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Jalaun News: उरई में 200 करोड़ की पेयजल परियोजना में अनियमितताओं के आरोप
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फोटो - 20 पेयजल परियोजना के लिए खोदी जा रही सड़क। संवाद
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उरई। शहर में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से अमृत योजना 2.0 के तहत नई पेयजल पाइपलाइन बिछाने का कार्य तेजी से कराया जा रहा है, लेकिन शुरुआत से ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। विभिन्न वार्डों से पाइपलाइन मानकों के विपरीत बिछाने, सड़कें खोदकर अधूरी छोड़ने, अंडरग्राउंड बिजली केबल क्षतिग्रस्त करने और स्थानीय लोगों से अभद्रता जैसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
शहर के मैकेनिक नगर, नया पटेल नगर सहित शहर के कई इलाकों में खोदाई के बाद सड़कें और गलियां अधूरी छोड़ दी गई हैं। कई स्थानों पर महीनों पहले खोदी गई सड़कों की मरम्मत तक नहीं हुई, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बरसात के मौसम में हालात और खराब हो गए हैं। राहुल कुशवाहा, पवन, मीरा देवी, दिव्यांशु, हाशिम अली आदि का आरोप है कि जिन पाइपलाइनों को तकनीकी मानकों के अनुसार तीन से चार फीट गहराई में डाला जाना चाहिए, उन्हें कई स्थानों पर करीब दो फीट गहराई में ही बिछाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में भारी वाहनों के दबाव के कारण पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने और लीकेज की समस्या बढ़ सकती है।
विधायक ने उठाए सवाल, जल निगम ने जांच का दिया भरोसा
सदर विधायक गौरी शंकर वर्मा ने भी परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए शासन को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं और गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही स्थलीय निरीक्षण कराकर शासन स्तर पर शिकायत की जाएगी।
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वहीं जल निगम (शहरी) के अधिशासी अभियंता हिमांशु नेगी ने कहा कि यदि कहीं भी मानकों के विपरीत कार्य या अन्य शिकायतें सामने आती हैं तो विभागीय टीम मौके पर भेजकर जांच कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई करते हुए समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।
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शहर के मैकेनिक नगर, नया पटेल नगर सहित शहर के कई इलाकों में खोदाई के बाद सड़कें और गलियां अधूरी छोड़ दी गई हैं। कई स्थानों पर महीनों पहले खोदी गई सड़कों की मरम्मत तक नहीं हुई, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बरसात के मौसम में हालात और खराब हो गए हैं। राहुल कुशवाहा, पवन, मीरा देवी, दिव्यांशु, हाशिम अली आदि का आरोप है कि जिन पाइपलाइनों को तकनीकी मानकों के अनुसार तीन से चार फीट गहराई में डाला जाना चाहिए, उन्हें कई स्थानों पर करीब दो फीट गहराई में ही बिछाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में भारी वाहनों के दबाव के कारण पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने और लीकेज की समस्या बढ़ सकती है।
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विधायक ने उठाए सवाल, जल निगम ने जांच का दिया भरोसा
सदर विधायक गौरी शंकर वर्मा ने भी परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए शासन को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं और गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही स्थलीय निरीक्षण कराकर शासन स्तर पर शिकायत की जाएगी।
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वहीं जल निगम (शहरी) के अधिशासी अभियंता हिमांशु नेगी ने कहा कि यदि कहीं भी मानकों के विपरीत कार्य या अन्य शिकायतें सामने आती हैं तो विभागीय टीम मौके पर भेजकर जांच कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई करते हुए समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।