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Jalaun News: मौसम का बदला मिजाज किसानों पर भारी, फसलों पर संकट
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फोटो - 04 खेतों में कटी पड़ी फसल। संवाद
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उरई। जिले में इस बार मौसम का बदला मिजाज किसानों के लिए चुनौती बन गया है। फरवरी से पछुआ हवाएं चल रही हैं और मार्च में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया है। दो दिनों में हुई बारिश और हवाओं ने खेतों में खड़ी व कटी दोनों तरह की फसलों को नुकसान पहुंचाया है।
वर्तमान में रबी की फसलें पूरी तरह तैयार हैं। चना, मटर, मसूर और बेझर जैसी फसलें कटकर खेतों में पड़ी हैं। गेहूं भी पककर कटाई के मुहाने पर है। यदि मौसम साफ रहता तो 10 से 15 दिनों में गेहूं घर पहुंच जाता। सोमवार को जिले में आंशिक बादल छाए रहे और हल्की ठंडी हवा चलती रही। अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 से 20 डिग्री के बीच रहा।
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक तेज हवा और बादलों का असर बने रहने का अनुमान जताया है। पांच दिनों में मौसम ने कई बार करवट बदली है। फसलों पर इसका असर दिख रहा है।
मौसम के इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर गेहूं, चना, मटर, मसूर और सरसों पर पड़ रहा है। गेहूं में दाना भराव प्रभावित होने की आशंका है। इससे गुणवत्ता और वजन पर असर पड़ेगा। कटी हुई दलहनी फसलें जैसे चना, मटर और मसूर भीगने से खराब हो सकती हैं। बेझर में नमी बढ़ने से उसकी गुणवत्ता गिरने का खतरा है।
किसान रामसेवक, प्रकाश निरंजन, दीपू, बुंदेला और रिंकू ने बताया कि फसल तैयार है पर नुकसान का डर बना हुआ है। उनका कहना है कि गेहूं की पैदावार पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। इस समय किसानों के सामने कटी फसल को सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती है। साथ ही, खेतों में खड़ी फसल को भी बचाना मुश्किल हो रहा है। आने वाले 10 से 15 दिन किसानों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञ विस्टर जोशी के अनुसार, तेज हवा और बढ़ता तापमान फसलों के लिए हानिकारक है। इससे गेहूं के दाने कमजोर हो सकते हैं और पैदावार में 10 से 15 फीसदी तक कमी आ सकती है। दलहनी फसलों में 15 से 20 फीसदी तक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। मौसम का यही रुख बना रहा तो किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है। मौसम साफ रहने पर ही फसल सुरक्षित घर पहुंच पाएगी।
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वर्तमान में रबी की फसलें पूरी तरह तैयार हैं। चना, मटर, मसूर और बेझर जैसी फसलें कटकर खेतों में पड़ी हैं। गेहूं भी पककर कटाई के मुहाने पर है। यदि मौसम साफ रहता तो 10 से 15 दिनों में गेहूं घर पहुंच जाता। सोमवार को जिले में आंशिक बादल छाए रहे और हल्की ठंडी हवा चलती रही। अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 से 20 डिग्री के बीच रहा।
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मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक तेज हवा और बादलों का असर बने रहने का अनुमान जताया है। पांच दिनों में मौसम ने कई बार करवट बदली है। फसलों पर इसका असर दिख रहा है।
मौसम के इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर गेहूं, चना, मटर, मसूर और सरसों पर पड़ रहा है। गेहूं में दाना भराव प्रभावित होने की आशंका है। इससे गुणवत्ता और वजन पर असर पड़ेगा। कटी हुई दलहनी फसलें जैसे चना, मटर और मसूर भीगने से खराब हो सकती हैं। बेझर में नमी बढ़ने से उसकी गुणवत्ता गिरने का खतरा है।
किसान रामसेवक, प्रकाश निरंजन, दीपू, बुंदेला और रिंकू ने बताया कि फसल तैयार है पर नुकसान का डर बना हुआ है। उनका कहना है कि गेहूं की पैदावार पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। इस समय किसानों के सामने कटी फसल को सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती है। साथ ही, खेतों में खड़ी फसल को भी बचाना मुश्किल हो रहा है। आने वाले 10 से 15 दिन किसानों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञ विस्टर जोशी के अनुसार, तेज हवा और बढ़ता तापमान फसलों के लिए हानिकारक है। इससे गेहूं के दाने कमजोर हो सकते हैं और पैदावार में 10 से 15 फीसदी तक कमी आ सकती है। दलहनी फसलों में 15 से 20 फीसदी तक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। मौसम का यही रुख बना रहा तो किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है। मौसम साफ रहने पर ही फसल सुरक्षित घर पहुंच पाएगी।