Potato: हाथरस के आलू की अंतरराष्ट्रीय उड़ान, दुनिया को भा रहा स्वाद, सऊदी अरब-अफ्रीकी देशों को भी होगा निर्यात
भारत-आसियान व्यापार समझौते के तहत मिलने वाली टैक्स छूट ने भी हाथरस की आलू की किस्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना दिया है।
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यूरोप और चीन में ऊर्जा संकट, खराब मौसम के चलते वहां का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग दबाव में है, ऐसे में हाथरस का आलू बेहतरीन गुणवत्ता के दम पर वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रहा है। इस साल जिले से होने वाले आलू निर्यात में करीब पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत के कुल आलू निर्यात में लगभग छह प्रतिशत हाथरस से जा रहा है।
हाथरस का आलू अब दुनिया की थाली में जगह बना रहा है। इसके निर्यात से जुड़े सादाबाद निवासी राजेश चौधरी और गांव नगला सेवा निवासी विपिन चौधरी ने बताया कि यूरोप व चीन में आलू के प्रोसेसिंग उद्योग में बिजली की बढ़ी कीमतें, जलवायु प्रतिकूलता और उत्पादन लागत में इजाफा होने से बाजार में एक खालीपन पैदा हुआ, जिसे हाथरस के किसानों ने समय पर आपूर्ति और कम लागत के सहारे भर दिया।
भारत-आसियान व्यापार समझौते के तहत मिलने वाली टैक्स छूट ने भी हाथरस की आलू की किस्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना दिया है। किसान रामवीर सिंह बताते है कि यूरोप और चीन की समस्या हमारे लिए अवसर है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के शुरुआती महीनों में ही हाथरस, अलीगढ़, आगरा, चंदौसी और कानपुर जिलों के किसानों के दम पर भारत ने 53.68 करोड़ के आलू व प्रोसेस्ड आलू का निर्यात किया गया है। हाथरस के कुल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा निर्यात में जा रहा है, जबकि शेष उत्पादन दिल्ली-एनसीआर, दक्षिण भारत की मंडियों और घरेलू जरूरतों को पूरा कर रहा है। दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख देश फिलीपींस, इंडोनेशिया और थाईलैंड भी प्रमुख आयातक देशों में शामिल हो रहे हैं। वर्ष 2025 में मलयेशिया ने 18.64 करोड़ का आलू खरीदा था।
एपीईडीए के चेयरमैन अभिषेक देव ने इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश का आलू अब वैश्विक पहचान बना चुका है। अलग-अलग देशों में पिछले वर्षों से ट्रायल के तौर पर आलू भेजे जा रहे थे। सभी मानकों पर पास होने के बाद ही बड़े पैमाने पर निर्यात का रास्ता खुला है।
किसानों की मेहनत और सरकारी नीतियों के चलते हाथरस का आलू अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बना रहा है। आगे प्रोसेसिंग यूनिट और निर्यात हब को और मजबूत किया जाएगा।-प्रदीप चौधरी, विधायक सादाबाद।
किसान आलू के साथ-साथ विविध खेती को अवश्य अपनाएं, जिससे मृदा की गुणवत्ता बरकरार रहे। आलू एक्सपोर्ट करने के लिए किसान एपीडा बनारस और दिल्ली के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। वहां से उन्हें पूरा मार्गदर्शन और आवश्यक जानकारी मिल सकेगी।-सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।
प्रदेश का तीसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक जिला बना हाथरस
हाथरस प्रदेश में आगरा और फर्रुखाबाद के बाद तीसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक जिला बन गया है। बीते दो वर्षों में बढ़ी निर्यात की संभावनाओं ने जिले को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई जगह दिलाई है। जिले की सादाबाद और सासनी तहसील क्षेत्र के गांवों में आलू की 3797, एलआर, सूर्या और संताना किस्मों की पैदावार तेजी से बढ़ी है।
हाथरस के आलू निर्यात की स्थिति
- भारत के कुल निर्यात में : छह फीसदी हिस्सा अकेला हाथरस
- मलयेशिया ने खरीदा : 18.64 करोड़ का आलू
- निर्यात में वृद्धि : पांच प्रतिशत
- 2025-26 का शुरुआती आंकड़ा : 53.68 करोड़ का निर्यात
भारतीय आलू की मांग क्यों बढ़ी
- यूरोप में बिजली महंगी और मौसम प्रतिकूल होना।
- चीन में उत्पादन लागत में बढ़ोतरी होना।
- सादाबाद व सासनी : प्रोसेसिंग किस्मों का केंद्र
- प्रमुख किस्में : 3797, एलआर, सूर्या, संताना
- उपयोग : चिप्स, फ्रेंच फ्राइज, स्टार्च, पाउडर, स्नैक्स
सऊदी अरब और अफ्रीकी देशों को भी होगा निर्यात
आलू उत्पादक किसानों के लिए यह वर्ष ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है। हाथरस, आगरा, अलीगढ़, कानपुर, बाराबंकी और उन्नाव सहित पूरी आलू बेल्ट का उत्पादन अब देश की सीमाओं से बाहर निकलकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पैर जमाने वाला है। 20 अप्रैल से अफ्रीकी देशों और 15 मई से सऊदी अरब के लिए आलू निर्यात की औपचारिक शुरुआत होगी।
क्वालिटी टेस्ट और लैब रिपोर्ट के बाद 3797, चिप्सोना, सिंदुरी और होलैंड जैसी किस्में अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरी हैं। इसके बाद सऊदी अरब सरकार ने पहले चरण में यूपी से करीब 6.20 लाख टन आलू मंगवाने की मंजूरी दे दी है। नवंबर तक हर महीने इतने ही आलू का निर्यात जारी रहेगा। अफ्रीका के अंगोला, मिस्र, तंजानिया, केन्या और मोरक्को जैसे देशों ने चीन और यूरोपीय देशों की जगह भारत के आलू पर भरोसा जताया है। इन देशों ने भारत से करीब 3.48 मिलियन टन आलू आयात करने की मंजूरी दी है।
