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Hathras News: विरोध बना अपराध, सादाबाद के 17 लोग गए थे जेल
Fri, 26 Jun 2026 02:23 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 26 Jun 2026 02:23 AM IST
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सोमदत्त, लोकतंत्र सेनानी।
- फोटो : Self
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देश में 25 जून 1975 को घोषित किए गए आपातकाल को बृहस्पतिवार को 51 वर्ष पूरे हो गए। सादाबाद क्षेत्र के 17 से अधिक लोगों को आपातकाल विरोधी गतिविधियों के आरोप में 11 जनवरी 1976 को गिरफ्तार किया गया था। बाद में इन्हें जमानत पर रिहा किया गया था।
आपातकाल में क्षेत्र से जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया, उनमें दिनेशचंद्र वार्ष्णेय, सोमप्रकाश वार्ष्णेय, माधव प्रकाश गोयल, डॉ. नारायण दत्त शर्मा, पूर्व विधायक रामशरण आर्य उर्फ लहटू ताऊ, पूरनचंद्र अग्रवाल, केशव देव गर्ग, कुंदनलाल, रामखिलोनी, अशोक शाह, कप्तान सिंह यादव, तुलसीदास अग्रवाल, राजपाल सिंह, रमेशचंद्र, सुरेश चंद्र और अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह समेत अन्य लोग शामिल थे।
लोकतंत्र सेनानियों ने बताया कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण और विवादास्पद अध्याय रहा है। इस दौरान राजनीतिक गतिविधियों पर व्यापक नियंत्रण लगाया गया था। विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियां हुईं, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई और कई नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए। आपातकाल के दौरान विरोध दर्ज कराने के लिए गुप्त रूप से बैठकें आयोजित की जाती थीं और रात के समय पोस्टर व नारे लिखे जाते थे।
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12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद देश में राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदलीं। उनके अनुसार इसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हुए और अंततः 25 जून 1975 को आपातकाल घोषित किया गया।
-दिनेशचंद्र वार्ष्णेय, लोकतंत्र सेनानी।
आपातकाल के दौरान प्रेस पर सेंसरशिप लागू रही और अनेक विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। आपातकाल की यादें आज भी भूली नहीं जातीं।
-डॉ. नारायण दत्त शर्मा, लोकतंत्र सेनानी।
-उस समय चलाए गए परिवार नियोजन अभियान और उससे जुड़ी घटनाओं ने आम लोगों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। आपातकाल में मिलीं यातनाओं को भुलाया नहीं जा सकता।
-तुलसीदास अग्रवाल, बिसावर।
- आपातकाल विरोधी गतिविधियों के संचालन के लिए क्षेत्र में कई स्थानों पर गुप्त बैठकें आयोजित होती थीं। लोकतंत्र की रक्षा के लिए अनेक लोगों ने व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना किया।
-सोमप्रकाश वार्ष्णेय, लोकतंत्र सेनानी।
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आपातकाल में क्षेत्र से जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया, उनमें दिनेशचंद्र वार्ष्णेय, सोमप्रकाश वार्ष्णेय, माधव प्रकाश गोयल, डॉ. नारायण दत्त शर्मा, पूर्व विधायक रामशरण आर्य उर्फ लहटू ताऊ, पूरनचंद्र अग्रवाल, केशव देव गर्ग, कुंदनलाल, रामखिलोनी, अशोक शाह, कप्तान सिंह यादव, तुलसीदास अग्रवाल, राजपाल सिंह, रमेशचंद्र, सुरेश चंद्र और अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह समेत अन्य लोग शामिल थे।
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लोकतंत्र सेनानियों ने बताया कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण और विवादास्पद अध्याय रहा है। इस दौरान राजनीतिक गतिविधियों पर व्यापक नियंत्रण लगाया गया था। विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियां हुईं, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई और कई नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए। आपातकाल के दौरान विरोध दर्ज कराने के लिए गुप्त रूप से बैठकें आयोजित की जाती थीं और रात के समय पोस्टर व नारे लिखे जाते थे।
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12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद देश में राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदलीं। उनके अनुसार इसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हुए और अंततः 25 जून 1975 को आपातकाल घोषित किया गया।
-दिनेशचंद्र वार्ष्णेय, लोकतंत्र सेनानी।
आपातकाल के दौरान प्रेस पर सेंसरशिप लागू रही और अनेक विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। आपातकाल की यादें आज भी भूली नहीं जातीं।
-डॉ. नारायण दत्त शर्मा, लोकतंत्र सेनानी।
-उस समय चलाए गए परिवार नियोजन अभियान और उससे जुड़ी घटनाओं ने आम लोगों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। आपातकाल में मिलीं यातनाओं को भुलाया नहीं जा सकता।
-तुलसीदास अग्रवाल, बिसावर।
- आपातकाल विरोधी गतिविधियों के संचालन के लिए क्षेत्र में कई स्थानों पर गुप्त बैठकें आयोजित होती थीं। लोकतंत्र की रक्षा के लिए अनेक लोगों ने व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना किया।
-सोमप्रकाश वार्ष्णेय, लोकतंत्र सेनानी।