{"_id":"6a2720e34689554d3400ad90","slug":"questions-raised-over-claims-lakhs-of-saplings-planted-on-paper-yet-found-standing-in-nurseries-hathras-news-c-56-1-hts1003-149685-2026-06-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hathras News: दावों पर सवाल...लाखों पौधे कागजों में रोपे, नर्सरियों में मिले खड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hathras News: दावों पर सवाल...लाखों पौधे कागजों में रोपे, नर्सरियों में मिले खड़े
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 09 Jun 2026 01:36 AM IST
विज्ञापन
वन विभाग की सोखना नर्सरी पर ट्रैक्टर में लदकर जाते पौधे। संवाद
- फोटो : Samvad
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विश्व पर्यावरण दिवस पर जिले में लाखों पौधे रोपे जाने के दावों के बीच जमीनी हकीकत ने अभियान की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय आंकड़ों में जहां 3.38 लाख पौधों के रोपण का दावा किया गया, वहीं सात नर्सरियों से विभिन्न विभागों द्वारा किए जाने वाले 2.86 लाख पौधों के उठान में लक्ष्य का 50 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो सका।
चर्चा का केंद्र वन विभाग के आंकड़े बने हुए हैं। अभिलेखों में कई स्थानों पर पौधों का शत-प्रतिशत उठान दर्शाया गया, जबकि नर्सरियों में बड़ी संख्या में पौधे मौजूद बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मामला चर्चा में आने के बाद कई स्थानों पर पर्यावरण दिवस के बाद भी पौधों को जल्दबाजी में भेजा गया, ताकि रिकॉर्ड और वास्तविकता के बीच अंतर कम दिखाया जा सके।
पौधों की प्राप्ति प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि विधिवत रसीदों के बजाय साधारण कागजों और रफ पन्नों पर हस्ताक्षर लेकर पौधों का उठान दर्शाया गया। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च होने वाले पौधरोपण अभियान की वास्तविक सफलता और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
विज्ञापन
जियो टैगिंग का भी नहीं नम-ओ-निशान
जिले में पर्यावरण दिवस के दिन रोपे गए पौधों की जियो टैगिंग का भी कोई लेखा-जोखा नहीं है, जबकि हर साल पौधरोपण की जियो टैगिंग की व्यवस्था रहती है। इसमें पौधों के रोपने पर उनकी जियो टैगिंग की जाती है, लेकिन इस बार पौधों के रोपण के नाम पर सिर्फ खेल हुआ है, यही कारण है कि जियो टैगिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
कागजों में पौधरोपण, जमीन पर सवाल
-पर्यावरण दिवस पर 3.38 लाख पौधों के रोपण का दावा
-कई नर्सरियों में बाद तक मौजूद रहे पौधे
-विभागीय रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति में अंतर की चर्चा
-पौधों के उठान की प्रक्रिया पर भी उठ रहे सवाल
-पौधरोपण अभियान की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न
सोखना नर्सरी से इस तरह हुआ उठान
सोखना नर्सरी से पर्यावरण दिवस वाले दिन तक पौधों के उठान पर नजर डालें तो नगर पंचायत मेंडू के लिए 25, यूपीएस बलना के लिए 30, पंचायतराज विभाग ने 10 गांवों के लिए 225, अन्य सात गांवों के लिए 175, सिंचाई विभाग के लिए 40, प्राथमिक विद्यालय व पूर्व प्राथमिक विद्यालय बोनई, दूधाधारी, केशोपुर के लिए 20-20, प्राथमिक विद्यालय ग्वारऊ कलां के लिए 20, सीएमओ ऑफिस के लिए चार, महौ स्वास्थ्य केंद्र के लिए 1597, प्राथमिक विद्यालय गढ़ी सिंघा के लिए 20, प्राथमिक विद्यालय मेंडू के लिए 20 और उच्च शिक्षा विभाग के लिए 30 पौधों का उठान किया गया। अगले दिन नगला खड़ग आदि कई जगह ट्रैक्टर व ई-रिक्शा में पौधे भिजवाए गए। यहां पांच जून को 38750 पौधों का उठान होना था, जबकि उठाए सिर्फ 2,246 पौधे ही गए।
पौधरोपण पूरी तरह सफल हुआ है। सभी नर्सरियों से पौधों का उठान किया गया है। अन्य विभागों की ओर से रिसीविंग नहीं मिली, लेकिन उन्होंने रिपोर्ट भेजी है कि उन्होंने पूरा उठान किया है।
