Cyber Crime: नौकरी-निवेश के नाम पर ठगी करने वालों के 1.47 करोड़ फ्रीज, 423 सोशल मीडिया एकाउंट कराए ब्लॉक
वर्ष 2025 में हाथरस साइबर थाने और सेल में कुल 55 रिपोर्ट दर्ज कराईं गईं हैं। इनमें से 42 रिपोर्ट गंभीर धोखाधड़ी और ऑनलाइन ठगी की धाराओं में दर्ज हैं। इनमें अधिकतर घटनाओं का पर्दाफाश हो चुका है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
निवेश में डबल फायदा और नौकरी दिलाने के नाम पर डिजिटल ठगी करने वालों के खिलाफ साइबर सेल की कार्रवाई जारी है। हाथरस में वर्ष 2025 में पुलिस ने ठगों के खातों में मौजूद 1.47 करोड़ रुपये फ्रीज करा दिए हैं। मशक्कत के बाद पीड़ितों के 41.73 लाख रुपये वापस दिलाए गए हैं। ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई जारी है।
नौकरी और निवेश ठगी के नए हथियार
साइबर अपराधी अब सीधे बैंक खाते की जानकारी मांगने के बजाय मनोवैज्ञानिक तरीके अपना रहे हैं। गिरोह द्वारा लोगों को सोशल मीडिया के जरिये लुभावने ऑफर दिए जाते हैं। इसमें घर बैठे ऑनलाइन जॉब या शेयर मार्केट में निवेश पर डबल रिटर्न का झांसा देना शामिल होता है। एक बार जाल में फंसने के बाद पीड़ित से अलग-अलग शुल्क के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं। कई दिनों के बाद पीड़ितों को ठगी का अहसास होता है। इसके बाद मामला साइबर सेल पहुंचता है।
साइबर अपराध से बचने का एकमात्र तरीका जागरूकता और सावधानी है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही लालच में आकर किसी को पैसा ट्रांसफर करें। यदि ठगी होती है, तो बिना देर किए 1930 नंबर पर सूचित करें।-चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी।
विज्ञापन विज्ञापन
423 फर्जी सोशल मीडिया एकाउंट बंद
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में साइबर सेल फर्जी डिजिटल पहचान बनाने वालों पर भी पैनी नजर रख रही है। जांच के दौरान ठगी और भ्रामक प्रचार में संलिप्त पाए गए 423 फर्जी सोशल मीडिया एकाउंट को ब्लॉक कराया गया है। पुलिस का मानना है कि इन एकाउंट को बंद करने से भविष्य में होने वाली कई बड़ी वारदातों पर अंकुश लगेगा।
एक साल में दर्ज हुई 55 रिपोर्ट, जांच जारी
वर्ष 2025 में साइबर थाने और सेल में कुल 55 रिपोर्ट दर्ज कराईं गईं हैं। इनमें से 42 रिपोर्ट गंभीर धोखाधड़ी और ऑनलाइन ठगी की धाराओं में दर्ज हैं। इनमें अधिकतर घटनाओं का पर्दाफाश हो चुका है। जो रह गई हैं, उनमें साइबर विशेषज्ञों की टीम बैंक ट्रांजेक्शन और आईपी एड्रेस के जरिये आरोपियों की लोकेशन ट्रेस कर रही हैं ताकि गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।
जरूरी सावधानी
- गोल्डन ऑवर : ठगी के बाद के 2 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। तुरंत सूचना देने पर पैसा बैंक में ही रुकने की संभावना 90 फीसदी तक होती है।
- सत्यापन : किसी भी कंपनी में पैसा लगाने या नौकरी ज्वाइन करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट और पते की जांच स्वयं करें।
- साझा न करें : अपना पासवर्ड, ओटीपी या बैंक पिन कभी किसी को न बताएं।