{"_id":"6a81a628a7d67a80400280c4","slug":"village-returned-to-city-2026-08-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर में लौटा गांव: चक्की की चर्र-चर्र, सिल-बट्टे की खुशबू, खटिया पर जमाई महिलाओं ने चौपाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर में लौटा गांव: चक्की की चर्र-चर्र, सिल-बट्टे की खुशबू, खटिया पर जमाई महिलाओं ने चौपाल
Sun, 16 Aug 2026 05:30 PM IST
Chaman Kumar Sharma
विनीत चौरसिया, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
विनीत चौरसिया, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Sun, 16 Aug 2026 05:30 PM IST
सार
आज की जिंदगी में जहां पानी नल और आरओ से मिलता है और खाना मशीनों से तैयार हो जाता है, वहां महिलाओं ने पुराने तौर-तरीकों को अपने हाथों से दोहराया। चक्की चलाने से लेकर सिल-बट्टे पर चटनी पीसने तक हर गतिविधि में उत्साह नजर आया।
विज्ञापन
चक्की चलाने का फैंसी अंदाल
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चक्की की चर्र-चर्र, सिल-बट्टे पर पिसती मिर्च-लहसुन की खुशबू और खटिया पर बैठी सखियों की हंसी... कुछ देर के लिए लगा जैसे शहर की चकाचौंध पीछे छूट गई और गांव की वही पुरानी चौपाल लौट आई है। हरियाली तीज पर रामोजी रिजॉर्ट में कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई दिया। महिलाओं ने गांव की गोरी, एक मीठी सी याद थीम के बहाने सिर्फ ग्रामीण वेशभूषा नहीं अपनाई, बल्कि बचपन में देखे और जिए गांव को फिर से महसूस किया।
विज्ञापन
लहंगा-चुन्नी, बिंदिया और पारंपरिक गहनों में सजी महिलाएं झोपड़ी के आसपास जुटीं तो पुरानी यादों का सिलसिला शुरू हो गया। किसी ने चक्की चलाकर आटा पीसा तो किसी ने सिल-बट्टे पर चटनी पीसने का हुनर आजमाया। कुएं से पानी खींचने की कोशिश में भी खूब ठिठोली हुई। खटिया पर बैठीं सखियों की चौपाल में कभी बचपन के किस्से निकले तो कभी गांव में बीते सावन के दिनों की यादें ताजा हो गईं।
विज्ञापन
कुएं का पानी, खटिया की चौपाल
विज्ञापन
आज की जिंदगी में जहां पानी नल और आरओ से मिलता है और खाना मशीनों से तैयार हो जाता है, वहां महिलाओं ने पुराने तौर-तरीकों को अपने हाथों से दोहराया। चक्की चलाने से लेकर सिल-बट्टे पर चटनी पीसने तक हर गतिविधि में उत्साह नजर आया। कई महिलाओं के लिए ये काम सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि बचपन में देखे अपने घर-आंगन और गांव की यादों को फिर से छूने जैसा था।
ढोलक बजी तो थिरक उठीं सखियां
शाम ढली तो गांव की चौपाल का रंग और गहरा हो गया। ढोलक की थाप के साथ कजरी और लोकगीत शुरू हुए तो महिलाएं खुद को रोक नहीं सकीं। सखियों ने मिलकर गीत गाए और जमकर नृत्य किया। तीज के पारंपरिक उल्लास के बीच आधुनिक शहर में गांव की संस्कृति की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम अग्रवाल नारी जागृति मंच की ओर से आयोजित किया गया था। अध्यक्षता दीप्ति अग्रवाल ने की। सचिव नमीता अग्रवाल समेत संस्था से जुड़ी महिलाएं और बड़ी संख्या में प्रतिभागी मौजूद रहीं। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को सरप्राइज उपहार दिए गए।