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Potato: रूस की लैब में खरा उतरा 3797 और सूर्या आलू, चिप्सोना फेल, हाथरस को मिला चार लाख पैकेट का आर्डर

अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 12 Jan 2026 04:38 AM IST
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सार

पिछले साल यूपी से 3797, सूर्या और चिप्सोना आलू को सैंपल के तौर पर रूस भेजा गया था। हाथरस से 3797 के 10 हजार पैकेट सैंपल के भेजे गए थे। इनमें 3797 और सूर्या के सैंपल रूस की अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता, स्वाद, संरचना व भंडारण आदि मानकों पर खरे उतरे हैं।

3797 and Surya potatoes passed the test in Russian lab, Chipsona failed
आलू के ढेर से छटाई करते मजदूर - फोटो : संवाद
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विस्तार
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लाजवाब स्वाद की पहचान बनाए 3797 और सूर्या किस्म का आलू रूस की अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशाला में पास हो गया है और उसने बिना किसी शर्त के इसके आयात को मंजूरी दे दी है। चिप्सोना का सैंपल फेल हो गया है। एपिडा के चेयरमैन अभिषेक देव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि अब देश से बड़े पैमाने पर आलू का निर्यात संभव हो गया है।

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हाथरस ही नहीं, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, मथुरा, एटा, कन्नौज, फर्रूखाबाद, कानपुर जिलों के आलू किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा। हाथरस को 3797 वैरायटी का चार लाख पैकेट का आर्डर मिला है। जिले के सादाबाद क्षेत्र से आगामी अप्रैल में पहली खेप जाएगी और सितंबर तक निर्यात होता रहेगा।
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पिछले साल यूपी से 3797, सूर्या और चिप्सोना आलू को सैंपल के तौर पर रूस भेजा गया था। हाथरस से 3797 के 10 हजार पैकेट सैंपल के भेजे गए थे। इनमें 3797 और सूर्या के सैंपल रूस की अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता, स्वाद, संरचना व भंडारण आदि मानकों पर खरे उतरे हैं।

रूस को आलू निर्यात करने की यह शुरुआत सिर्फ एक व्यापारिक सौदा नहीं है, बल्कि किसानों के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।-देवेंद्र सिंह, आलू किसान।

सादाबाद का आलू यदि लगातार निर्यात चेन में शामिल रहा तो आने वाले समय में यह क्षेत्र विश्व मानचित्र पर अपनी नई पहचान बनाने की ओर बढ़ सकता है।-गंभीर सिंह, आलू किसान।
रूस की यह मंजूरी किसानों को बड़ी राहत देगी। उन्हें बेहतर दाम दिलाने के साथ-साथ मंडी व व्यापारियों के एकाधिकार को भी कमजोर करेगी। यह किसानों की जीत है।-राजेश चौधरी, आलू किसान।
हाथरस से आलू का बड़ा निर्यात शुरू कराने का प्रयास लगातार जारी है। वर्ष 2019 से इसमें काम हो रहा है। रूस से शुरुआत हो रही है। दूसरे देशों में भी इसका प्रयास जारी है। किसानों को आलू की गुणवत्ता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।-सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।

हाथरस से 2019 में शुरू हुआ था निर्यात

हाथरस से पहली बार वर्ष 2019 में पहली बार 3797 आलू 25 हजार मीट्रिक टन आलू ईरान भेजा गया था। उस दौरान आलू की कीमतें 2100 रुपये प्रति पैकेट तक पहुंच गई थी। इस समय यूपी से ईरान, बहरीन, अरब अमीरात, जर्मनी, न्यूजीलैंड, अमीरात, जर्मनी, न्यूजीलैंड और नेपाल आलू भेजा जा रहा है। अलीगढ़ से भी आलू तेहरान, बहरीन, अमेरिका और गुयाना भेजा जा रहा है।

मंडी-व्यापारी दबाव से राहत
किसानों ने बताया कि मौजूदा समय में मंडियों में आलू की आवक बहुत ज्यादा है, इसके सापेक्ष खरीद सीमित होने से उन्हें औने-पौने दामों पर फसल बेचनी पड़ रही है। जो किसान फसल नहीं बेच रहे हैं, वे कोल्ड स्टोर का सहारा ले रहे हैं, जहां किराया और ब्याज दर उन्हें परेशान कर रही है। निर्यात शुरू होने से यह दबाव कम होगा।

निर्यात के लाभ

  • भाव में सुधार होने से किसानों को लाभ
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार तक किसानों की पहुंच
  • शीतगृहों में भंडारण का दबाव घटेगा


इस वजह से पास हुआ आलू

  • बेहतर स्वाद, भंडारण योग्य
  • रूस के घरेलू उपयोग के अनुकूल
  • अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर सफल

हाथरस में आलू

  • जिले में आलू का रकबा- 52 हेक्टेयर
  • 3797 आलू का रकबा- 42 हेक्टेयर
  • जिले में कोल्ड स्टोरेज-150
  • भंडारण क्षमता-18 लाख मीट्रिक टन

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें
  • 3797 आलू -100-125 रुपये प्रति किलो।
  • सूर्या आलू - 85-125 रुपये प्रति किलो।
  • सेंटाना आलू -125-150 रुपये प्रति किलो।
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