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यह है खतरों की कॉलोनी: सरकार ने दिए मकान, मरम्मत कराना भूल गई, डर के साये में रह रहे 6000 लोग

Sat, 18 Jul 2026 12:26 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sat, 18 Jul 2026 12:26 PM IST
सार

टाउनशिप में जर्जर भवनों के साथ गंदगी भी बड़ी समस्या है। आवासों के पीछे जलभराव, कीचड़ और झाड़ियां फैली हैं। ब्लॉक 51 की तीसरी मंजिल पर पीपल का पेड़ उग आया है, जिसकी जड़ें जल निकासी पाइप के सहारे नीचे तक पहुंच चुकी हैं।

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Hathras dilapidated Kanshi Ram Colony Phase One
कांशीराम कॉलोनी फेज-वन की जर्जर इमारत - फोटो : संवाद

विस्तार

गरीबों को सुरक्षित आशियाने देने के लिए 16 वर्ष पूर्व बसाई गई कांशीराम टाउनशिप आज खुद हादसे का इंतजार करती दिखाई देती है। जर्जर इमारतें, उखड़ा प्लास्टर, बाहर झांकतीं सरिया, गिरासू छज्जे, वर्षों से खराब बिजली व्यवस्था और गंदगी के बीच करीब छह हजार परिवार रोज मौत के साये में जीवन गुजारने को मजबूर हैं।

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संवाद न्यूज एजेंसी की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि हालात इतने खराब हैं कि कई ब्लॉकों की सीढ़ियां और बालकनियां भी असुरक्षित हो चुकी हैं। शुक्रवार की दोपहर करीब 12 बजे टीम ब्लॉक नंबर 51 पर पहुंची।
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एक साल पहले खंभों सहित गिरा ट्रांसफार्मरबाहर से ही इमारत की हालत इसकी जर्जरता बयां कर रही थी। सीढ़ियों की लोहे की रेलिंग दीवार से अलग हो चुकी थी। ऊपर चढ़ने में हिचकिचाहट हुई तो पीछे से आवाज आई, चढ़ जाओ... नहीं गिरेगी, हमारा तो रोज का काम है। बस ऊपर वाली छत गिराऊ है, वहां मत जाना। वर्ष 2011 से यहां रह रहीं परवीन बताती हैं कि इतने वर्षों में पूरी इमारत खंडहर में बदल गई है। बारिश और तेज हवा चलने पर हर पल हादसे का डर बना रहता है। उनका कहना है कि आवास मिलने के बाद प्रशासन ने कभी उनकी सुध नहीं ली।

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Hathras dilapidated Kanshi Ram Colony Phase One
जर्जर इमारत के लिंटर की दिखतीं सरिया - फोटो : संवाद

इसी ब्लॉक की निवासी रेखा ने बताया कि लोग अपने-अपने फ्लैट के अंदर तो किसी तरह मरम्मत और रंग-रोगन करा लेते हैं, लेकिन पूरी इमारत की मरम्मत उनके बस की बात नहीं है। बाहर का प्लास्टर लगातार गिर रहा है और कई जगह सरिया खुल चुकी है। सामने ब्लॉक 56 के नबी हुसैन ने भी अपने आवास की बदहाल स्थिति दिखाते हुए कहा कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं ब्लॉक 47 के सुरेश के अनुसार उनके ब्लॉक की स्थिति भी अलग नहीं है। पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नियमित नहीं मिलतीं।

विकास कार्य किसी भी सरकार में हों, लेकिन उनकी देखरेख की जिम्मेदारी वर्तमान सरकार की भी होती है। सरकारों को वैमनस्यता नहीं दिखानी चाहिए। जनहित में आवासों के रख-रखाव व सफाई व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।-राजकपूर, जिलाध्यक्ष बसपा
सरकार सभी वर्गाें का ध्यान रख रही है। कांशीराम टाउनशिप के लोगों की समस्या दूर कराने के लिए जिस भी स्तर पर पैरवी करनी होगी, की जाएगी। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से भी बात करेंगे।-प्रेम सिंह कुशवाहा, जिलाध्यक्ष, भाजपा
कांशीराम टाउनशिप का सर्वे कराया जाएगा। जो भी समस्याएं सामने आएंगी, उन्हें दूर कराया जाएगा। आवासों की मरम्मत का प्रस्ताव तैयार कर शासन से बजट मांगा जाएगा।-अतुल वत्स, डीएम

टूटा पड़ा बिजली मीटर का बॉक्सतीन साल से जमीन पर पड़ा ट्रांसफाॅर्मर
ब्लॉक 51 से 56 के बीच लगा ट्रांसफाॅर्मर करीब तीन वर्ष पहले खंभे सहित गिर गया था। परवीन बताती हैं कि आज तक उसे नहीं बदला गया। 11 हजार वोल्ट की लाइन के कनेक्शन तो हटा दिए गए, लेकिन तार अब भी वहीं लटके हैं। स्थानीय लोग उन्हीं तारों पर रस्सी बांधकर कपड़े सुखाने पर मजबूर हैं, जो व्यवस्था की अनदेखी का बड़ा उदाहरण है।

Hathras dilapidated Kanshi Ram Colony Phase One
कॉलोनी में व्याप्त गंदगी - फोटो : संवाद

गंदगी, जलभराव और उग आए पेड़
टाउनशिप में जर्जर भवनों के साथ गंदगी भी बड़ी समस्या है। आवासों के पीछे जलभराव, कीचड़ और झाड़ियां फैली हैं। ब्लॉक 51 की तीसरी मंजिल पर पीपल का पेड़ उग आया है, जिसकी जड़ें जल निकासी पाइप के सहारे नीचे तक पहुंच चुकी हैं। सुरेश का कहना है कि सफाई कर्मचारी महीने में एक-दो बार ही आते हैं, जिससे पूरे परिसर में अस्वच्छता बनी रहती है। यहां रहने वाले परिवारों की सबसे बड़ी मांग यही है कि इमारतों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित जीवन का अधिकार दिया जाए, इससे पहले कि कोई बड़ा हादसा प्रशासन को जगाए।
तारों पर अरगनी बांधकर कपडे़ सूखते हुएइन समस्याओं से जूझ रहे लोग

  • पेजयल : पानी की बात करें तो ऊपर तक पाइप लाइन बिछाई गई थी और टंकियां लगी थीं। ये सभी टंकियां क्षतिग्रस्त हैं, अब सीधे आवासों में पानी नहीं आता। लोग नगर पालिका के नलों पर लाइन लगाते हैं और पानी भरकर चौथी मंजिल तक ले जाते हैं।
  • पार्क बदहाल : यहां के सभी पार्क खस्ताहाल हैं। हरियाली तो दूर, सभी में गंदगी का अंबार है। बाउंड्री टूट चुकी है। झूले न होने पर एक पार्क में बच्चे पेड़ पर कपड़े का झूला बनाकर झूलते नजर आए। फोटो खींचने पर बच्चों ने उत्सुकता से पूछा, क्या यहां झूले लगने वाले हैं।


योजना का नाम : कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना

  • पहला फेज : वर्ष 2009 -10
  • आवास : 1500
  • आबादी : 6000
  • सुविधा : दो कमरों का पक्का फ्लेट, बिजली, पानी की सुविधा के साथ।
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