UP: अब ‘झूठ' बोलना पड़ेगा भारी, आवाज खोल देगी अपराधियों के राज, डिजिटल सच अब लैब में होगा बेनकाब, पढ़ें मामला
Kannauj FSL News: कन्नौज स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) का विस्तार करते हुए इसमें तीन नए अनुभाग कंप्यूटर फॉरेंसिक, फॉरेंसिक एकास्टिक (ध्वनि विज्ञान) और विस्फोटक सक्रिय कर दिए गए हैं। अब यहां से कानपुर और आगरा जोन के डिजिटल साक्ष्यों और बम/विस्फोटकों की जांच तेजी से हो सकेगी, जिससे अदालती कार्रवाई में तेजी आएगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कन्नौज जिले में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निकवा कट पर स्थित आईएसओ प्रमाणित विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) का दायरा बढ़ गया है। लैब में अब चार की जगह सात अनुभागों में काम हो रहा है। इससे जांच रिपोर्ट में तेजी आएगी और पीड़ितों को जल्द न्याय मिलेगा।
यूपी के सभी जिलों के बम और आवाज के नमूने अब यहीं जांचे जाएंगे। एक जुलाई से लैब में कंप्यूटर फॉरेंसिक, फॉरेंसिक एकास्टिक (ध्वनि विज्ञान) और विस्फोटक अनुभाग पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। कानपुर और आगरा जोन के सभी जिलों के कंप्यूटर फॉरेंसिक और डेटा रिकवरी से जुड़े मामले भी यहीं सुलझेंगे।
जल्द ही कोर्ट के सामने पेश की जाएगी रिपोर्ट
विधि विज्ञान प्रयोगशाला की प्रभारी उपनिदेशक रश्मि गुप्ता ने बताया कि मंडल भर से आए वॉयस रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच तेजी से चल रही है। इनकी पुख्ता रिपोर्ट जल्द ही कोर्ट के सामने पेश की जाएगी। प्रयोगशाला में पहले बायोलॉजी, विष, रसायन और प्रलेख समेत छह अनुभाग थे।
लैब को डिजिटल और एकास्टिक की नई ताकत मिली
सीरोलॉजी (रक्त परीक्षण) और भौतिकी (इंजन व चेसिस नंबर रेस्टोरेशन) अनुभागों को झांसी विधि विज्ञान प्रयोगशाला में हस्तांतरित कर दिया गया है। इसके बदले कन्नौज लैब को डिजिटल और एकास्टिक की नई ताकत मिली है।
डाटा की शत-प्रतिशत रिकवरी हो सकेगी
कंप्यूटर, मोबाइल और सीसीटीवी से डिलीट हो चुके डाटा की शत-प्रतिशत रिकवरी हो सकेगी। धमकी, ब्लैकमेलिंग या अश्लील कॉल्स में रिकॉर्ड आवाज असली है या नकली, इसका मिलान अब आसानी से होगा। बम और बारूद व अन्य विस्फोटकों के परीक्षण भी यहां होंगे।
फॉरेंसिक लैब में कंप्यूटर फॉरेंसिक, फॉरेंसिक एकास्टिक (ध्वनि विज्ञान) और विस्फोटक अनुभाग पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। इससे निश्चित ही कानपुर मंडल के जिलों में वैज्ञानिक व डिजिटल साक्ष्यों में तेजी आएगी। कोर्ट में सही समय पर साक्ष्य उपलब्ध होंगे, तो पीड़ितों को त्वरित न्याय भी मिलेगा। -विनोद कुमार, पुलिस अधीक्षक