{"_id":"69bd96d8007bb4976a0826a8","slug":"drizzle-drops-mercury-by-seven-degrees-wheat-farmers-worried-orai-news-c-224-1-ori1005-141907-2026-03-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jalaun News: बूंदाबांदी से सात डिग्री गिरा पारा, गेहूं के किसान परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jalaun News: बूंदाबांदी से सात डिग्री गिरा पारा, गेहूं के किसान परेशान
विज्ञापन
फोटो - 21 सुबह से रिमझिम बारिश में भीगी मसूर की कटी फसल ।संवाद
- फोटो : फुरसतगंज स्थित मस्जिद में नमाज अदा करते अकीदतमंद।
विज्ञापन
उरई। जिले में शुक्रवार सुबह अचानक मौसम ने करवट ले ली। बूंदाबांदी ने गेहूं और दलहनी फसलों के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तापमान भी सात डिग्री तक गिर गया। एक दिन पहले अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस था, वहीं शुक्रवार को 23 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया।
सुबह से रुक-रुक कर हो रही हल्की बारिश और ठंडी हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस समय खेतों में गेहूं की फसल कहीं कटकर पड़ी है तो कई जगह कटाई जारी है। ऐसे में बूंदाबांदी से फसल भीगने और खराब होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं सरसों और चना जैसी दलहनी फसलें भी खेतों में तैयार खड़ी हैं, जिन पर मौसम का प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
किसानों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह बना रहा तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। भीगी फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ उत्पादन में कमी आने की आशंका है। खासकर जिन किसानों की फसल खेतों में कटी पड़ी है, उनकी चिंता सबसे अधिक बढ़ गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से यह बदलाव आया है। अगले 24 से 48 घंटों तक बादल छाए रहने और हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बनी रहेगी। इसके बाद मौसम साफ होने और तापमान में फिर से बढ़ोतरी के आसार हैं।
कटी फसलें भीगने से नुकसान
कदौरा। ब्लॉक क्षेत्र में शुक्रवार सुबह हुई बे-मौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में कटी फसलें और घरों में सूखने के लिए रखी मटर व मसूर बारिश में भीग गईं। इससे आर्थिक नुकसान की संभावना जताई जा रही है।
अब किसान धूप निकलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि भीगी फसल को दोबारा सुखाया जा सके। इससे कृषि कार्य में देरी के साथ अतिरिक्त मेहनत और लागत बढ़ने की आशंका है। किसानों विपिन शुक्ला, अनिरुद्ध, राघवेन्द्र, विनीत, संतोष कुशवाहा, बब्लू यादव और श्रीकांत ने बताया कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो नुकसान और बढ़ सकता है। हालांकि, जिन किसानों की गेहूं की फसल अभी खेतों में खड़ी है और तीसरे पानी का इंतजार कर रही थी, उनके लिए यह बारिश कुछ हद तक लाभकारी भी हो सकती है। लेकिन तेज हवा के साथ बारिश होने पर फसल गिरने का खतरा बना हुआ है। (संवाद)
बूंदाबांदी और तेज हवा से सहमे किसान, खेतों में फसल समेटने में जुटे
आटा। सुबह करीब छह बजे से आसमान में बादल छाए रहे और दिनभर हल्की बारिश व तेज हवाएं चलती रहीं। मौसम के इस बदलाव ने खड़ी और कटी दोनों प्रकार की फसलों के लिए खतरा पैदा कर दिया। बूंदाबांदी शुरू होते ही किसान खेतों की ओर दौड़ पड़े और कई किसान बिना भोजन किए ही फसल को सुरक्षित करने में लगे रहे।
खेतों में कटी पड़ी मटर और सरसों की फसल को बचाने के लिए किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से उसे सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाते नजर आए। वहीं तेज हवा के कारण गेहूं की खड़ी फसल गिरने की आशंका से किसान चिंतित हैं।
किसान रामप्रकाश पाल, चक्रमोहन, अखिल, आशाराम और श्यामजी ने बताया कि इस समय करीब 70 प्रतिशत गेहूं की फसल खेतों में खड़ी है, जबकि मटर की फसल कई जगह कटकर पड़ी है। ऐसे में बूंदाबांदी से मटर की फसल खराब होने का खतरा है और सरसों पर भी असर पड़ सकता है। किसानों ने आशंका जताई कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो नुकसान बढ़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से फसल नुकसान का आकलन कराने की मांग की है।
