया संस्थान के डॉ. मनोदीप सेन ने मलेरिया की नई वैक्सीन पर प्रकाश डाला। विभागाध्यक्ष डॉ. अदिति गर्ग ने कहा कि मलेरिया नियंत्रण के लिए केवल दवा ही नहीं बल्कि रोगियों की प्रभावी ट्रैकिंग और पूर्ण उपचार आवश्यक है। संचालन डॉ. कृति मौर्या ने किया। इस मौके पर डॉ. दीपक चोपड़ा, डॉ. सौरभ पांडेय और डॉ. लवलीना ने विचार व्यक्त किया।
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सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम की तरफ से आयोजित गोष्ठी का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. जेबी गोगोई ने किया। प्राचार्य ने कहा कि मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारी पर लगाम लगाने के लिए समय पर पहचान और प्रभावी उपचार अनिवार्य है। जब तक स्वास्थ्यकर्मी और आम जनता एक साथ नहीं आएंगे तब तक रोग का उन्मूलन करना कठिन है। विशिष्ट अतिथि आईएमए अध्यक्ष डॉ. अरुण मौर्य ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन चिकित्सकों के ज्ञानवर्धन और बेहतर रोग प्रबंधन के लिए उपयोगी हैं। केजीएमयू के डॉ. राजकुमार कल्याण ने बताया कि नई डायग्नोस्टिक तकनीकों के जरिये बीमारी की प्रारंभिक पहचान से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
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लोहिया संस्थान के डॉ. मनोदीप सेन ने मलेरिया की नई वैक्सीन पर प्रकाश डाला। विभागाध्यक्ष डॉ. अदिति गर्ग ने कहा कि मलेरिया नियंत्रण के लिए केवल दवा ही नहीं बल्कि रोगियों की प्रभावी ट्रैकिंग और पूर्ण उपचार आवश्यक है। संचालन डॉ. कृति मौर्या ने किया। इस मौके पर डॉ. दीपक चोपड़ा, डॉ. सौरभ पांडेय और डॉ. लवलीना ने विचार व्यक्त किया।
