घर से 27 किमी पहले: जगन्नाथ पुरी के दर्शन कर गांव लौट रहे थे श्रद्धालु, सड़क दुर्घटना में पांच की मौत
1600 किलोमीटर लंबी यात्रा पूरी कर लौट रहे गांव के श्रद्धालुओं के साथ घर से महज 27 किलोमीटर पहले भीषण हादसा हो गया। इस सड़क दुर्घटना में पांच श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई।
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भक्ति और श्रद्धा के साथ गांव धाधऊ से शुरू हुई तीर्थ यात्रा का अंत इतना दर्दनाक होगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। जबलपुर स्थित आश्रम से दर्शन कर जगन्नाथ पुरी ओडिशा तक की 1600 किलोमीटर लंबी यात्रा पूरी कर लौट रहे गांव के श्रद्धालुओं के साथ घर से महज 27 किलोमीटर पहले भीषण हादसा हो गया। इस सड़क दुर्घटना में पांच श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
प्राचीन हनुमान मंदिर व पवित्र गुफा से शुरू की थी यात्रा
गांव धाधऊ में एक प्राचीन हनुमान मंदिर है, यहीं पर पवित्र गुफा भी है, जहां गुरु भगवतानंद दास की गद्दी है। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद दो साल से उनके शिष्य महंत फिन्टरदास गद्दी पर बैठे हैं। गांव धाधऊ के साथ गांव नगला मनी व आसपास के गांवों के लोगों में इस गुफा के प्रति अटूट श्रद्धा है। मूल रूप से जबलपुर मध्य प्रदेश के रहने वाले महंत फिन्टरदास को वहां हो रही श्रीमद्भागवत कथा का निमंत्रण आया था। जब इसकी जानकारी महंत से जुड़े श्रद्धालुओं को हुई थी तो उन्होंने भी साथ जाने की इच्छा जताई। श्रद्धालुओं ने जबलपुर और वहां से जगन्नाथ पुरी जाने की योजना बनाई। 20 जनवरी की सुबह गांव धाधऊ के सात व नगला मनी के एक व्यक्ति ने महंत के साथ यात्रा शुरू की थी।
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स्वागत की तैयारियों के बीच पहुंची मौत की खबर
गुरुजी के प्रति अटूट श्रद्धा रखने वाले ग्रामीण उनके साथ जबलपुर आश्रम गए थे। वहां से जगन्नाथ पुरी और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन करते हुए वापस लौट रहे थे। गांव में परिजन उनके आने का इंतजार कर रहे थे। ग्रामीणों के अनुसार उनके स्वागत की तैयारियां कर रखी थीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। गंतव्य से मात्र आधे घंटे की दूरी पर उनके वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गए।
घंटों बाद परिजनों को मिली जानकारी
गांव में केवल सड़क हादसे की जानकारी दी गई थी। देर शाम तक अधिकतर लोगों को नहीं पता था कि एक साथ पांच लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे की जानकारी पर कुछ लोग आगरा निकल गए। उन परिवारों की महिलाएं ज्यादा चिंतित थीं, जिनके परिजन यात्रा पर गए थे, लेकिन उन्हें भी मौत की जानकारी नहीं दी गई थी। पूरे गांव में खामोशी छायी रही। हर गली में सन्नाटा था। गांव के मोड़ पर खड़े कुछ लोग हादसे की चर्चा करते दिखे। सभी इस दुखद हादसे से परेशान थे।
किसी का उजड़ा सुहाग तो कोई हुआ अनाथ
तीर्थ यात्रा से लौट रहे श्रद्धालुओं के साथ हुए सड़क हादसे ने पांच परिवारों को कभी न भरने वाले जख्म दिए हैं। इस भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले पांचों बुजुर्ग अपने परिवारों के मुख्य कर्ताधर्ता थे। उनके निधन की खबर मिलते ही गांव में चूल्हे नहीं जले। परिवारों में चीत्कार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पड़ोसी व रिश्तेदार उन्हें संभालते नजर आए।
बुजुर्गों के साथ चली गई घर की रौनक