वर्जन
कटी फसल को जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर ढककर रखें, ताकि नमी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। साथ ही खड़ी फसल के खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखें।
- विस्टर जोशी, कृषि वैज्ञानिक।
Trending Videos
सुबह से रुक-रुक कर हो रही हल्की बारिश और ठंडी हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस समय खेतों में गेहूं की फसल कहीं कटकर पड़ी है तो कई जगह कटाई जारी है। ऐसे में बूंदाबांदी से फसल भीगने और खराब होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं सरसों और चना जैसी दलहनी फसलें भी खेतों में तैयार खड़ी हैं, जिन पर मौसम का प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
किसानों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह बना रहा तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। भीगी फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ उत्पादन में कमी आने की आशंका है। खासकर जिन किसानों की फसल खेतों में कटी पड़ी है, उनकी चिंता सबसे अधिक बढ़ गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से यह बदलाव आया है। अगले 24 से 48 घंटों तक बादल छाए रहने और हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बनी रहेगी। इसके बाद मौसम साफ होने और तापमान में फिर से बढ़ोतरी के आसार हैं।
कटी फसलें भीगने से नुकसान
कदौरा। ब्लॉक क्षेत्र में शुक्रवार सुबह हुई बे-मौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में कटी फसलें और घरों में सूखने के लिए रखी मटर व मसूर बारिश में भीग गईं। इससे आर्थिक नुकसान की संभावना जताई जा रही है।
अब किसान धूप निकलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि भीगी फसल को दोबारा सुखाया जा सके। इससे कृषि कार्य में देरी के साथ अतिरिक्त मेहनत और लागत बढ़ने की आशंका है। किसानों विपिन शुक्ला, अनिरुद्ध, राघवेन्द्र, विनीत, संतोष कुशवाहा, बब्लू यादव और श्रीकांत ने बताया कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो नुकसान और बढ़ सकता है। हालांकि, जिन किसानों की गेहूं की फसल अभी खेतों में खड़ी है और तीसरे पानी का इंतजार कर रही थी, उनके लिए यह बारिश कुछ हद तक लाभकारी भी हो सकती है। लेकिन तेज हवा के साथ बारिश होने पर फसल गिरने का खतरा बना हुआ है। (संवाद)
बूंदाबांदी और तेज हवा से सहमे किसान, खेतों में फसल समेटने में जुटे
आटा। सुबह करीब छह बजे से आसमान में बादल छाए रहे और दिनभर हल्की बारिश व तेज हवाएं चलती रहीं। मौसम के इस बदलाव ने खड़ी और कटी दोनों प्रकार की फसलों के लिए खतरा पैदा कर दिया। बूंदाबांदी शुरू होते ही किसान खेतों की ओर दौड़ पड़े और कई किसान बिना भोजन किए ही फसल को सुरक्षित करने में लगे रहे।
खेतों में कटी पड़ी मटर और सरसों की फसल को बचाने के लिए किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से उसे सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाते नजर आए। वहीं तेज हवा के कारण गेहूं की खड़ी फसल गिरने की आशंका से किसान चिंतित हैं।
किसान रामप्रकाश पाल, चक्रमोहन, अखिल, आशाराम और श्यामजी ने बताया कि इस समय करीब 70 प्रतिशत गेहूं की फसल खेतों में खड़ी है, जबकि मटर की फसल कई जगह कटकर पड़ी है। ऐसे में बूंदाबांदी से मटर की फसल खराब होने का खतरा है और सरसों पर भी असर पड़ सकता है। किसानों ने आशंका जताई कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो नुकसान बढ़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से फसल नुकसान का आकलन कराने की मांग की है।
वर्जन
कटी फसल को जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर ढककर रखें, ताकि नमी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। साथ ही खड़ी फसल के खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखें।
- विस्टर जोशी, कृषि वैज्ञानिक।

फोटो - 21 सुबह से रिमझिम बारिश में भीगी मसूर की कटी फसल ।संवाद- फोटो : फुरसतगंज स्थित मस्जिद में नमाज अदा करते अकीदतमंद।

फोटो - 21 सुबह से रिमझिम बारिश में भीगी मसूर की कटी फसल ।संवाद- फोटो : फुरसतगंज स्थित मस्जिद में नमाज अदा करते अकीदतमंद।