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Hathras News: हाथरस से बाहर भूसा ले जाने पर लगी रोक
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 02 Apr 2026 01:34 AM IST
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भूसे के संकट पर प्रकाशित खबर।
- फोटो : Archive
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जिले में निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी ने अब जिले की सीमा से बाहर भूसे के परिवहन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय आगामी वित्तीय वर्ष में गोशालाओं में चारे के पर्याप्त भंडारण की जरूरत को देखते हुए लिया गया है।
जिलाधिकारी अतुल वत्स ने बताया कि अप्रैल माह में गेहूं की फसल की कटाई शुरू हो रही है। गोवंश के लिए भूसा आहार का मुख्य हिस्सा है। अक्सर देखा जाता है कि व्यावसायिक लाभ के लिए भूसे को अन्य जनपदों या राज्यों में भेज दिया जाता है, जिससे स्थानीय स्तर पर चारे की कमी हो जाती है और कीमतें बढ़ जाती हैं।
शासन के निर्देशों का हवाला देते हुए डीएम ने स्पष्ट किया कि गौ आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश के लिए भूसे का टेंडर और भंडारण प्रक्रिया समय पर पूरी करना आवश्यक है, ताकि पशुओं को आहार की समस्या न हो। जिले के सभी थाना प्रभारियों और खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में भूसे के अवैध परिवहन पर कड़ी नजर रखें।
विशेष रूप से उन विकास खंडों में अधिक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, जो पड़ोसी जनपदों की सीमाओं से सटे हुए हैं। डीएम ने जिला कृषि अधिकारी और अपर मुख्य अधिकारी, सभी खंड विकास अधिकारी, सभी अधिशासी अधिकारी (नगर पालिका/नगर पंचायत) को निर्देश जारी किए है। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से न केवल गोशालाओं के लिए पर्याप्त भूसा उपलब्ध होगा, बल्कि जिले के किसानों और पशुपालकों को भी चारे की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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जिलाधिकारी अतुल वत्स ने बताया कि अप्रैल माह में गेहूं की फसल की कटाई शुरू हो रही है। गोवंश के लिए भूसा आहार का मुख्य हिस्सा है। अक्सर देखा जाता है कि व्यावसायिक लाभ के लिए भूसे को अन्य जनपदों या राज्यों में भेज दिया जाता है, जिससे स्थानीय स्तर पर चारे की कमी हो जाती है और कीमतें बढ़ जाती हैं।
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शासन के निर्देशों का हवाला देते हुए डीएम ने स्पष्ट किया कि गौ आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश के लिए भूसे का टेंडर और भंडारण प्रक्रिया समय पर पूरी करना आवश्यक है, ताकि पशुओं को आहार की समस्या न हो। जिले के सभी थाना प्रभारियों और खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में भूसे के अवैध परिवहन पर कड़ी नजर रखें।
विशेष रूप से उन विकास खंडों में अधिक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, जो पड़ोसी जनपदों की सीमाओं से सटे हुए हैं। डीएम ने जिला कृषि अधिकारी और अपर मुख्य अधिकारी, सभी खंड विकास अधिकारी, सभी अधिशासी अधिकारी (नगर पालिका/नगर पंचायत) को निर्देश जारी किए है। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से न केवल गोशालाओं के लिए पर्याप्त भूसा उपलब्ध होगा, बल्कि जिले के किसानों और पशुपालकों को भी चारे की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा।