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UP: कुंवारे लड़के और उनका परिवार, NCR तक लड़कियों की सप्लाई; दूसरी बार की कॉल ने खोल दी 'चाची' की पूरी कहानी
Sun, 16 Aug 2026 11:37 AM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Sharukh Khan
Updated Sun, 16 Aug 2026 11:37 AM IST
सार
अलीगढ़ में अंतरराज्यीय मानव तस्करी के कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। गिरोह पर छत्तीसगढ़-झारखंड से बच्चियां अलीगढ़ लाकर एक लाख रुपये तक में बेचने का आरोप है। एक नाबालिग ने हिम्मत दिखाई तो बच्चियों की खरीद-फरोख्त का खेल खुल गया।
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human trafficking
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अलीगढ़ में एक बेसहारा नाबालिग की बहादुरी और सूझबूझ ने अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह के काले कारनामों का पर्दाफाश कर दिया। टप्पल के मौर गांव से डायल 112 पर आई एक मार्मिक पुकार ने पुलिस को सक्रिय किया और इस घटना ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया जो आर्थिक रूप से कमजोर बच्चियों को बेहतर भविष्य का सब्जबाग दिखाकर उन्हें खरीद-फरोख्त के दलदल में धकेल रहा था। इस साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस ने महिला सरगना समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और तीन नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित मुक्त कराया है।
बेहतर भविष्य का झांसा, देह व्यापार का जाल
पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह छत्तीसगढ़, झारखंड और राजस्थान जैसे राज्यों से आर्थिक रूप से कमजोर और बेसहारा बच्चियों को निशाना बनाता था। इन मासूमों को पढ़ाई-लिखाई और उज्ज्वल भविष्य का झूठा सपना दिखाकर अलीगढ़ लाया जाता था। इसके बाद, उनकी खरीद-फरोख्त 70 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की जाती थी। यह सौदा उन लोगों से होता था जिनकी शादी नहीं हो पा रही थी। पुलिस को इस बात की भी आशंका है कि इन बच्चियों को दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों में घरेलू काम में भी लगाया जाता था।
जबरन शादी, मारपीट और मोबाइल से मदद की गुहार
मामले की शुरुआत तब हुई जब विनोद नामक व्यक्ति ने एक नाबालिग बच्ची की जबरन अपने बेटे से शादी करा दी। आरोप है कि घर में उस बच्ची को लगातार मारपीट और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। इस असहनीय पीड़ा से परेशान होकर, बच्ची ने एक मौका पाकर घर की बहू का मोबाइल उठाया और उसका पैटर्न लॉक खोल लिया। इसके बाद, उसने डायल 112 पर फोन करके अपनी लोकेशन बताई और बंधक बनाए जाने की मार्मिक गुहार लगाई।
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बेहतर भविष्य का झांसा, देह व्यापार का जाल
पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह छत्तीसगढ़, झारखंड और राजस्थान जैसे राज्यों से आर्थिक रूप से कमजोर और बेसहारा बच्चियों को निशाना बनाता था। इन मासूमों को पढ़ाई-लिखाई और उज्ज्वल भविष्य का झूठा सपना दिखाकर अलीगढ़ लाया जाता था। इसके बाद, उनकी खरीद-फरोख्त 70 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की जाती थी। यह सौदा उन लोगों से होता था जिनकी शादी नहीं हो पा रही थी। पुलिस को इस बात की भी आशंका है कि इन बच्चियों को दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों में घरेलू काम में भी लगाया जाता था।
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जबरन शादी, मारपीट और मोबाइल से मदद की गुहार
मामले की शुरुआत तब हुई जब विनोद नामक व्यक्ति ने एक नाबालिग बच्ची की जबरन अपने बेटे से शादी करा दी। आरोप है कि घर में उस बच्ची को लगातार मारपीट और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। इस असहनीय पीड़ा से परेशान होकर, बच्ची ने एक मौका पाकर घर की बहू का मोबाइल उठाया और उसका पैटर्न लॉक खोल लिया। इसके बाद, उसने डायल 112 पर फोन करके अपनी लोकेशन बताई और बंधक बनाए जाने की मार्मिक गुहार लगाई।
