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Hathras News: जाटलैंड सादाबाद से विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंकेगी बसपा

Sun, 09 Aug 2026 02:20 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Sun, 09 Aug 2026 02:20 AM IST
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BSP to sound the bugle for the Assembly elections from the Jatland of Sadabad.
आकाश आनंद, बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर। स्रोत : आर्काइव - फोटो : Archive
प्रशांत भारती
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हाथरस। बहुजन समाज पार्टी ने प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से तेज कर दी हैं। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने चुनावी शंखनाद के लिए जाटलैंड के नाम से मशहूर जिले की सादाबाद विधानसभा सीट को चुना है। 10 अगस्त को बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद सादाबाद में जनसभा कर पार्टी के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत करेंगे।
इस रैली में डाॅ.अविन शर्मा को सादाबाद विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी (घोषित उम्मीदवार) बनाए जाने का ऐलान होने की संभावना है। बसपा की परिपाटी रही है कि वह चयनित प्रत्याशी को पहले विधानसभा प्रभारी बनाती है।
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सादाबाद विधानसभा क्षेत्र राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। वर्ष 2017 के चुनाव में जब प्रदेश में भाजपा की लहर थी, तब बसपा के कद्दावर ब्राह्मण चेहरा रहे रामवीर उपाध्याय ने यहां से 91,365 वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की थी। बसपा एक बार फिर उसी सोशल इंजीनियरिंग (ब्राह्मण-दलित गठजोड़) के सहारे जाटलैंड में सेंधमारी करने की फिराक में है। इसी रणनीति के तहत दूसरी बार युवा ब्राह्मण चेहरे के रूप में डाॅ.अविन शर्मा को कमान सौंपी जा रही है, ताकि 2017 की जीत की पुनरावृत्ति की जा सके। संवाद
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आकाश के कंधों पर युवाओं को जोड़ने का जिम्मा
बसपा सुप्रीमो ने अपने भतीजे और पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद को अब पूरी तरह से फ्रंटफुट पर उतारा है। सादाबाद से प्रचार अभियान शुरू करने के पीछे पार्टी की मुख्य रणनीति युवा पीढ़ी को बसपा से जोड़ना है। बसपा की योजना है कि जिलों में प्रत्याशियों की घोषणा के साथ-साथ आकाश आनंद की ताबड़तोड़ जनसभाएं कराई जाएं, जिससे पूरे प्रदेश के काडर में नई ऊर्जा का संचार हो सके और चुनाव से पहले माहौल तैयार किया जा सके।

क्या कहते हैं सादाबाद के सियासी समीकरण?
सादाबाद विधानसभा क्षेत्र में जाट, ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाताओं का खासा प्रभाव है। यह सीट हर चुनाव में अपना मिजाज बदलती रही है। पिछले तीन चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि सादाबाद सीट पर हर बार जनता ने अलग पार्टी (2012 में सपा, 2017 में बसपा, 2022 में रालोद) को मौका दिया है। अब बसपा की रणनीति अपने कोर वोटबैंक के साथ ब्राह्मण मतदाताओं को लामबंद कर इस स्विंग सीट पर दोबारा कब्जा जमाने पर है।

पिछले तीन चुनावों के समीकरण पर नजर
2022 का चुनाव : पिछले विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल के प्रदीप कुमार सिंह (गुड्डू चौधरी) ने जीत दर्ज की थी। वहीं, बसपा छोड़कर भाजपा में गए रामवीर उपाध्याय दूसरे स्थान पर रहे थे।

2017 का चुनाव : बसपा के रामवीर उपाध्याय ने रालोद के डॉ. अनिल चौधरी को शिकस्त दी थी।
2012 का चुनाव : समाजवादी पार्टी के देवेंद्र अग्रवाल ने बसपा के सत्येंद्र शर्मा को हराकर यह सीट जीती थी।

10 अगस्त को होने वाले चुनावी शंखनाद और आकाश आनंद की जनसभा के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर समर्थकों को इस रैली के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। सादाबाद से उठने वाली यह सियासी गूंज पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों को साधने का काम करेगी।
-राजकपूर, बसपा जिलाध्यक्ष।
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