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नींद में था पूरा परिवार: 100 किमी की थी रफ्तार, अनियंत्रित कार छह-सात बार पलटते हुए गड्ढे में जा गिरी

Mon, 17 Aug 2026 11:06 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 17 Aug 2026 11:06 AM IST
सार

हादसे में कार बुरी तरह से पिचक गई थी। सभी लोग अंदर फंस गए थे। पुलिस ने किसी तरह कार की चादर काटकर एक-एक करके सभी को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया।

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uncontrolled car overturned six or seven times and fell into a ditch
हादसे में क्षतिग्रस्त कार - फोटो : संवाद

विस्तार

सिकंदराराऊ के दिल्ली-कानपुर हाईवे पर हादसे के समय कार की रफ्तार करीब 100 किमी प्रति घंटा थी। हादसे में घायल राजीव पाल ने बताया कि पीछे की सीट पर चार लोग बैठे थे। बेटा मां की गोदी में सो रहा था। सभी नींद में थे। तभी अचानक कार अनियंत्रित हो गई।

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राजीव के अनुसार, हाईवे पर संकेतक से टकराते ही तेज धमाका हुआ। इसके बाद कार करीब 6-7 बार पलटती गई। इसी दौरान वह बेहोश हो गए थे। होश आया तो हर तरफ खून था। चीख-पुकार मची थी। कुछ लोग उन्हें निकालने का प्रयास कर रहे थे। राजीव पाल ने बताया कि बेटे और पत्नी के बारे में सोच कर मैं रोने लगा। जब उन्हें देखा तो जान में जान आई। रामजी खून से लथपथ पड़े थे। उसके मामा अवधेश और जगतपाल की भी हालत खराब थी।
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पिचक गई थी कार, अंदर फंसे थे सभी
राजीव पाल ने बताया हादसे में कार बुरी तरह से पिचक गई थी। सभी लोग अंदर फंस गए थे। पुलिस ने किसी तरह कार की चादर काटकर एक-एक करके सभी को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल से उन्होंने नोएडा में रह रहे दूसरे साले यानी रामजी के भाई को खबर की। उसने परिवार के अन्य लोगों को सूचना दी, परिजन सुबह तक अस्पताल पहुंच गए थे।

10 महीने पहले खरीदी थी पुरानी कार
मृतक रामजी के भाई श्याम ने बताया कि रामजी ने करीब 10 महीने पहले ही पुरानी होंडा कार खरीदी थी। इसी से हम लोग घर आना-जाना करते थे। रामजी के जीजा राजीव पाल के चाचा की मौत के कारण सभी एक साथ उन्नाव जा रहे थे।

मां ने सीने से चिपका लिया था बेटा
ढाई साल का नक्श कार में पीछे मां की गोद में लेटा हुआ था। जैसे ही कार ने नियंत्रण खोया तो गोल्डी ने पलक झपकते ही नक्श को अपने से सीने से चिपकाया और नीचे की ओर झुक गईं। कार पलटने से उनके सिर में गंभीर चोट आई और हाथ भी टूट गया। इसके बाद वह बेहोश हो गईं, लेकिन बेटे को अपने से अलग नहीं होने दिया। इसी कारण बच्चे को मामूली चोटें ही आईं।

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