{"_id":"6a4fec89a6540fc00100d444","slug":"orai-orai-news-crime-orai-news-c-224-1-ori1005-146564-2026-07-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jalaun News: मिलावटखोरों पर 10.22 लाख रुपये का जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jalaun News: मिलावटखोरों पर 10.22 लाख रुपये का जुर्माना
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उरई। जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अब तक मिलावट के मामलों में दोषी पाए गए कारोबारियों पर 10 लाख 22 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। इनमें दूध में मिलावट के नौ मामलों में ही 5 लाख 72 हजार 500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक में डीएम राजेश कुमार पांडेय ने खाद्य एवं औषधि विभाग को मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रखने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि चालू वित्तीय वर्ष में खाद्य पदार्थों के 52 नमूने लिए गए, जिनमें से 15 मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। सभी मामलों में न्यायालय में वाद दायर कर कार्रवाई की जा रही है।
औषधि विभाग की ओर से वर्ष के दौरान 37 मेडिकल प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया और 26 दवाओं के नमूने जांच के लिए लिए गए। इनमें एक दवा का नमूना अधोमानक पाया गया, जिसके संबंध में न्यायालय में मामला दर्ज कराया गया है।
विज्ञापन
डीएम ने दूध, फल, रंगयुक्त परवल और भिंडी, मसाले, खाद्य तेल, जूस और शीतल पेयों की नियमित सैंपलिंग कराने के निर्देश दिए। साथ ही मेडिकल स्टोरों में पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने और जीएसटी पंजीकरण के दायरे में लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि थोक और फुटकर विक्रेताओं की नियमित निगरानी की जाए, ताकि उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक में डीएम राजेश कुमार पांडेय ने खाद्य एवं औषधि विभाग को मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रखने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि चालू वित्तीय वर्ष में खाद्य पदार्थों के 52 नमूने लिए गए, जिनमें से 15 मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। सभी मामलों में न्यायालय में वाद दायर कर कार्रवाई की जा रही है।
विज्ञापन
औषधि विभाग की ओर से वर्ष के दौरान 37 मेडिकल प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया और 26 दवाओं के नमूने जांच के लिए लिए गए। इनमें एक दवा का नमूना अधोमानक पाया गया, जिसके संबंध में न्यायालय में मामला दर्ज कराया गया है।
विज्ञापन
डीएम ने दूध, फल, रंगयुक्त परवल और भिंडी, मसाले, खाद्य तेल, जूस और शीतल पेयों की नियमित सैंपलिंग कराने के निर्देश दिए। साथ ही मेडिकल स्टोरों में पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने और जीएसटी पंजीकरण के दायरे में लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि थोक और फुटकर विक्रेताओं की नियमित निगरानी की जाए, ताकि उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।