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Jalaun News: रोक के बावजूद टेंडर में कमर्शियल ट्रैक्टर-ट्रॉली अनिवार्य
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उरई। लघु सिंचाई विभाग की अनुदान योजना के तहत खेतों में बोरिंग कार्यों के लिए जारी टेंडर में कमर्शियल पंजीकरण वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली को अनिवार्य किए जाने का मामला सवालों के घेरे में आ गया है। शासन द्वारा वर्ष 2025 में ट्रैक्टर-ट्रॉली के कमर्शियल पंजीकरण पर रोक लगाए जाने के बावजूद टेंडर की इस शर्त को लेकर शिकायत जिलाधिकारी से की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह शर्त कुछ चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जोड़ी गई, जिनके पास पहले से कमर्शियल पंजीकरण वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली उपलब्ध हैं।
बताया गया कि लघु सिंचाई विभाग ने 9 अप्रैल 2026 को अनुदान योजना के अंतर्गत खेतों में बोरिंग कार्य कराने के लिए टेंडर जारी किया था। टेंडर की शर्तों में कमर्शियल पंजीकरण वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली अनिवार्य कर दी गई, जबकि शासन पहले ही ऐसे पंजीकरण पर रोक लगा चुका है। इससे अन्य इच्छुक ठेकेदारों के लिए टेंडर प्रक्रिया में भाग लेना मुश्किल हो गया।
मामले की शिकायत जिलाधिकारी से किए जाने पर जांच के आदेश दिए गए हैं। इस बीच टेंडर जारी करने वाले तत्कालीन अधिशासी अभियंता का तबादला हो चुका है। वर्तमान अधिशासी अभियंता मोहन प्रकाश पासवान ने बताया कि पूरे प्रकरण को सर्किल कार्यालय की बैठक में रखा जाएगा और वहां से जो निर्णय होगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बताया गया कि लघु सिंचाई विभाग ने 9 अप्रैल 2026 को अनुदान योजना के अंतर्गत खेतों में बोरिंग कार्य कराने के लिए टेंडर जारी किया था। टेंडर की शर्तों में कमर्शियल पंजीकरण वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली अनिवार्य कर दी गई, जबकि शासन पहले ही ऐसे पंजीकरण पर रोक लगा चुका है। इससे अन्य इच्छुक ठेकेदारों के लिए टेंडर प्रक्रिया में भाग लेना मुश्किल हो गया।
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मामले की शिकायत जिलाधिकारी से किए जाने पर जांच के आदेश दिए गए हैं। इस बीच टेंडर जारी करने वाले तत्कालीन अधिशासी अभियंता का तबादला हो चुका है। वर्तमान अधिशासी अभियंता मोहन प्रकाश पासवान ने बताया कि पूरे प्रकरण को सर्किल कार्यालय की बैठक में रखा जाएगा और वहां से जो निर्णय होगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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