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सात अगस्त को यह कॉल मिलते ही सीओ खैर अभिषेक पटेल और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट हरकत में आ गई। पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर बच्ची को मुक्त कराया। पूछताछ और गहन जांच के बाद, पुलिस को दो अन्य नाबालिग बच्चियों के भी इस गिरोह के संपर्क में होने की जानकारी मिली। दोनों बच्चियों को भी पुलिस ने सुरक्षित बचा लिया।
तीन खरीदार भी चढ़े पुलिस के हत्थे
पुलिस ने इस मानव तस्करी गिरोह के कथित सरगना बबिता उर्फ चाची, जो प्रयागराज की रहने वाली है, और उसके सहयोगी सुखाराम उर्फ महावीर, जो गोंडा का निवासी है, को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, सुखाराम मूल रूप से राजस्थान के डीग का रहने वाला है और पहचान छिपाकर अलीगढ़ में रह रहा था। इसके अलावा, मौर गांव निवासी विनोद जाट, गोंडा निवासी बबलू और ओमपाल सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का आरोप है कि इन तीनों व्यक्तियों ने शादी के नाम पर इन नाबालिग बच्चियों को खरीदा था।
पुलिस ने इस मानव तस्करी गिरोह के कथित सरगना बबिता उर्फ चाची, जो प्रयागराज की रहने वाली है, और उसके सहयोगी सुखाराम उर्फ महावीर, जो गोंडा का निवासी है, को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, सुखाराम मूल रूप से राजस्थान के डीग का रहने वाला है और पहचान छिपाकर अलीगढ़ में रह रहा था। इसके अलावा, मौर गांव निवासी विनोद जाट, गोंडा निवासी बबलू और ओमपाल सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का आरोप है कि इन तीनों व्यक्तियों ने शादी के नाम पर इन नाबालिग बच्चियों को खरीदा था।
छत्तीसगढ़ से अलीगढ़ तक की दर्दनाक यात्रा
पुलिस के मुताबिक, करीब चार महीने पहले एक 15 वर्षीय नाबालिग छत्तीसगढ़ से एक युवक के साथ निकली थी। कुछ दिनों बाद, वह युवक उसे अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर अकेला छोड़कर चला गया। बच्ची के परिजनों ने छत्तीसगढ़ में युवक के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया था। स्टेशन पर अकेली मिली बच्ची पर कथित तौर पर बबिता उर्फ चाची की नजर पड़ी। आरोप है कि बबिता ने बच्ची को सहानुभूति दिखाकर खाना खिलाया और मदद का भरोसा दिलाया। इसके बाद, अपने सहयोगी सुखाराम उर्फ महावीर के माध्यम से उसे टप्पल के मौर गांव निवासी विनोद जाट के हाथों बेच दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, करीब चार महीने पहले एक 15 वर्षीय नाबालिग छत्तीसगढ़ से एक युवक के साथ निकली थी। कुछ दिनों बाद, वह युवक उसे अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर अकेला छोड़कर चला गया। बच्ची के परिजनों ने छत्तीसगढ़ में युवक के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया था। स्टेशन पर अकेली मिली बच्ची पर कथित तौर पर बबिता उर्फ चाची की नजर पड़ी। आरोप है कि बबिता ने बच्ची को सहानुभूति दिखाकर खाना खिलाया और मदद का भरोसा दिलाया। इसके बाद, अपने सहयोगी सुखाराम उर्फ महावीर के माध्यम से उसे टप्पल के मौर गांव निवासी विनोद जाट के हाथों बेच दिया गया।
यह घटना मानव तस्करी के गंभीर खतरे को उजागर करती है और समाज में जागरूकता तथा सतर्कता की आवश्यकता पर बल देती है। पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा प्रभावित की गई अन्य बच्चियों का पता लगाने के लिए गहन जांच कर रही है।
अब तक कितनी बच्चियां बनीं शिकार?
पुलिस की जांच अब सिर्फ गिरफ्तार पांच आरोपियों तक सीमित नहीं है। यह पता लगाया जा रहा है कि बबीता और सुखाराम का नेटवर्क कितने राज्यों तक फैला था, अब तक कितनी बच्चियों को अलीगढ़ या एनसीआर लाया गया और कितनों का कथित सौदा किया गया।
अब तक कितनी बच्चियां बनीं शिकार?
