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Jalaun News: तपिश से झुलसी फसल, पानी के संकट ने बढ़ाई किसानों की चिंता

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2026 12:38 AM IST
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Heat scorched crops, water crisis worries farmers
फोटो - 07 पानी न मिलने के कारण सूख रही गेहूं की फसल। संवाद
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मुहम्मदाबाद। डकोर क्षेत्र में बढ़ती गर्मी और पानी की किल्लत ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेज धूप और लगातार बढ़ते तापमान के कारण 20 प्रतिशत गेहूं की फसल समय से पहले सूखने लगी है। खेतों में दरारें पड़ गई हैं और दाना बनने से पहले ही फसल मुरझा रही है। जिले में तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है, जो गेहूं के लिए उपयुक्त 20 से 25 डिग्री से काफी अधिक है।
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अधिक तापमान के चलते फसल का विकास रुक गया है और पौधे झुलसने लगे हैं। इससे गेहूं के उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। सिंचाई की समस्या स्थिति को और गंभीर बना रही है। अधिकतर नहरें सूखी चल रही हैं, क्योंकि उनका संचालन 13 मार्च तक ही होता है।
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उरई-टिमरो माइनर सूखा पड़ा है और रजबहा भी बंद है। किसानों को मजबूरन निजी ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ रहा है। निजी सिंचाई के लिए किसानों को करीब 800 रुपये प्रति बीघा खर्च करना पड़ रहा है। इससे उनकी लागत लगातार बढ़ रही है और कई किसान पानी नहीं खरीद पा रहे हैं।
किसान लखन राजपूत, तारिक अली, रमेश कुमार, दिवाकर राजपूत, फहीम खान और देवेंद्र सिंह ने बताया कि मार्च में अचानक बढ़े तापमान ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। फसल का पौधा न तो बढ़ पा रहा है और न ही दाना बन पा रहा है। इससे लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
किसान पूरन वर्मा ने कहा कि सामान्यतः गेहूं की फसल तीन सिंचाई में तैयार होती है। लेकिन इस बार अधिक तापमान के कारण खेत जल्दी सूख रहे हैं और दरारें पड़ रही हैं। महंगी सिंचाई के कारण दो पानी देने के बाद फसल को भगवान भरोसे छोड़ना पड़ा है।
रियाज खान ने बताया कि पहले बारिश के कारण चना, मटर और मसूर की बोआई नहीं हो सकी थी। इसके चलते मजबूरी में गेहूं की खेती करनी पड़ी।


दाने पर असर और मौसम वैज्ञानिक की सलाह

तेज धूप पड़ने से किसान परेशान हैं क्योंकि गेहूं का दाना कमजोर होने की आशंका है। जिले में इस समय करीब अस्सी फीसदी गेहूं की फसल तैयार हो चुकी है। गेहूं की बालियों में दाना अब पक रहा है। ऐसे में लगातार तेज धूप पड़ने से दाने की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। मौसम वैज्ञानिक विस्टर जोशी का कहना है कि किसानों को खेतों में नमी बनाए रखने की जरूरत है। यह सलाह फसल को तेज गर्मी के प्रतिकूल प्रभावों से बचाने में सहायक हो सकती है।


वर्जन
13 मार्च को नहरों का संचालन बंद कर दिया गया है। अब नहरों का संचालन मई में किया जाएगा। क्योंकि तब तालाबों व पोखरों को उस पानी से भरा जाएगा।


- धर्मघोष, अधिशासी अभियंता, बेतवा नहर।

फोटो - 07 पानी न मिलने के कारण सूख रही गेहूं की फसल। संवाद

फोटो - 07 पानी न मिलने के कारण सूख रही गेहूं की फसल। संवाद

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