Jalaun: 22 साल बाद मिला इंसाफ, डकैती और फायरिंग के दो दोषियों को कोर्ट ने सुनाई 10-10 साल की कठोर सजा
Jalaun News: डकोर थाना क्षेत्र में वर्ष 2004 में हुई डकैती और फायरिंग के मामले में करीब 22 साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया। विशेष डकैती न्यायालय ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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वह खौफनाक रात, जब गूंजी थीं गोलियां
पूरा मामला डकोर थाना क्षेत्र का है, जहां 12 दिसंबर 2004 की रात करीब ढाई बजे पूरा इलाका गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा था। पीड़ित जागेश्वर दयाल के घर को निशाना बनाते हुए सात से आठ सशस्त्र बदमाशों ने धावा बोल दिया था। शातिर बदमाश मकान के पीछे के रास्ते से होते हुए छत पर चढ़े और घर के भीतर दाखिल हो गए। बदमाशों ने घर में रखा कीमती बक्सा समेट लिया और भागने की फिराक में थे।
बदमाशों की आहट और बक्सा ले जाने की भनक लगते ही पीड़ित परिवार और आसपास के ग्रामीण जाग गए। घर के सदस्य अरविंद कुमार उर्फ राजू ने अपनी जान की परवाह न करते हुए अदम्य साहस दिखाया और भाग रहे एक बदमाश को पीछे से दबोचने का प्रयास किया।
खुद को घिरता देख और पकड़े जाने के डर से बौखलाए बदमाश ने अरविंद पर सीधे तमंचे से फायरिंग झोंक दी। गोली अरविंद के पैर में लगी और वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देकर बदमाश घर से करीब 15 हजार रुपये नकद, सोने-चांदी के कीमती आभूषण, साड़ियां और जरूरी दस्तावेज लूटकर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गए थे।
22 साल चली कानूनी लड़ाई, एक आरोपी अब भी फरार
वारदात के बाद डकोर थाना पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए तफ्तीश शुरू की और मामले में तीन आरोपियों— कृपाल सिंह, देवेन्द्र सिंह और रमेश के खिलाफ अदालत में पुख्ता चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की थी।
अदालती विचारण के दौरान एक आरोपी कृपाल सिंह लगातार कोर्ट से अनुपस्थित रहा और फरार हो गया, जिसके चलते कोर्ट के आदेश पर उसकी पत्रावली को मुख्य केस से अलग कर दिया गया। पुलिस अब उसकी तलाश में जुटी है। वहीं, बाकी बचे दो आरोपियों देवेंद्र सिंह और रमेश के खिलाफ अदालत में लगातार सुनवाई जारी रही।
अदालत का फैसला: दोनों सजाएं चलेंगी साथ-साथ
विशेष अदालत ने अभियोजन पक्ष के गवाहों, बयानों और पुलिस द्वारा पेश किए गए अकाट्य सबूतों के आधार पर देवेंद्र सिंह और रमेश को डकैती और जानलेवा हमले का मुख्य दोषी माना। कोर्ट ने दोनों दोषियों को अलग-अलग धाराओं के तहत कड़ी सजा सुनाई:अदालत ने दोनों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी। इसके साथ ही धारा 397 आईपीसी के तहत 7-7 वर्ष के कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये के अतिरिक्त अर्थदंड से दंडित किया।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ये दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसके अलावा, दोषियों द्वारा पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को इस मुख्य सजा में समायोजित किया जाएगा। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है और कहा कि देर से ही सही, लेकिन कानून ने उन्हें सच्चा इंसाफ दिया है।