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Hathras News: विस चुनाव से पहले भाजपा ने खेला सोशल इंजीनियरिंग का दांव
Thu, 20 Aug 2026 02:19 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 20 Aug 2026 02:19 AM IST
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भाजपा के नए पदाधिकारियों का स्वागत करते पदाधिकारी। संवाद
- फोटो : Samvad
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भाजपा की ओर से जिले की कार्यकारिणी की अधिकृत सूची जारी कर दी गई है। ब्रज क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जिले की तीन विधानसभा सीटों और 15 मंडलों के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए यह सूची तैयार की गई है। जिला संगठन में केवल जातिगत ही नहीं, बल्कि भूगोल का भी पूरा संतुलन साधा गया है। 234 शक्ति केंद्रों और 15 मंडलों वाले जिले की तीनों प्रमुख विधानसभाओं का प्रतिनिधित्व दिया गया है।
जारी की गई 35 पदों की इस सूची में पदाधिकारियों के नाम, शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ स्पष्ट रूप से जाति का उल्लेख भी किया गया है। आगामी विधानसभा चुनावों के दृष्टिकोण से भाजपा ने जिला संगठन में जातिगत सोशल इंजीनियरिंग का ऐसा ताना-बाना बुना है, जिससे सर्वसमाज (सवर्ण, पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति) को साधे रखा जा सके।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा ने इस विस्तृत जातिगत और क्षेत्रीय बंटवारे के जरिये अपने पारंपरिक मतदाताओं को सहेजने के साथ-साथ ओबीसी और दलित वर्गों में नए समीकरण बनाने का प्रयास किया है। आगामी विधानसभा चुनाव में विपक्षी ध्रुवीकरण का मुकाबला करने के लिए पार्टी ने जिला स्तर पर हर समाज के प्रतिनिधि को सम्मान देकर सोशल इंजीनियरिंग का मजबूत किला तैयार किया है। संवाद
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क्षत्रिय, वैश्य और ब्राह्मणों को बड़ा प्रतिनिधित्व
भाजपा ने कोर वोट बैंक और उच्च जातियों को पूरी तवज्जो दी है। जिले में क्षत्रिय समाज की राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए 10 पदों पर इस समाज के प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी गई है। शहरी और व्यापारिक क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाले वैश्य व जैन समाज से छह चेहरों को जोड़ा गया है। प्रबुद्ध वर्ग को साधने के लिए चार ब्राह्मण चेहरों को कार्यकारिणी में स्थान दिया गया है। कायस्थ समाज को भी तीन पद दिए गए हैं।
जिलाध्यक्ष के सहारे पिछड़ा वर्ग की गोलबंदी
पार्टी ने जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी प्रेम सिंह कुशवाहा को सौंपकर जिले के गैर यादव ओबीसी वोटबैंक में अपनी पकड़ को और मजबूत किया है।कुशवाहा समाज से जिलाध्यक्ष के अलावा पदों पर जिम्मेदारी देकर युवाओं को जोड़ा गया है। पिछड़ा वर्ग के अन्य घटकों में बघेल समाज, लोधी समाज और स्वर्णकार समाज को टीम में स्थान देकर ओबीसी मतदाताओं को गोलबंद करने का प्रयास किया गया है।
अनुसूचित जाति व किसान बेल्ट में पैठ की कोशिश
सादाबाद और आसपास के क्षेत्रों में जाट व अनुसूचित जाति के मतदाताओं के प्रभाव को देखते हुए रणनीतिक संतुलन बनाया गया है। जाट समाज से दो युवाओं दायित्व दिया गया है, जबकि अनुसूचित जाति में पैठ बढ़ाने के लिए इस वर्ग से तीन लोगों को पार्टी में पद दिए गए हैं।
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जारी की गई 35 पदों की इस सूची में पदाधिकारियों के नाम, शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ स्पष्ट रूप से जाति का उल्लेख भी किया गया है। आगामी विधानसभा चुनावों के दृष्टिकोण से भाजपा ने जिला संगठन में जातिगत सोशल इंजीनियरिंग का ऐसा ताना-बाना बुना है, जिससे सर्वसमाज (सवर्ण, पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति) को साधे रखा जा सके।
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राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा ने इस विस्तृत जातिगत और क्षेत्रीय बंटवारे के जरिये अपने पारंपरिक मतदाताओं को सहेजने के साथ-साथ ओबीसी और दलित वर्गों में नए समीकरण बनाने का प्रयास किया है। आगामी विधानसभा चुनाव में विपक्षी ध्रुवीकरण का मुकाबला करने के लिए पार्टी ने जिला स्तर पर हर समाज के प्रतिनिधि को सम्मान देकर सोशल इंजीनियरिंग का मजबूत किला तैयार किया है। संवाद
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क्षत्रिय, वैश्य और ब्राह्मणों को बड़ा प्रतिनिधित्व
भाजपा ने कोर वोट बैंक और उच्च जातियों को पूरी तवज्जो दी है। जिले में क्षत्रिय समाज की राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए 10 पदों पर इस समाज के प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी गई है। शहरी और व्यापारिक क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाले वैश्य व जैन समाज से छह चेहरों को जोड़ा गया है। प्रबुद्ध वर्ग को साधने के लिए चार ब्राह्मण चेहरों को कार्यकारिणी में स्थान दिया गया है। कायस्थ समाज को भी तीन पद दिए गए हैं।
जिलाध्यक्ष के सहारे पिछड़ा वर्ग की गोलबंदी
पार्टी ने जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी प्रेम सिंह कुशवाहा को सौंपकर जिले के गैर यादव ओबीसी वोटबैंक में अपनी पकड़ को और मजबूत किया है।कुशवाहा समाज से जिलाध्यक्ष के अलावा पदों पर जिम्मेदारी देकर युवाओं को जोड़ा गया है। पिछड़ा वर्ग के अन्य घटकों में बघेल समाज, लोधी समाज और स्वर्णकार समाज को टीम में स्थान देकर ओबीसी मतदाताओं को गोलबंद करने का प्रयास किया गया है।
अनुसूचित जाति व किसान बेल्ट में पैठ की कोशिश
सादाबाद और आसपास के क्षेत्रों में जाट व अनुसूचित जाति के मतदाताओं के प्रभाव को देखते हुए रणनीतिक संतुलन बनाया गया है। जाट समाज से दो युवाओं दायित्व दिया गया है, जबकि अनुसूचित जाति में पैठ बढ़ाने के लिए इस वर्ग से तीन लोगों को पार्टी में पद दिए गए हैं।