पुलिस की जांच अब सिर्फ गिरफ्तार पांच आरोपियों तक सीमित नहीं है। यह पता लगाया जा रहा है कि बबीता और सुखाराम का नेटवर्क कितने राज्यों तक फैला था, अब तक कितनी बच्चियों को अलीगढ़ या एनसीआर लाया गया और कितनों का कथित सौदा किया गया।
एक बच्ची के हाथ लगा मोबाइल इस नेटवर्क के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हुआ। उसकी एक कॉल ने वह दरवाजा खोल दिया, जिसके पीछे पुलिस को बच्चियों की कथित खरीद-फरोख्त का पूरा नेटवर्क दिखाई दिया।
अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल
एसपी ग्रामीण मनीष कुमार मिश्रा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मानव तस्करी, नाबालिग से दुष्कर्म, पॉक्सो और बाल विवाह निषेध अधिनियम समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पांचों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब बच्चियों के मूल परिजनों का पता लगाने के साथ यह भी जांच कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितनी बच्चियों को अपना शिकार बनाया।
एसपी ग्रामीण मनीष कुमार मिश्रा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मानव तस्करी, नाबालिग से दुष्कर्म, पॉक्सो और बाल विवाह निषेध अधिनियम समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पांचों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब बच्चियों के मूल परिजनों का पता लगाने के साथ यह भी जांच कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितनी बच्चियों को अपना शिकार बनाया।
'शादी के लिए कोई लड़की हो तो बताना'
शादी के लिए कोई लड़की हो तो बताना। आम तौर पर यह बात किसी परिचित, रिश्तेदार या परिवार के बीच कही-सुनी जाती है। लेकिन यही मांग जब अपराध की दुनिया में पहुंचती है तो बच्चियों की खरीद-फरोख्त का रास्ता खोल सकती है। इसका खुलासा अलीगढ़ पुलिस ने एक नाबालिग के साहस से किया।
शादी के लिए कोई लड़की हो तो बताना। आम तौर पर यह बात किसी परिचित, रिश्तेदार या परिवार के बीच कही-सुनी जाती है। लेकिन यही मांग जब अपराध की दुनिया में पहुंचती है तो बच्चियों की खरीद-फरोख्त का रास्ता खोल सकती है। इसका खुलासा अलीगढ़ पुलिस ने एक नाबालिग के साहस से किया।
आरोप है कि बबीता उर्फ चाची ने इसी मांग को कमाई का रास्ता बना लिया। छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों के आर्थिक रूप से कमजोर व बेसहारा परिवारों की बच्चियों को निशाना बनाया गया। किसी को पढ़ाई और बेहतर भविष्य का भरोसा दिया गया तो किसी को मदद का झांसा। फिर उन्हें अलीगढ़ तक लाकर कथित तौर पर उन लोगों तक पहुंचाया गया, जिनकी शादियां नहीं हो पा रही थीं।
इस नेटवर्क में पुलिस के अनुसार बबीता के साथ राजस्थान का सुखाराम उर्फ सूखा उर्फ महावीर फौजदार अहम कड़ी था। पुलिस की जांच में पता चला है कि बबीता बच्चियों को दूसरे राज्यों से लाती थी और सुखाराम अलीगढ़ व आसपास के इलाकों में उनके लिए खरीदार तलाशता था। पुलिस को बच्चियों को दिल्ली-एनसीआर में घरेलू काम के लिए भेजे जाने की भी आशंका है।
एसपी ग्रामीण मनीष कुमार मिश्रा ने बताया कि इस जोड़ी ने अब तक कितनी नाबालिग को शिकार बनाया है। इसकी जांच शुरू कर दी है। बबिता और सुखाराम ने एक बड़ा नेटवर्क बना लिया था जो छत्तीसगढ़ से अलीगढ़ और यहां से दिल्ली तक फैला है। उम्मीद है कि जल्द ही इस नेटवर्क के कई और चेहरों तक पहुंचने में सफलता मिलेगी।
पहले पहचान बढ़ी, फिर मांग को बना लिया धंधा
पुलिस की जांच के अनुसार बबीता मूल रूप से प्रयागराज के सराय इनायत क्षेत्र की रहने वाली है, जबकि उसका जन्म छत्तीसगढ़ में हुआ था। करीब 25 साल पहले उसकी शादी प्रयागराज निवासी रामबली यादव से हुई। शादी के बाद दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में उसका संपर्क बढ़ा। आरोप है कि परिचितों के बीच अक्सर शादी के लिए लड़की तलाशने की बात होती थी। धीरे-धीरे बबीता को इस मांग का अंदाजा हो गया। इसके बाद उसने छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और बेसहारा बच्चियों को कथित तौर पर निशाना बनाना शुरू किया।
