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Hathras News: दो कॉलेजों तक ही सिमटी मंडल स्तरीय जिम्नास्टिक प्रतियोगिता
Tue, 28 Jul 2026 01:35 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 28 Jul 2026 01:35 AM IST
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सेठ हरचरनदास कन्या इंटर कॉलेज में जिम्नास्टिक्प्र तियोगिता में प्रतिभाग करती छात्रा। स्रोत : व
- फोटो : School
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माध्यमिक शिक्षा विभाग की विद्यालयीय वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिताओं के तहत सोमवार को शहर के हरचरनदास कन्या इंटर कॉलेज में मंडल स्तरीय जिम्नास्टिक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। मंडल के चार जिलों में से केवल हाथरस के दो विद्यालयों के खिलाड़ी ही इसमें पहुंचे।
एटा, अलीगढ़ और कासगंज से एक भी प्रतिभागी नहीं आने के कारण बिना किसी प्रतिस्पर्धा के ही सभी खिलाड़ियों को विजयी घोषित कर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित कर लिया गया। प्रतियोगिता में हरचरनदास कन्या इंटर कॉलेज की सात छात्राओं और पीबीएएस इंटर कॉलेज के दो छात्रों ने ही भाग लिया।
अन्य जिलों के खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के कारण किसी भी स्पर्धा में मुकाबला नहीं हो सका। ऐसे में सभी प्रतिभागियों को विजेता घोषित करते हुए राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर दिया गया। माना जा रहा है कि जिम्नास्टिक जैसे तकनीकी खेल के प्रति विद्यालयों में रुचि लगातार घट रही है।
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इसका सबसे बड़ा कारण अधिकांश स्कूलों और कॉलेजों में आवश्यक उपकरणों तथा प्रशिक्षकों का अभाव है। ऐसे में छात्र-छात्राएं चाहकर भी इस खेल में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शासन की मंशा अधिक से अधिक विद्यार्थियों को खेलों से जोड़ने की है, लेकिन जिम्नास्टिक जैसे खेलों के लिए आधारभूत सुविधाओं की कमी चुनौती बनी हुई है।
स्कूल-कॉलेजों में नहीं हैं पर्याप्त संसाधन
शासन के निर्देश हैं कि प्रत्येक माध्यमिक विद्यालय कम से कम दो खेलों में विद्यार्थियों को दक्ष बनाएं, लेकिन जिम्नास्टिक जैसे तकनीकी खेल के लिए अधिकांश विद्यालयों के पास न तो आवश्यक उपकरण हैं और न ही प्रशिक्षित कोच। खेल विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में आगरा, झांसी और प्रयागराज के प्रमुख खेल स्टेडियमों में ही जिम्नास्टिक के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में अधिकांश जिलों के खिलाड़ी इस खेल से जुड़ ही नहीं पाते।
जिम्नास्टिक के लिए इन उपकरणों की जरूरत
जिम्नास्टिक का अभ्यास सामान्य मैदान में संभव नहीं होता। इसके लिए विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है। इनमें फ्लोर मैट, बैलेंस बीम, वॉल्टिंग टेबल, अनईवन बार, पैरेलल बार, हॉरिजॉन्टल बार, पोमेल हॉर्स, रिंग्स, सेफ्टी मैट, स्प्रिंग बोर्ड तथा लैंडिंग मैट प्रमुख हैं। इनकी कीमत लाखों में होती है। अधिकांश स्कूल और कॉलेज इन्हें उपलब्ध नहीं करा पाते, जिससे जिम्नास्टिक जैसी प्रतिभाएं शुरुआती स्तर पर ही आगे नहीं बढ़ पातीं।
प्रतियोगिता में अन्य जिलों से प्रतिभागियों का न पहुंचना चिंताजनक है। स्कूल-कॉलेजों में खेलों के संसाधन बढ़ाए जाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। कई कॉलेजों में संसाधन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। आगे भी संसाधन मुहैया कराए जा रहे हैं।
-संतप्रकाश, डीआईओएस, हाथरस।
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एटा, अलीगढ़ और कासगंज से एक भी प्रतिभागी नहीं आने के कारण बिना किसी प्रतिस्पर्धा के ही सभी खिलाड़ियों को विजयी घोषित कर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित कर लिया गया। प्रतियोगिता में हरचरनदास कन्या इंटर कॉलेज की सात छात्राओं और पीबीएएस इंटर कॉलेज के दो छात्रों ने ही भाग लिया।
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अन्य जिलों के खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के कारण किसी भी स्पर्धा में मुकाबला नहीं हो सका। ऐसे में सभी प्रतिभागियों को विजेता घोषित करते हुए राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर दिया गया। माना जा रहा है कि जिम्नास्टिक जैसे तकनीकी खेल के प्रति विद्यालयों में रुचि लगातार घट रही है।
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इसका सबसे बड़ा कारण अधिकांश स्कूलों और कॉलेजों में आवश्यक उपकरणों तथा प्रशिक्षकों का अभाव है। ऐसे में छात्र-छात्राएं चाहकर भी इस खेल में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शासन की मंशा अधिक से अधिक विद्यार्थियों को खेलों से जोड़ने की है, लेकिन जिम्नास्टिक जैसे खेलों के लिए आधारभूत सुविधाओं की कमी चुनौती बनी हुई है।
स्कूल-कॉलेजों में नहीं हैं पर्याप्त संसाधन
शासन के निर्देश हैं कि प्रत्येक माध्यमिक विद्यालय कम से कम दो खेलों में विद्यार्थियों को दक्ष बनाएं, लेकिन जिम्नास्टिक जैसे तकनीकी खेल के लिए अधिकांश विद्यालयों के पास न तो आवश्यक उपकरण हैं और न ही प्रशिक्षित कोच। खेल विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में आगरा, झांसी और प्रयागराज के प्रमुख खेल स्टेडियमों में ही जिम्नास्टिक के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में अधिकांश जिलों के खिलाड़ी इस खेल से जुड़ ही नहीं पाते।
जिम्नास्टिक के लिए इन उपकरणों की जरूरत
जिम्नास्टिक का अभ्यास सामान्य मैदान में संभव नहीं होता। इसके लिए विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है। इनमें फ्लोर मैट, बैलेंस बीम, वॉल्टिंग टेबल, अनईवन बार, पैरेलल बार, हॉरिजॉन्टल बार, पोमेल हॉर्स, रिंग्स, सेफ्टी मैट, स्प्रिंग बोर्ड तथा लैंडिंग मैट प्रमुख हैं। इनकी कीमत लाखों में होती है। अधिकांश स्कूल और कॉलेज इन्हें उपलब्ध नहीं करा पाते, जिससे जिम्नास्टिक जैसी प्रतिभाएं शुरुआती स्तर पर ही आगे नहीं बढ़ पातीं।
प्रतियोगिता में अन्य जिलों से प्रतिभागियों का न पहुंचना चिंताजनक है। स्कूल-कॉलेजों में खेलों के संसाधन बढ़ाए जाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। कई कॉलेजों में संसाधन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। आगे भी संसाधन मुहैया कराए जा रहे हैं।
-संतप्रकाश, डीआईओएस, हाथरस।