Hathras: कागजों में अटका मेडिकल कॉलेज, डीएम ने भेजे तीन रिमाइंडर, अभी तक नहीं हुआ भूमि का हस्तांतरण
कोरोना के बाद वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में यूपी कैबिनेट द्वारा भूमि हस्तांतरण को हरी झंडी दे दी थी। दुग्ध विकास विभाग इस कीमती जमीन को मुफ्त में छो़ड़ने के लिए तैयार नहीं था।
विस्तार
हाथरस जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड से चिकित्सा शिक्षा विभाग को 6.675 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित होनी है। तीन साल से लगातार पत्राचार हो रहे हैं, समस्या का समाधान नहीं। मौजूदा जिलाधिकारी ने भी फिर से रिमांइडर भेजा है। चार माह में वह इससे पहले भी दो बार पत्र लिख चुके हैं।
दरअसल, मेडिकल कॉलेज का भविष्य सासनी स्थित बंद पड़ी पराग डेयरी की भूमि की हस्तांतरण की प्रक्रिया पर टिका है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद, पिछले तीन वर्षों से यह महत्वाकांक्षी परियोजना कागजी पत्राचार के फेर में फंसी हुई है। कोरोना के बाद वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में यूपी कैबिनेट द्वारा भूमि हस्तांतरण को हरी झंडी दे दी थी। दुग्ध विकास विभाग इस कीमती जमीन को मुफ्त में छो़ड़ने के लिए तैयार नहीं था। लंबी खींचतान के बाद बीच का रास्ता निकाला गया और तय हुआ कि जमीन वर्ष 1987 की दर पर दी जाएगी। स्थानीय प्रशासन ने इसका विधिवत मूल्यांकन कर प्रस्ताव मई 2023 में शासन को भेज दिया था।
भूमि हस्तांतरण की सुस्त प्रक्रिया को गति देने के लिए प्रशासन लगातार पत्राचार कर रहा है। डीएम ने पांच फरवरी को चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के महानिदेशक को फिर से अनुरोध पत्र लिखा है। इससे पहले भी वह 21 अक्टूबर 2025 और 11 नवंबर 2025 को शासन को अनुस्मारक भेजे जा चुके हैं, लेकिन वहां से अभी तक कोई ठोस जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
भूमि हस्तांतरण के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। जैसी हस्तांतरण की प्रक्रिया पूर्ण होती है, मेडिकल कॉलेज का मामला विभागों के बीच लटका हुआ है। यदि जल्द ही महानिदेशालय स्तर से फाइल को हरी झंडी मिलती है, तो निर्माण कार्य का रास्ता साफ हो जाएगा।-अतुल वत्स, डीएम
2023 में दोबारा भेजा गया था प्रस्ताव
सासनी की पराग डेयरी परिसर में मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए वर्ष 2022 में भूमि का चयन हो गया था। 6.675 हेक्टेयर भूमि चयन की थी, लेकिन उस पर न्यायिक विवाद सामने आ गया। इस पर उस जगह को छोड़ पराग डेयरी में ही दूरी जगह चिह्नित की गई तथा मई 2023 में उसका प्रस्ताव तैयार कर अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्राप्त के लिए दुग्ध विभाग को पत्रावली भेज दी गई थी।
आगरा-अलीगढ़ पर निर्भरता होगी कम
हाथरस जिले में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं और ट्रॉमा सेंटर जैसी सुविधाओं का अभाव है। वर्तमान में गंभीर स्थिति होने पर मरीजों को आगरा या अलीगढ़ रेफर कर दिया जाता है। सासनी में मेडिकल कॉलेज बनने से न केवल हाथरस बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदल जाएगी।
प्रमुख बिंदु: एक नजर में
- प्रोजेक्ट: पीपीपी मॉडल आधारित मेडिकल कॉलेज।
- प्रस्तावित स्थल: सासनी स्थित बंद पड़ी पराग डेयरी की भूमि।
- कुल भूमि: 6.675 हेक्टेयर भूमि इसके लिए प्रस्तावित की गई।