पुलिस की जांच के अनुसार बबीता मूल रूप से प्रयागराज के सराय इनायत क्षेत्र की रहने वाली है, जबकि उसका जन्म छत्तीसगढ़ में हुआ था। करीब 25 साल पहले उसकी शादी प्रयागराज निवासी रामबली यादव से हुई। शादी के बाद दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में उसका संपर्क बढ़ा। आरोप है कि परिचितों के बीच अक्सर शादी के लिए लड़की तलाशने की बात होती थी। धीरे-धीरे बबीता को इस मांग का अंदाजा हो गया। इसके बाद उसने छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और बेसहारा बच्चियों को कथित तौर पर निशाना बनाना शुरू किया।
बबिता लाती, सुखाराम तलाशता था खरीदार
पुलिस के मुताबिक राजस्थान के डींग का रहने वाला सुखाराम अलीगढ़ के गोंडा क्षेत्र में रह रहा था। आरोप है कि वह बबिता की लाई बच्चियों को ऐसे परिवारों तक पहुंचाता था, जहां शादी के लिए लड़की की तलाश थी। पुलिस के अनुसार बच्चियों की कथित कीमत 70 हजार से एक लाख रुपये तक तय होती थी। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में घरेलू काम के लिए भी उन्हें भेजे जाने की आशंका जताई गई है।
पुलिस के मुताबिक राजस्थान के डींग का रहने वाला सुखाराम अलीगढ़ के गोंडा क्षेत्र में रह रहा था। आरोप है कि वह बबिता की लाई बच्चियों को ऐसे परिवारों तक पहुंचाता था, जहां शादी के लिए लड़की की तलाश थी। पुलिस के अनुसार बच्चियों की कथित कीमत 70 हजार से एक लाख रुपये तक तय होती थी। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में घरेलू काम के लिए भी उन्हें भेजे जाने की आशंका जताई गई है।
फिर एक बच्ची ने उठाया मोबाइल
इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी टप्पल के मौर गांव में सामने आई। पुलिस के अनुसार छत्तीसगढ़ की एक नाबालिग बच्ची को विनोद जाट के यहां पहुंचाया गया था। आरोप है कि उसकी जबरन शादी करा दी गई और घर में उसके साथ मारपीट व प्रताड़ना की गई। बच्ची को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा था। तभी उसकी नजर घर की बहू के मोबाइल फोन पर पड़ी। उसने चुपचाप मोबाइल का पैटर्न लॉक देखा।
इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी टप्पल के मौर गांव में सामने आई। पुलिस के अनुसार छत्तीसगढ़ की एक नाबालिग बच्ची को विनोद जाट के यहां पहुंचाया गया था। आरोप है कि उसकी जबरन शादी करा दी गई और घर में उसके साथ मारपीट व प्रताड़ना की गई। बच्ची को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा था। तभी उसकी नजर घर की बहू के मोबाइल फोन पर पड़ी। उसने चुपचाप मोबाइल का पैटर्न लॉक देखा।
मौका मिला तो फोन उठाया और डायल 112 कर दिया। अंकल, मुझे यहां बंधक बनाया गया है... मुझे बचा लीजिए। इस कॉल के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के अनुसार परिवार ने बच्ची को घर के अंदर कर दिया और टीम को गुमराह करते हुए कहा कि फोन गलती से हो गया होगा। पुलिस लौट गई, लेकिन बच्ची ने हिम्मत नहीं छोड़ी।
दूसरी बार की कॉल ने खोल दी पूरी कहानी
7 अगस्त 2026 को बच्ची मौका पाकर घर से निकल गई। रास्ते में एक राहगीर से फोन मांगा और दोबारा 112 पर कॉल की। इस बार उसने पुलिस को पूरी कहानी बताई। रेलवे स्टेशन पर मिलने से लेकर बबीता उर्फ चाची और सुखाराम तक पहुंचने वाली कड़ियों के बारे में पुलिस को जानकारी दी।
7 अगस्त 2026 को बच्ची मौका पाकर घर से निकल गई। रास्ते में एक राहगीर से फोन मांगा और दोबारा 112 पर कॉल की। इस बार उसने पुलिस को पूरी कहानी बताई। रेलवे स्टेशन पर मिलने से लेकर बबीता उर्फ चाची और सुखाराम तक पहुंचने वाली कड़ियों के बारे में पुलिस को जानकारी दी।
बच्ची के बताए सुरागों पर जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों को पकड़ना शुरू किया। तीन नाबालिग बच्चियों को मुक्त कराया गया और महिला सरगना समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
एक कॉल से खुलीं कई कड़ियां
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में बबीता उर्फ चाची, सुखाराम उर्फ महावीर और तीन कथित खरीदार शामिल हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसके जरिए अब तक कितनी बच्चियों को अलीगढ़ और एनसीआर तक लाया गया।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में बबीता उर्फ चाची, सुखाराम उर्फ महावीर और तीन कथित खरीदार शामिल हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसके जरिए अब तक कितनी बच्चियों को अलीगढ़ और एनसीआर तक लाया गया।
एक बच्ची के हाथ लगा मोबाइल इस कथित नेटवर्क की सबसे कमजोर कड़ी बन गया। उसने 112 पर कॉल की और पुलिस को उस रास्ते तक पहुंचा दिया, जहां से बच्चियों की कथित खरीद-फरोख्त का पूरा खेल सामने आने लगा।