सड़क हादसे में जान गंवाने वाले पांचों लोग अपने परिवार के मार्गदर्शक और प्रमुख थे। ये सभी बुजुर्ग खेती-किसानी के गुर से अपने घर का भरण-पोषण कर रहे थे। अब इन परिवारों के सामने न केवल भावनात्मक बल्कि आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। किसी ने अपना पिता खोया है तो किसी का सुहाग हमेशा के लिए उजड़ गया।
बेटे के सिर पर सेहरा नहीं देख सके लखमीचंद्र
हादसे में मृत पंडित लखमीचंद्र (70) के परिवार में पत्नी, दो बेटे व एक बेटी है। एक बेटे व एक बेटी की शादी हो चुकी है। परिजनों ने बताया कि छोटे बेटे की शादी के लिए लड़की देख रहे थे, इसलिए सभी परिजन बेसब्री से उनके लौटने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही हादसे की जानकारी मिली तो परिवार में रोना-बिलखना शुरू हो गया। पिता लखमीचंद्र द्वारा छोटे बेटे के सिर पर सेहरा न देख पाने का गम परिवार को खाए जा रहा है।
पौत्री के बाद दादा की मौत से मातम
रनवीर सिंह (75) की पौत्री राधिका (14) पुत्री प्रताप सिंह की बीमारी के चलते तीन जनवरी को मृत्यु हो गई थी। राधिका अपने दादा की लाडली थी। पौत्री की मौत से वे काफी टूट गए थे। इसलिए अपने मित्रों के साथ धार्मिक यात्रा पर निकल गए थे। लौटते समय हुए हादसे में रनवीर सिंह की भी मौत हो गई। एक महीने में दो मौतों से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार में पत्नी व तीन बेटे हैं। तीनों की शादी हो चुकी है। यह परिवार किसान है।
पुलिस में नौकरी से घर आई थीं खुशियां
बृजमोहन गौतम उर्फ बिज्जो (52) की भी इस दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। उनके परिवार में दो बेटे व पत्नी हैं। बड़े बेटे की शादी हो चुकी है। ग्रामीणों ने बताया कि छोटे बेटे की पिछले वर्ष ही उत्तर प्रदेश पुलिस में नौकरी लगी थी तथा वह ट्रेनिंग पर गाजियाबाद गया है। बड़ा बेटा पिता के साथ खेतीबाड़ी संभाल रहा था। छोटे की नौकरी से बृजमोहन व घर के लोग खुश थे, लेकिन उनके जाने से परिवार की खुशियों पर ग्रहण लग गया।
परिवार की खुशियों के लिए मांगी थी मन्नत
देवकीनंदन (65) के परिवार में पत्नी व दो बेटे हैं, वह चार बेटियों की शादी कर चुके थे। बड़े बेटे की भी शादी हो चुकी है। परिवार दूसरे बेटे की शादी की तैयारी कर रहा था। देवकीनंदन के साथ दोनों बेटे खेती का काम संभालते थे। परिजनों ने बताया कि वह कई साल से जबलपुर की कथा में जाने की कह रहे थे, क्योंकि उन्होंने परिवार की खुशियों के लिए मन्नत मांगी थी। इसीलिए हर वर्ष होने वाले इस आयोजन में इस बार वह भी शामिल हुए।
मां के बाद परिवार से उठा पिता का साया
हादसे में मृत उदयवीर सिंह (62) के दो बेटे व एक बेटी है। सभी शादीशुदा हैं, उदयवीर भी किसान थे। तीन साल पहले उनकी पत्नी की मौत हो गई थी। मां के गम से परिवार उभरा ही था कि अब सिर से पिता का साया उठा गया। मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
दवा ने बचा ली रामावतार की जान
आगरा स्टेशन से रामअवतार (70) भी टेंपो में बैठे थे, लेकिन उन्हें टेढ़ी बगिया से दवा लेनी थी। दवा लेने में देर हो जाती, इसलिए वे टेंपो से उतर गए और साथियों को गांव के लिए रवाना कर दिया। इस बारे में उन्होंने साथियों को बोला था कि घर पर खबर कर दे दें। जब इसकी जानकारी परिजनों को हुई तो उन्होंने राहत की सांस ली। दवा ने उनकी जान बचा ली।
आगरा मेडिकल कॉलेज पहुंचे दो घायलों के परिजन
इस हादसे में सेवानिवृत्त दारोगा विजय सिंह (65) निवासी गांव धाधऊ और धनप्रसाद (65) निवासी नगला मनी घायल हैं। दोनों का उपचार आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। दोनों घायलों के परिजन व रिश्तेदार सूचना मिलते ही मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। इसमें धन प्रसाद की हालत अधिक गंभीर बताई जा रही है।