-राकेशचंद्र यादव, प्रभागीय वनाधिकारी, हाथरस।
इन नर्सरियों से होना था पौधों का उठान
51,300 पौधों का उठान होना था सुसायत की नर्सरी से।
38,750 पौधों का उठान होना था सोखना की नर्सरी से।
42,800 पौधों का उठान होना था हतीसा की नर्सरी से।
72,600 पौधों का उठान होना था बिसावर की नर्सरी से।
44,800 पौधों का उठान होना था जाऊ की नर्सरी से।
10,450 पौधों का उठान होना था सिकंदराराऊ की नर्सरी से।
25,300 पौधों का उठान होना था पुदिलनगर की नर्सरी से।
चर्चा का केंद्र वन विभाग के आंकड़े बने हुए हैं। अभिलेखों में कई स्थानों पर पौधों का शत-प्रतिशत उठान दर्शाया गया, जबकि नर्सरियों में बड़ी संख्या में पौधे मौजूद बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मामला चर्चा में आने के बाद कई स्थानों पर पर्यावरण दिवस के बाद भी पौधों को जल्दबाजी में भेजा गया, ताकि रिकॉर्ड और वास्तविकता के बीच अंतर कम दिखाया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
पौधों की प्राप्ति प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि विधिवत रसीदों के बजाय साधारण कागजों और रफ पन्नों पर हस्ताक्षर लेकर पौधों का उठान दर्शाया गया। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च होने वाले पौधरोपण अभियान की वास्तविक सफलता और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
Trending Videos
जियो टैगिंग का भी नहीं नम-ओ-निशान
जिले में पर्यावरण दिवस के दिन रोपे गए पौधों की जियो टैगिंग का भी कोई लेखा-जोखा नहीं है, जबकि हर साल पौधरोपण की जियो टैगिंग की व्यवस्था रहती है। इसमें पौधों के रोपने पर उनकी जियो टैगिंग की जाती है, लेकिन इस बार पौधों के रोपण के नाम पर सिर्फ खेल हुआ है, यही कारण है कि जियो टैगिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
कागजों में पौधरोपण, जमीन पर सवाल
-पर्यावरण दिवस पर 3.38 लाख पौधों के रोपण का दावा
-कई नर्सरियों में बाद तक मौजूद रहे पौधे
-विभागीय रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति में अंतर की चर्चा
-पौधों के उठान की प्रक्रिया पर भी उठ रहे सवाल
-पौधरोपण अभियान की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न
सोखना नर्सरी से इस तरह हुआ उठान
सोखना नर्सरी से पर्यावरण दिवस वाले दिन तक पौधों के उठान पर नजर डालें तो नगर पंचायत मेंडू के लिए 25, यूपीएस बलना के लिए 30, पंचायतराज विभाग ने 10 गांवों के लिए 225, अन्य सात गांवों के लिए 175, सिंचाई विभाग के लिए 40, प्राथमिक विद्यालय व पूर्व प्राथमिक विद्यालय बोनई, दूधाधारी, केशोपुर के लिए 20-20, प्राथमिक विद्यालय ग्वारऊ कलां के लिए 20, सीएमओ ऑफिस के लिए चार, महौ स्वास्थ्य केंद्र के लिए 1597, प्राथमिक विद्यालय गढ़ी सिंघा के लिए 20, प्राथमिक विद्यालय मेंडू के लिए 20 और उच्च शिक्षा विभाग के लिए 30 पौधों का उठान किया गया। अगले दिन नगला खड़ग आदि कई जगह ट्रैक्टर व ई-रिक्शा में पौधे भिजवाए गए। यहां पांच जून को 38750 पौधों का उठान होना था, जबकि उठाए सिर्फ 2,246 पौधे ही गए।
पौधरोपण पूरी तरह सफल हुआ है। सभी नर्सरियों से पौधों का उठान किया गया है। अन्य विभागों की ओर से रिसीविंग नहीं मिली, लेकिन उन्होंने रिपोर्ट भेजी है कि उन्होंने पूरा उठान किया है।
-राकेशचंद्र यादव, प्रभागीय वनाधिकारी, हाथरस।
इन नर्सरियों से होना था पौधों का उठान
51,300 पौधों का उठान होना था सुसायत की नर्सरी से।
38,750 पौधों का उठान होना था सोखना की नर्सरी से।
42,800 पौधों का उठान होना था हतीसा की नर्सरी से।
72,600 पौधों का उठान होना था बिसावर की नर्सरी से।
44,800 पौधों का उठान होना था जाऊ की नर्सरी से।
10,450 पौधों का उठान होना था सिकंदराराऊ की नर्सरी से।
25,300 पौधों का उठान होना था पुदिलनगर की नर्सरी से।