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Hathras News: दूसरों पर सख्ती, अपने ही भवन आग से निपटने में सक्षम नहीं
Fri, 26 Jun 2026 02:28 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 26 Jun 2026 02:28 AM IST
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बीएसए कार्यालय में आग बुझाने के साधनों के नाम पर लगा सिलिंडर। संवाद
- फोटो : Samvad
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राजधानी लखनऊ में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड की घटना के बाद प्रदेशभर में अग्नि सुरक्षा के प्रति सतर्कता बढ़ी है, लेकिन जिले के कई सरकारी कार्यालय और भवन ऐसे हैं, जो इस तरह के अग्निकांड से निपटने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं। कहीं अग्निशमन यंत्र नहीं हैं तो कहीं वर्षों पुराने उपकरण दिखावे के लिए लगे हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि कई कार्यालय पुराने भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही संकरा रास्ता है। यदि किसी कारणवश आग लग जाए तो कर्मचारियों और कार्यालय में मौजूद आम नागरिकों के सुरक्षित बाहर निकलने में भारी दिक्कत आ सकती है।
जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय, बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय, जिला उद्योग केंद्र, जिला पंचायत, स्वरोजगार कार्यालय, सदर ब्लॉक सहित कई सरकारी भवनों में पर्याप्त अग्निशमन संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
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कई भवनों में विद्युत वायरिंग भी पुरानी बताई जाती है, जिससे शॉर्ट सर्किट की आशंका बनी रहती है। लखनऊ की घटना के बाद जहां निजी प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की जा रही है, वहीं लोगों का कहना है कि सरकारी भवनों की भी व्यापक जांच होनी चाहिए। यदि नियम सभी के लिए समान हैं तो सरकारी कार्यालयों में भी अग्नि सुरक्षा के मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाना चाहिए।
कभी भी हो सकता है हादसा
सरकारी कार्यालयों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपने कार्यों के लिए पहुंचते हैं। इन भवनों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत, उद्योग और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज भी रखे जाते हैं। ऐसे में आग लगने की घटना से न केवल करोड़ों रुपये के अभिलेख नष्ट हो सकते हैं, बल्कि जनता को भी खतरा पैदा हो सकता है।
क्या हैं प्रमुख खतरे
-अग्निशमन यंत्रों का अभाव या अनुपयोगी स्थिति
-कई भवनों में एक ही प्रवेश-निकास मार्ग
-पुराने विद्युत कनेक्शन और वायरिंग
-आपातकालीन निकासी योजना का अभाव
-फायर ड्रिल और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की कमी
-महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेखों के नष्ट होने का खतरा
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सबसे गंभीर बात यह है कि कई कार्यालय पुराने भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही संकरा रास्ता है। यदि किसी कारणवश आग लग जाए तो कर्मचारियों और कार्यालय में मौजूद आम नागरिकों के सुरक्षित बाहर निकलने में भारी दिक्कत आ सकती है।
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जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय, बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय, जिला उद्योग केंद्र, जिला पंचायत, स्वरोजगार कार्यालय, सदर ब्लॉक सहित कई सरकारी भवनों में पर्याप्त अग्निशमन संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
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कई भवनों में विद्युत वायरिंग भी पुरानी बताई जाती है, जिससे शॉर्ट सर्किट की आशंका बनी रहती है। लखनऊ की घटना के बाद जहां निजी प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की जा रही है, वहीं लोगों का कहना है कि सरकारी भवनों की भी व्यापक जांच होनी चाहिए। यदि नियम सभी के लिए समान हैं तो सरकारी कार्यालयों में भी अग्नि सुरक्षा के मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाना चाहिए।
कभी भी हो सकता है हादसा
सरकारी कार्यालयों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपने कार्यों के लिए पहुंचते हैं। इन भवनों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत, उद्योग और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज भी रखे जाते हैं। ऐसे में आग लगने की घटना से न केवल करोड़ों रुपये के अभिलेख नष्ट हो सकते हैं, बल्कि जनता को भी खतरा पैदा हो सकता है।
क्या हैं प्रमुख खतरे
-अग्निशमन यंत्रों का अभाव या अनुपयोगी स्थिति
-कई भवनों में एक ही प्रवेश-निकास मार्ग
-पुराने विद्युत कनेक्शन और वायरिंग
-आपातकालीन निकासी योजना का अभाव
-फायर ड्रिल और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की कमी
-महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेखों के नष्ट होने का खतरा